भारत और चीन के बीच अनौपचारिक शिखर वार्ता से सहयोग के नये युग की शुरूआत होगी: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी

Prime Minister Narendra Modi said - Improving strategic communication between India and China has brought greater stability and momentum in bilateral relations

भारत और चीन ने फिर कहा है कि दोनों देश मौजूदा अंतर्राष्‍ट्रीय परिदृश्‍य में स्थिरता सुनिश्‍चित करने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों ने कहा कि वे अपने मतभेदों को दूरदर्शितापूर्ण तरीके से सुलझाएगें और किसी भी मतभेद को विवाद नहीं बनने देंगे।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनफिंग के बीच आज चेन्‍नई के पास मामल्‍लपुरम में सम्‍पन्‍न अनौपचारिक शिखर बैठक में दोनों नेताओं ने अनेक विषयों पर मित्रतापूर्ण माहौल में गहन विचार-विमर्श किया। इनमें वैश्‍विक और क्षेत्रीय महत्‍व के ऐसे अत्‍यंत जरूरी, दीर्घकालि‍क और नीतिगत मुद्दे भी शामिल थे जो नियम-कानून पर आधारित अंतर्राष्‍ट्रीय व्‍यवस्‍था के लिए बड़े जरूरी हैं। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संपर्क को और मजबूत करने के बारे में भी चर्चा की ताकि दुनिया के बदलते माहौल में विश्‍व मंच पर भारत और चीन अधिक अहम भूमिका निभा सकें।

आज सुबह दोनों नेताओं ने करीब डेढ़ घंटे तक बिना किसी सहायक से सीधी बातचीत की। इसके बाद शिष्‍टमंडल स्‍तर की वार्ता हुई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वुहान भावना ने दोनों राष्‍ट्रों के बीच संबंधों को नई रफ्तार दी है और उनमें एक दूसरे के प्रति नया विश्‍वास पैदा हुआ है। उन्‍होंने कहा कि आज की शिखर बैठक में जो चेन्‍नई विज़़न दिखाई दिया है इससे सहयोग का नया युग शुरू हुआ है। वुहान शिखर सम्‍मेलन के नतीजों का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि दोनों देशों के बीच नीतिगत संवाद बढ़ा है जिससे स्थिरता में बढ़ोतरी हुई है और द्विपक्षीय संबंधों में सुदृढ़ता आई है। उन्‍होंने कहा कि चेन्‍नई संवाद से द्विपक्षीय सहयोग के नए दौर की शुरूआत हुई है।

अब तक हमारे बीच द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर महत्वपूर्ण विचार-विनिमय हुआ है। वुहान स्प्रिट ने हमारे संबंधों को एक नया मोमेन्टम और ट्रस्ट दिया है। आज के हमारे चेन्नई कनेक्ट से दोनों देशों के बीच सहयोग का एक नया दौर शुरू होगा।

विदेश सचिव विजय गोखले ने बताया कि दोनों नेताओं ने शिखर सम्‍मेलन के दौरान कुल छह घंटे तक एक दूसरे से सीधी बातचीत की। उन्‍होंने कहा कि चीन ने व्‍यापार को लेकर भारत की चिंताओं पर ध्‍यान देने में दिलचस्‍पी दिखाई और भारत से निर्यात किये जाने वाली वस्‍तुओं की मात्रा और लागत में वृद्धि करने बारे में सहमति व्‍यक्‍त की। दोनों नेता व्‍यापार में सेवाओं को उचित स्‍थान देते हुए परस्‍पर लाभप्रद और व्‍यापक क्षेत्रीय आर्थिक साझेदारी के महत्‍व को लेकर भी सहमति जताई। राष्‍ट्रपति शी ने भारतीय सूचना टेक्‍नोलॉजी और फार्मा कंपनी की मौजूदगी का स्‍वागत किया।

जिस तरह से चीन के राष्‍ट्रपति षी ने कहा कि वो हमारी समस्‍यायें समझते हैं और बातचीत करने के लिए तैयार हैं। मुझे पूरा विश्‍वास है कि यह मैकेनिजम जल्‍द ही तय होगा।

श्री गोखले ने स्‍पष्‍ट रूप से बताया है कि कश्‍मीर का मुद्दा किसी भी बैठक में नहीं उठा क्‍योंकि यह भारत का आंतरिक मामला है। उन्‍होंने कहा कि दोनों नेता इस बात को लेकर चिंतित थे कि आतंकवाद दोनों ही देशों के लिए खतरा बना हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्‍ट्रपति शी ने वर्ष 2020 को भारत चीन संस्‍कृति और जनता के आपसी संपर्क के वर्ष के रूप में मनाने का भी फैसला किया है। दोनों देश इस सिलसिले में 70 कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

हमारे संवाददाता ने बताया कि दोनों नेताओं ने आपसी व्‍यापारिक संबंधों में बेहतर संतुलन बनाने के लिए उच्‍च स्‍तरीय आर्थिक और व्‍यापारिक वार्ता प्रणाली स्‍थापित करने का भी फैसला किया। वे विनिर्माण के क्षेत्र में साझेदारी के जरिये पारस्‍परिक निवेश बढ़ाने पर भी सहमत हुए।

भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्‍व ने अनौपचारिक बातचीत के माध्‍यम का उपयोग रिश्‍तों को मजबूत करने के लिए बहुत ही प्रभावी तरीके से किया है। दो अनौपचारिक वार्ताओं से यह प्रमाणित हो चुका है कि दोनों देश अपने मतभेदों से ऊपर उठकर विश्‍वपटल पर अपनी धाक जमाने को दृढ़ सकल्‍प है। वुहान स्प्रिट और चेन्‍नई कनेक्‍ट की भावना से अभीभूत राष्‍ट्रपति षी ने होकर तीसरी अनौपचारिक वार्ता के लिए प्रधानमंत्री मोदी को चीन आने का न्‍यौता दिया है। इसे प्रधानमंत्री ने सहर्ष स्‍वीकार किया।

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