किसानों के लिए बड़ा फैसला, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान की शुरुआत

kishan

देश के किसानों के कल्याण को अपनी पहली प्राथमिकता बताने वाली केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अन्नदाता के लिए एक और बड़े कदम का एलान करते प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान यानी पीएम आशा योजना शुरु की है। बुधवार को पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस अनाज खरीद नीति के बारे में फैसला हुआ।

इस योजना का लक्ष्य किसानों को 2018 के लिए केंद्रीय बजट के मुताबिक उनके उत्पादन के लिए लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है। दरअसल सरकार की इस योजना का मकसद न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत से डेढ़ गुना करने के एलान को मूर्तरूप देना का है । योजना के तहत  किसानों को फसल का लाभकारी मूल्य दिलाने की व्यवस्था की गयी है । योजना में किसानों से अन्न खरीदने के लिए तीन तरह की प्रक्रिया की व्यवस्था की जा रही है ।

इसमें मूल्य सहाय़ता योजना (पीएसएस), मूल्य कमी भुगतान योजना (पीडीपीएस) और  निजी ख़रीद और स्टॉक स्कीम की पायलट योजना शामिल है। नई नीति में राज्य सरकारों को विकल्प होगा कि वे कीमतें एमएसपी से नीचे जाने पर वे किसानों के संरक्षण के लिए विभिन्न योजनाओं में से किसी का भी चयन कर सकें। योजना के बारे में विस्तार से समझें तो।

मौजूदा मूल्य सहायता योजना के तहत दलहन  तिलहन और कोपरा समेत तमाम फसलों की सीधी खरीद केंद्र की एजेंसियों के साथ ही राज्य सरकार द्वारा की जाएगी। इसमें खरीद खर्च की भरपाई केंद्र सरकार करेगी और साथ ही केंद्र सरकार खरीद में हुए नुकसान का 25 फीसदी भी वहन करेगी। मूल्य न्य़ूनता भुगतान योजना के तहत वो सभी तिहलन फसलें शामिल होंगी जिनके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य का एलान हो चुका है । ये मध्य प्रदेश में पहले से लागू भावान्तर भुगतान योजना जैसी स्कीम है. इसके तहत अगर फ़सल का दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम होगा तो समर्थन मूल्य और फ़सल के दाम के अंतर का भुगतान सरकार करेगी।

तीसरी योजना के तहत खरीद में  निजी कंपनियों को भी शामिल किया जा रहा है। चूंकि पहली दोनों स्कीम सरकार से जुड़ी हैं इसलिए सरकार अनाज की ख़रीद में निजी कंपनियों को भी शामिल करना चाहती है। राज्य सरकारें फ़सलों के दाम समर्थन मूल्य से नीचे जाने की हालत में कुछ चुनिंदा निजी कंपनियों को अनाज ख़रीदने की इजाज़त दे सकती हैं। इस विकल्प को फिलहाल केवल पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ही शुरू किया जाएगा।

इसका फ़ैसला राज्यों पर छोड़ा जाएगा कि वो अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ किस विकल्प को चुनते हैं. सरकार का फोकस इस बात पर ज़्यादा है कि किसानों को कम से कम समर्थन मूल्य जितना दाम ज़रूर मिल सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योजना को अहम बताते हुए किसानों के कल्याण की प्रतिबद्धता फिर से दुहराई है । उन्होंने ट्वीट किया- देश का हर नागरिक हमारे मेहनतकश किसानों का आभारी है। हम 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के सपने को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए हम कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

मंत्रिमंडल ने इस योजना के लिए 16,550 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सरकारी गारंटी देने का फैसला किया है और अब ये बढकर कुल 45,550 करोड़ रुपये हो गया है । इसके अलावा, खरीद व्यवस्था के लिए बजट प्रावधान भी बढ़ाया गया है और पीएम आशा योजना के कार्यान्वयन के लिए 15,053 करोड़ रूपये मंजूर किए गए हैं। इस साल बजट में सरकार ने घोषणा की थी कि वह किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने के लिए ‘फूलप्रूफ’ व्यवस्था बनाएगी। सरकार ने नीति आयोग से केंद्रीय कृषि मंत्रालय और राज्यों के साथ विचार विमर्श करके किसी प्रणाली के बारे में सुझाव देने को कहा था। उन्हीं के आधार पर ये योजना लायी गयी है।

कुल मिलाकर सरकार की यह नीति सरकार की उस कोशिश  का हिस्सा है जिससे बाजार मूल्‍य के सरकार द्वारा तय दाम से नीचे जाने पर भी किसानों को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य मिलना सुनिश्चित किया जाएगा । सरकार ने किसानों को उनकी उत्पादन की लागत डेढ गुना दिलाने के लिए  खरीफ फसलों के एमएसपी को पहले ही बढ़ा दिया है। अब उम्मीद है कि ताजा फैसले से किसान की आय में और इजाफा होगा।

Related posts