वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर – डीपीआई ने वित्तीय समावेशन में क्रांति ला दी है

केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में ‘सशक्त, सतत, संतुलित और समावेशी विकास’ विषय पर आयोजित जी20 वेबिनार में उद्घाटन भाषण दिया। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय तथा श्रम और रोजगार मंत्रालय के सहयोग से वित्त मंत्रालय ने सेमिनार का आयोजन किया था।

9-10 सितंबर, 2023 को दिल्ली में आयोजित जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान जी20 नेताओं ने जी20 नई दिल्ली नेताओं की घोषणा (एनडीएलडी) को अंगीकार किया था। एनडीएलडी के प्रमुख विषयों में से एक है – सशक्त, सतत, संतुलित और समावेशी विकास (एसएसबीआईजी) हासिल करने की दिशा में कार्रवाई।

अपने उद्घाटन भाषण में निर्मला सीतारमण ने कहा, “सर्वसम्मति से तैयार जी20 नई दिल्ली नेताओं की घोषणा (एनडीएलडी) वैश्विक अर्थव्यवस्था द्वारा सामना की जा रही कुछ गंभीर चुनौतियों का समाधान करती है और जन-केंद्रित सिद्धांतों तथा विश्वास से जुड़ी साझेदारी पर आधारित भविष्य के लिए नीति मार्गदर्शन भी प्रदान करती है।”

कौशल-अंतर के बारे में, केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि एनडीएलडी मानता है कि अच्छी तरह से एकीकृत और पर्याप्त रूप से कुशल श्रमिक मूल और गंतव्य, दोनों ही देशों को समान रूप से लाभान्वित करते हैं। एनडीएलडी विश्व स्तर पर कौशल-अंतर का समाधान करने के महत्व पर भी जोर देता है और इस संदर्भ में व्यापक नीति मार्गदर्शन प्रदान करता है।

निर्मला सीतारमण ने विश्व स्तर पर कौशल-अंतर का समाधान करने, कौशल व योग्यता की देशों के बीच तुलना और पारस्परिक मान्यता तथा कौशल के स्तर को बेहतर करने एवं फिर से कौशल प्रदान करने के लिए व्यापक टूल किट की सुविधा के लिए जी20 की नीति प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों का एनडीएलडी ने समाधान किया है।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, “भारत के इंडिया स्टैक के सफल कार्यान्वयन से प्रेरणा लेते हुए, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के माध्यम से वित्तीय समावेश को आगे बढ़ाने के लिए जी20 नीति सिफारिशों को नई दिल्ली के नेताओं की घोषणा में समर्थन दिया गया था। ये सिफारिशें अच्छी तरह से संरचित डीपीआई विकसित करने, जोखिम-प्रबंधित नियामक व्यवस्था की स्थापना करने, मजबूत शासन को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने पर मार्गदर्शन प्रदान करती हैं कि डीपीआई सभी को सेवा प्रदान करे। डीपीआई को 2024-26 के लिए जी20 नई वित्तीय समावेशन कार्य योजना में भी शामिल किया गया है।

निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि भारत अब वित्तीय समावेश के लिए वैश्विक साझेदारी का सह-अध्यक्ष है, जिसे कार्य योजना के कार्यान्वयन का काम सौंपा गया है। अध्यक्षता वर्ष के दौरान किए गए प्राथमिक कार्यों को आगे बढ़ाने में हमारी महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

सेमिनार में तीन मुद्दों – ‘विकास के लिए व्यापार क्षेत्र को खोलना’, ‘कार्य के भविष्य के लिए तैयारी करना’ और ‘सशक्त और सतत विकास के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से वित्तीय समावेश और उत्पादकता लाभ: आगे का रास्ता’ – पर ध्यान केंद्रित करने के साथ नई दिल्ली नेताओं की घोषणा 2023 के परिणामों पर विचार-विमर्श किया गया। ये विषय वैश्विक आर्थिक पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) और समावेशी विकास प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्माण-खंड हैं।

‘विकास के लिए व्यापार क्षेत्र को खोलना’ विषय पर पैनल चर्चा ‘सूचना तक एमएसएमई की पहुंच बढ़ाने के लिए जयपुर कॉल फॉर एक्शन’ पर केंद्रित थी, जो भारतीय व्यापार और निवेश कार्य समूह (टीआईडब्ल्यूजी) की अध्यक्षता के परिणामों में से एक है। जी20 मंत्रियों द्वारा समर्थित और नई दिल्ली नेताओं की घोषणा में नेताओं द्वारा स्वागत किए गए इस परिणाम का उद्देश्य एमएसएमई द्वारा सामना की जा रही सूचना तक पहुंच से जुड़ी समस्या को हल करना और उन्हें वैश्विक व्यापार में बेहतर तरीके से एकीकृत करने में मदद करना है। पैनल ने जयपुर कॉल फॉर एक्शन के सफल कार्यान्वयन से निर्यात में भारतीय एमएसएमई की भागीदारी के स्तर को बढ़ाने और आगे चलकर इसके रास्ते में आने वाली संभावित चुनौतियों आदि पर पड़ने वाले गहरे प्रभाव पर विचार-विमर्श किया।

वाणिज्य विभाग के सचिव सुनील बर्थवाल ने इस चर्चा का संचालन किया। पैनल में मोंढेर मिमौनी, निदेशक, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र, जिनेवा; प्रशांत कुमार सिंह, निदेशक और सीईओ, गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस; टी. कोशी, एमडी एवं सीईओ, ओएनडीसी और डॉ. दीपक मिश्रा, निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी, आईसीआरआईईआर, नई दिल्ली शामिल थे।

चर्चा का विशेष ध्यान इस बात पर था कि कैसे ‘जयपुर कॉल फॉर एक्शन’ के परिणाम अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं और किस प्रकार एमएसएमई के लिए व्यापार के भविष्य की दिशा को बदलने जा रहे हैं। इस परिणाम की कार्यान्वयन एजेंसी, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र ने न केवल भारतीय संदर्भ में, बल्कि शेष विश्व के लिए भी इसका कार्यान्वयन कितना मूल्यवान है, पर अपने विचार साझा किए। चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि कार्यान्वयन से निर्यात प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने, व्यापार लागत को कम करने और भारतीय एमएसएमई को सशक्त बनाने के लिए भारत सरकार की चल रही पहल को पूरक बनाने में मदद मिलेगी।

‘कार्य के भविष्य’ की तैयारी के लिए वैश्विक कौशल अंतर का समाधान, विषय पर श्रम और रोजगार मंत्रालय (एमओएलई) ने 2023 जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन और नई दिल्ली नेताओं की घोषणा के अनुवर्ती के रूप में एक पैनल चर्चा का आयोजन किया। जी20 रोजगार कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) और जी20 श्रम और रोजगार मंत्रियों ने नीतिगत प्राथमिकताओं को अपनाया, जिसमें वैश्विक कौशल अंतर का समाधान करने की प्रतिबद्धताएं शामिल थीं, जैसा 2023 नई दिल्ली नेताओं की घोषणा में अनुमोदित किया गया था।

प्रतिष्ठित पैनल का संचालन कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के सचिव अतुल कुमार तिवारी ने किया। विशेषज्ञ पैनल में आईएलओ जिनेवा में कौशल और रोजगार शाखा के प्रमुख श्रीनिवास बी रेड्डी; भारतीय उद्योग परिसंघ से एस. सिंह; आर्थिक सहयोग और विकास संगठन में कौशल और रोजगार प्रभाग के प्रमुख मार्क कीज़; और भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष हिरण्मय पंड्या शामिल थे।

बातचीत, दुनिया भर में कौशल की कमी विषय पर केन्द्रित रही, जिसमें रणनीतिक योजना और सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया गया, ताकि इन अंतरों को कुशलतापूर्वक समाप्त किया जा सके। सुझाए गए दृष्टिकोण में शामिल गतिविधियाँ हैं – वैश्विक कौशल अंतर मूल्यांकन, राष्ट्रीय सांख्यिकीय डेटा को मजबूत करना, नौकरी डेटाबेस के लिए आईएलओ और ओईसीडी कौशल के कवरेज को जी20 देशों तक विस्तारित करना और एक वैश्विक संदर्भ प्रणाली स्थापित करने का प्रयास करना, जो कार्यबल को लगातार बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ संरेखित करते हुए कौशल और योग्यता आवश्यकताओं के आधार पर व्यवसायों को वर्गीकृत करता है। पैनल विशेषज्ञों ने सभी शामिल पक्षों और हितधारकों के बीच सहयोग और गठबंधन के महत्व को रेखांकित किया।

‘सशक्त और सतत विकास के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के माध्यम से वित्तीय समावेश और उत्पादकता लाभ: आगे का रास्ता’ विषय पर पैनल चर्चा के दौरान, जी20 नेताओं के समर्थन की पृष्ठभूमि में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के माध्यम से वित्तीय समावेश और उत्पादकता लाभ को आगे बढ़ाने के लिए जी20 नीति सिफारिशों पर चर्चा की गई।

जी20 नेताओं ने समावेशी विकास और सतत विकास के समर्थन में वित्तीय समावेश को आगे बढ़ाने में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता दी। नेताओं ने जी20 2023 वित्तीय समावेश कार्य योजना (एफआईएपी) का भी समर्थन किया, जिसे 2024-2026 के दौरान लागू किया जाएगा।

भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने चर्चा का संचालन किया और पैनल विशेषज्ञों में एस. रमन्न, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, सिडबी; राजेश बंसल, आरबीआई इनोवेशन हब के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी, महानिदेशक, विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस) शामिल थे।

चर्चा में विभिन्न विचार सामने आये और वैश्विक स्तर पर वित्तीय समावेश और विकास को आगे बढ़ाने के लिए डीपीआई सहित नवीन दृष्टिकोणों का लाभ उठाते हुए आगे बढ़ने के रास्ते विषय पर विचार-विमर्श को बढ़ावा मिला। प्रतिष्ठित विचारकों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने इस कार्यक्रम में वित्तीय समावेशन के भविष्य को आकार देने की क्षमता वाली बहुमूल्य अंतर्दृष्टि और रणनीतियों को सामने रखा।

डॉ. नागेश्वरन ने वैश्विक वित्तीय समावेश के प्रयासों को तेज़ गति देने और इस प्रकार, समावेशी और निरंतर विकास हासिल करने के लिए डीपीआई दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया। सुरक्षित डिजिटल वित्तीय सेवा वातावरण बनाने, नवाचार करने और विस्तार देने के लिए सरकारों, नियामकों और निजी संस्थाओं के साथ मिलकर काम करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त, चर्चा में वित्तीय समावेशन और उत्पादकता लाभ को आगे बढ़ाने में डीपीआई की भूमिका से संबंधित हाल ही में अपनाई गई जी20 नीति सिफारिशों के ढांचे के भीतर डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) की महत्वपूर्ण क्षमता पर भी विचार-विमर्श किया गया। बातचीत में जी20 देशों और अन्य देशों में सशक्त, सतत और न्यायसंगत विकास हासिल करने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में डीपीआई की क्षमता का लाभ उठाने की संभावनाओं का भी पता लगाया गया।