रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-चीन गतिरोध पर संसद को संबोधित किया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत अपने सीमा क्षेत्रों पर मौजूद वर्तमान मसलों को शांतिपूर्ण बातचीत और विचार विमर्श के साथ हल करने के लिए प्रतिबद्ध है। रक्षा मंत्री ने कहा कि आपसी सम्मान और संवेदनशीलता पड़ोसियों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखने का आधार है। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उत्पन्न स्थिति के बारे में आज लोकसभा में दिए गए बयान में उन्होंने कहा कि भारत मौजूदा स्थिति को बातचीत से हल करने के प्रति गंभीर है। रक्षा मंत्री ने सदन को बताया कि भारत तीन प्रमुख सिद्धांतों पर गंभीर रुख अपनाए हुए है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को वास्तविक नियंत्रण रेखा का पूरी तरह सम्मान करना चाहिए और किसी को भी एकतरफा कार्रवाई करके स्थिति बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सभी समझौतों को पूर्णता के साथ अमल में लाना चाहिए। उन्होंने सदन से उन सशस्त्र बलों के हित में एक प्रस्ताव पारित करने को भी कहा, जो खराब मौसम की स्थितियों में भी ऊंचाई वाले स्थानों पर मातृभूमि की रक्षा में डटे हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन लद्दाख में लगभग 38 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र पर लगातार गैर-कानूनी कब्जा बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि तथाकथित चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता, 1963 के अंतर्गत पाकिस्तान ने गैर-कानूनी तरीके से पाक अधिकृत कश्मीर का पांच हजार एक सौ अस्सी वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चीन को सौंप दिया है। रक्षामंत्री ने कहा कि पहले भी चीन के साथ सीमा क्षेत्र पर टकराव की स्थितियां बनी थीं, जिन्हें शांतिपूर्ण ढंग से हल कर लिया गया था। उन्होंने कहा कि इस वर्ष की स्थिति यद्यपि पहले से भिन्न है और टकराव वाले स्थानों पर सैनिकों की तैनाती भी अलग तरह की है। परंतु, फिर भी भारत समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के सैनिकों द्वारा किया गया उग्रतापूर्ण व्यवहार पिछले सभी समझौतों का उल्लंघन है। रक्षा मंत्री ने कहा कि हालांकि चीन ने अपने सैनिकों की बड़ी संख्या और हथियार को वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तैनात किया है, परंतु, भारतीय सेना सीमा पर उत्पन्न हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

कांग्रेस के सदस्यों ने भारत-चीन सीमा मसले पर चर्चा की मांग को लेकर सदन से वाकआउट किया।

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