विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने अग्रिम प्राधिकरण स्कीम के तहत निर्यात दायित्व विस्तार के लिए संरचना शुल्क को सरल बनाया

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने सार्वजनिक सूचना संख्या 52/2015-20 के माध्यम से प्रक्रियाओं की पुस्तिका ( 2015-20 ) के पैरा 4.42 में संशोधन करने के द्वारा अग्रिम प्राधिकरण स्कीम के तहत निर्यात दायित्व विस्तार के लिए संरचना शुल्क की गणना के लिए संशोधित नियमों को अधिसूचित किया है।

संरचना शुल्क की गणनाओं का सरलीकरण प्रक्रिया को अधिक दक्ष बनाने तथा समझने में सरल बनाने के द्वारा ऑटोमेशन तथा त्वरित प्रदायगी में सहायता करता है। संरचना शुल्क के लिए पिछला फॉर्मूला पेचीदा तथा समझने में कठिन था जिसने प्रक्रिया को और दुष्कर तथा तनावपूर्ण बना दिया। बहरहाल, संशोधित संरचना शुल्क फॉर्मूला, जो ‘प्राधिकरण के सीआईएफ मूल्य‘ के विभिन्न स्तरों के लिए विशिष्ट दर पर आधारित है, अधिक स्पष्ट और गणना करने में सरल है।

यह न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ निर्यात बाध्यता विस्तार प्रक्रिया को ऑटोमेट करने में मदद करेगा, इसके अतिरिक्त त्रुटियों तथा गलत धारणाओं के जोखिम में और कमी आ जाएगी। प्रक्रिया का ऑटोमेशन मैनुअल गणना और कागजी कार्रवाई की आवश्यकता को कम कर देगा जिससे अंततोगत्वा सेवा प्रदायगी में तेजी आएगी। यह निर्यातकों के लिए लाभदायक होगा क्योंकि इससे निर्यात बाध्यता विस्तार प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवश्यक समय और प्रयास में कमी आएगी।

इसके अतिरिक्त, ऑटोमेशन त्रुटियों तथा गलत धारणाओं के जोखिम को और घटा देगा जिससे प्रक्रिया की दक्षता में और सुधार आएगा। ऑटोमेशन की प्रक्रिया डीजीएफटी की आईटी-पुनरुद्धार परियोजना के तहत शुरु की जा रही है और इसे अलग से अधिसूचित किया जाएगा।

गणनाओं का सरलीकरण जटिलता को घटाने तथा प्रक्रिया को निर्यातकों के लिए अधिक स्पष्ट बनाने के द्वारा ‘‘व्यवसाय करने की सरलता‘‘ के उद्वेश्य में भी सहायता करता है। संरचना शुल्क के लिए गणनाओं को सरल बनाने के द्वारा, डीजीएफटी प्रक्रिया को निर्यातकों के लिए और दक्ष तथा समझने में सरल बनाने के द्वारा इस उद्वेश्य की प्राप्ति की दिशा में काम कर रहा है।