संसद में विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2020 पारित

संसद ने विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2020 पारित कर दिया है। राज्‍यसभा ने इसे आज स्‍वीकृति दी जबकि लोकसभा पहले ही पारित कर चुकी है। इसके तहत 2010 के विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम को संशोधित किया गया है। इस अधिनियम के तहत व्‍यक्तियों, संघों और कं‍पनियों से विदेशी अंशदान की स्‍वीकृति और उपयोग को विनियमित किया जाता है। विदेशी स्रोत से किसी मुद्रा, प्रतिभूति या वस्‍तु का दान अथवा अंतरण विदेशी अंशदान माना जाता है।

संशोधन के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी किसी तरह का विदेशी अंशदान स्‍वीकार नहीं कर सकेगा। विदेशी अंशदान की अनुमति, पंजीकरण या पंजीकरण का नवीकरण कराने से पहले संस्‍था के सभी पदाधिकारियों, निदेशकों या मुख्‍य कार्यकारी अधिकारियों को पहचान के प्रमाण के रूप में आधार नंबर उपलब्‍ध कराना होगा। विदेशी अंशदान केवल केन्‍द्र सरकार से अधिसूचित एफसीआरए खाते के रूप में बैंकों द्वारा निर्धारित खाते में ही प्राप्‍त किया जा सकेगा।

विधेयक पर चर्चा के उत्‍तर में गृह राज्‍यमंत्री नित्‍यानंद राय ने कहा कि इसका मुख्‍य उद्देश्‍य यह है कि विदेशी धन से देश के सामाजिक और राजनीतिक तानेबाने पर बुरा असर न पड़े। उन्‍होंने कहा कि इससे विदेशी अंशदान व्‍यवस्‍था में पार‍दर्शिता बढ़ेगी।

निश्चित रूप से पारदर्शिता लाने वाला यह बिल न एन जी ओ के खिलाफ है, न किसी के अहित में है। यह जरूर है कि ऐसी संस्‍था को जरूर थोड़ा बुरा लगेगा, जो पारदर्शिता को नहीं चाहते हैं। लेकिन वैसे एन जी ओ जो पारदर्शिता के साथ इस उद्देश्‍य से विदेशी अविधाएं प्राप्‍त करते हैं। ऐसे सेवा भाव से ज‍नहित में काम करने वाले ऐसी सारी संस्‍थाओं को यह सहयोग करने के लिए यह संशोधन है।

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