भारत और श्रीलंका ने मौजूदा विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग तीन वर्षों के लिए बढ़ाया

भारत और श्रीलंका ने अपशिष्ट जल प्रौद्योगिकियों, टिकाऊ कृषि, एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देने के साथ मौजूदा विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग को तीन और वर्षों के लिए बढ़ा दिया है। यह निर्णय आज भारत और श्रीलंका के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहयोग पर संयुक्त समिति की पांचवीं बैठक के दौरान लिया गया।

इस अवसर पर विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के सलाहकार और प्रमुख एस के वार्ष्णेय ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच दो हजार 500 साल से अधिक पुराने बौद्धिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संपर्क और संबंधों की एक महान विरासत है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच शिक्षा, व्यापार और निवेश के क्षेत्र में सहयोग में वृद्धि हुई है।

श्रीलंका के कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार मंत्रालय की सचिव दीपा लियांगे ने श्रीलंका के साथ विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अनुसंधान क्षेत्रों में भारत के सहयोग का स्वागत किया।

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