गृह मंत्री अमित शाह 30 जनवरी को सभी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार कार्यालयों की कंप्यूटरीकरण परियोजना का शुभारंभ करेंगे

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 30 जनवरी, 2024 (मंगलवार) को नई दिल्ली में कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (Agriculture and Rural Development Banks) और सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (Registrar of Cooperative Societies) कार्यालयों की कंप्यूटरीकरण परियोजना का शुभारंभ करेंगे। यह कार्यक्रम सहकारिता मंत्रालय द्वारा, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के सहयोग से, आयोजित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में सहकारिता मंत्रालय “सहकार-से-समृद्धि” के विज़न को साकार करने और करोड़ों किसानों को समृद्ध बनाने के प्रति कटिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी के सहकार से समृद्धि के विज़न को साकार करने की दिशा में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ARDB और RCS कार्यालयों का कम्प्यूटरीकरण सहकारिता मंत्रालय द्वारा उठाए गए कई महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। सहकारिता मंत्रालय के तत्वाधान में यह परियोजना पूरे सहकारी इकोसिस्टम को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर सहकारिता क्षेत्र के आधुनिकीकरण और दक्षता को बढ़ाने की मोदी सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (ARDB) की कम्प्यूटरीकरण परियोजना के तहत 13 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में स्थित ARDB की 1851 इकाइयों को कम्प्यूटरीकृत करने और उन्हें एक कॉमन नेशनल सॉफ्टवेयर के माध्यम से NABARD से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। सहकारिता मंत्रालय की यह पहल Common Accounting System (CAS) और Management Information System (MIS) के माध्यम से व्यावसायिक प्रक्रियाओं को standardised कर ARDB के में परिचालन दक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ाने का काम करेगी। इसके अलावा, इस पहल का उद्देश्य transaction cost को कम करना, किसानों को ऋण वितरण में सुविधा प्रदान करना और योजनाओं की बेहतर monitoring और assessment के लिए real time data access को enable करना है। इस दक्षता से उन छोटे और सीमांत किसानों को लाभ होगा जो जमीनी स्तर पर Primary Agriculture Credit Societies (PACS) के माध्यम से ऋण और संबंधित सेवाओं के लिए ARDB से जुड़े हुए हैं।

केन्द्रीय सहकारिता मंत्रालय की दूसरी प्रमुख पहल के तहत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (RCS) के कार्यालयों का कम्प्यूटरीकरण, RCS कार्यालयों को पेपरलैस कामकाज के लिए प्रेरित करना, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के सहकारी अधिनियम और नियमों के अनुरूप आईटी-उन्मुख workflow को लागू करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही RCS कार्यालयों में बेहतर दक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता, analytics और MIS स्थापित करना और राष्ट्रीय डेटाबेस के साथ जुड़ाव सुनिश्चित करना भी इसके लक्ष्यों में शामिल है।

सहकारिता मंत्रालय की प्रमुख पहलों के अंतर्गत देशभर में प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के कम्प्यूटरीकरण के साथ उन्हें एक कॉमन नेशनल सॉफ्टवेयर के माध्यम से NABARD से जोड़ा जा रहा है। PACS को Common Service Centre (CSC) के रूप में onboard कर डिजिटल सेवाएं शुरू करने में भी सक्षम बनाया जा रहा है, अब तक 50,000 से अधिक PACS, CSC के रूप में onboard हो चुके हैं और 30,000 से अधिक ने सेवाएं देना भी शुरू कर दिया है। इसके अतिरिक्त, सहकारिता मंत्रालय ने एक नया राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस स्थापित किया है जिसमें 8 लाख से अधिक सहकारी समितियों का डेटा उपलब्ध है और इस डेटाबेस को जल्द ही लॉन्च कर इसे सभी हितधारकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

मंगलवार के कार्यक्रम में 1200 से अधिक प्रतिभागी भाग लेंगे, जिनमें सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के उच्चाधिकारी, सहकारिता विभागों के सचिव और सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार, सभी राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंकों (SCARDBs) के अध्यक्ष, प्राथमिक सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंकों (PCARDBs) और एआरडीबी की इकाइयों के प्रतिनिधि शामिल हैं।