वित्तमंत्री निर्मला सीतारामन ने अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष की बैठक में आर्थिक मंदी से निपटने के लिए समन्वित वैश्विक कार्रवाई की अपील की

वित्‍तमंत्री निर्मला सीतारामन ने विभिन्‍न क्षेत्रों में मंदी से उत्‍पन्‍न व्‍यावधान को दूर करने के लिए मिलकर कार्रवाई करने और वैश्विक विकास के लिए बहुपक्षीय भावना अपनाने का आह्वान किया है। वाशिंगटन में अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष और विश्‍व बैंक की मंत्रिस्‍तरीय समिति की वार्षिक बैठक में उन्‍होंने कहा कि मंदी के संकट बनने से पहले ही व्‍यापारिक तालमेल बढाने, अनिश्चिय दूर करने और संचयी ऋण के ऊंचे स्‍तर के बारे में विश्‍वस्‍तर पर समन्वित कार्रवाई करने की आवश्‍यकता है। श्रीमती सीतारामन ने यह भी कहा कि व्‍यापारिक विवाद और संरक्षणवाद ने ऐसी स्थितियों को पैदा किया है जिससे पूंजी, माल और सेवाओं पर असर पड़ सकता है। वित्‍तमंत्री ने आज जी-20 देशों के वित्‍त मंत्रियों और केन्‍द्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठकों में भी भारतीय शिष्‍टमंडल का नेतृत्‍व किया। डिजिटीकरण से उत्‍पन्‍न चुनौतियों से निपटने के लिए सत्र के दौरान आम राय कायम करने के बारे में वित्‍त मंत्री ने कहा कि इस संबंध में एकीकृत दृष्टिकोण से आशा बंधी है और इस पर गंभीरता से ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष ने देश में कार्पोरेट टैक्‍स में हाल में की गई कटौती का समर्थन किया है। उसका कहना है कि इसका निवेश पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ेगा। अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्राकोष में एशिया और प्रशांत प्रभाग के निदेशक चेंगयांग रि ने कहा है कि भारत में पिछली दो तिमाही में अर्थव्‍यवस्‍था की रफ्तार धीमी हुई है। मौजूदा वित्‍त वर्ष में इसके छह दशमलव एक प्रतिशत पर सीमित रहने की संभावना है। लेकिन उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त की कि अगले वर्ष सकल घरेलू उत्‍पाद की वृद्धि दर सात प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।

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