सरकारी ई-मार्केटप्लेस ने FY 2023-24 के आठ महीने से भी कम समय में 2 लाख करोड़ रुपये की ऐतिहासिक सकल मर्चेंडाइज वैल्यू हासिल की

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) ने चालू वित्तीय वर्ष के आठ महीने से भी कम समय में सकल मर्चेंडाइज वैल्यू (जीएमवी) में 2 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार किया, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, और यह पिछले वित्तीय वर्ष (2022-23) की समाप्ति पर कुल जीएमवी से ज्यादा है। प्रतिदिन औसत जीएमवी में भी महत्वपूर्ण बढ़ोतरी देखी गई है और यह चालू वित्तीय वर्ष में प्रतिदिन 850 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।

चालू वित्तीय वर्ष में इस महत्वपूर्ण जीएमवी उपलब्धि में उल्लेखनीय योगदानकर्ताओं के समूह के भीतर केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) सहित केन्द्रीय संस्थाओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका वास्तव में उत्कृष्ट रही है, जो कुल का 83 प्रतिशत है।

इसके अतिरिक्त, राज्य सरकारों की उत्साही भागीदारी जो कि 17 प्रतिशत है, सार्वजनिक खरीद पर जीईएम के परिवर्तनकारी प्रभाव के राष्ट्रव्यापी समावेश को रेखांकित करती है। उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, बिहार, असम, उत्तराखंड जैसे राज्यों ने चालू वित्तीय वर्ष में बड़ी मात्रा में खरीद के ऑर्डर दिए हैं।

केंद्र और राज्य संस्थाओं के बीच यह अनूठा सहयोग एक सामंजस्यपूर्ण तालमेल का उदाहरण है, जो जीईएम को सफलता की अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक ले जाता है।

सेवा क्षेत्र में जीईएम के विस्तार ने इसे तेजी से अपनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सेवा क्षेत्र में ऑर्डर वैल्यू में वृद्धि पिछले 3 वर्षों में तेजी के साथ जीईएम की सफलता की कहानी में सबसे बेहतरीन अध्याय रहा है। सेवा क्षेत्र ने इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लेनदेन किए गए कुल ऑर्डर मूल्य में समग्र योगदान में भारी वृद्धि का प्रदर्शन किया है, जो वित्तीय वर्ष 21-22 में 23 प्रतिशत से बढ़कर, चालू वित्तीय वर्ष में, लगभग 46 प्रतिशत हो गया है।

यह उत्कृष्ट उपलब्धि न केवल इस प्लेटफॉर्म के तेजी से विकास को दर्शाती है, बल्कि पूरे भारत में सार्वजनिक खरीद के रूप को बदलने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को भी दर्शाती है। जीईएम की अभूतपूर्व वृद्धि का श्रेय सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं में दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दिया जा सकता है, जिससे सरकारी एजेंसियों को सुव्यवस्थित और लागत- प्रभावी तरीके से उत्पादों और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंचने में सक्षम बनाया जा सके।

यह पोर्टल लगभग 312 सेवा श्रेणियों और 11,800 से अधिक उत्पाद श्रेणियों की एक विविध सूची प्रदर्शित करता है, जो इसे सभी स्तरों पर सरकारी खरीदारों की जरूरी आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से पूरा करने के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित करता है। संचयी रूप से, जीईएम ने अपने हितधारकों के जबर्दस्त समर्थन के साथ, अपनी स्थापना के बाद से, 5.93 लाख करोड़ रुपये के जीएमवी को पार कर लिया है। जीईएम पर लेनदेन की कुल संख्या भी 1.8 करोड़ को पार कर गई है।

इसके अतिरिक्त, समावेशिता और पहुंच के प्रति जीईएम की दृढ़ प्रतिबद्धता इसके दूरदर्शी दृष्टिकोण के प्रमाण के रूप में सामने आता है। पंचायत स्तर की खरीद को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से ई-ग्राम स्वराज के साथ इस प्लेटफॉर्म का निर्बाध एकीकरण, न केवल इसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, बल्कि प्रशासन के जमीनी स्तर पर लागत को सुनियोजित कर इष्टतम बनाते हुए अंतिम-छोर के विक्रेताओं के साथ जुड़ने में इसके बेजोड़ कौशल को भी दर्शाता है। यह उल्लेखनीय प्रयास जीईएम के प्रभाव को बढ़ाता है, जो भारत के खरीद परिदृश्य पर इसके दूरगामी प्रभाव को दर्शाता है।

बाजार के अंदर समावेशिता और विविधता पैदा करने के लिए जीईएम के बहुआयामी दृष्टिकोण ने भी इसकी सफलता में वृद्धि की है। यह प्लेटफॉर्म विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्यमों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप और कारीगरों जैसे हाशिए के विक्रेताओं के अनूठे संदर्भों और उनकी सीमाओं को पूरा करता है। इसकी नीतियां सभी फर्मों को उनके आकार और लोकप्रियता के बावजूद सही व्यावसायिक अवसर प्रदान करने के इरादे से तैयार की गई हैं। इसके बाद, इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से लेनदेन किए गए कुल ऑर्डर मूल्य का लगभग 49 प्रतिशत एमएसई को दिया गया है। केवल 7 महीनों में, 45000 से अधिक एमएसई ने, जीईएम पर, पंजीकृत विक्रेताओं / सेवा प्रदाताओं के रूप में पंजीकरण किया है।

जीईएम की सफलता की एक पहचान लागत-बचत के प्रति इसके समर्पण में निहित है, जिसने 2016 से, सरकार को, 45,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत करने में सक्षम बनाया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2021-22 के अनुसार, 22 में से 10 वस्तुओं के लिए, जीईएम की कीमतें अन्य ऑनलाइन प्लेटफार्मों की तुलना में 9.5 प्रतिशत कम थीं। जीईएम की परिवर्तनकारी यात्रा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और नवाचार द्वारा संचालित पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता का प्रमाण है।

जीईएम विकसित हो रहा है और यह भारत सरकार के डिजिटल बदलाव व “मेक इन इंडिया” पहल का आधार बना हुआ है, जो घरेलू रूप से निर्मित उत्पादों और सेवाओं के उपयोग को बढ़ावा देता है।