सामान्‍य श्रेणी के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को नौकरी और शिक्षण संस्‍थानों में दस प्रतिशत आरक्षण के लिए संविधान संशोधन बिल-2019 पर राज्‍यसभा में पारित

Passed into the Rajya Sabha on the Constitution Amendment Bill-2013 for reservation of ten percent reservation in jobs and educational institutions of economically weaker sections of general category

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गयी। राज्यसभा ने करीब 10 घंटे तक चली बैठक के बाद संविधान 124 वां संशोधन 2019 विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से मंजूरी दे दी। इससे पहले सदन ने विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधनों को मत विभाजन के बाद नामंजूर कर दिया।

लोकसभा ने इस विधेयक को मंगलवार को ही मंजूरी दी थी जहां मतदान में तीन सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया था। उच्च सदन में विपक्ष सहित लगभग सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया। कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले लाये जाने को लेकर सरकार की मंशा तथा इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका जतायी। हालांकि सरकार ने दावा किया कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा की अग्निपरीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिये लाया गया है।

आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी संविधान संशोधन विधेयक को बुधवार को चर्चा एवं पारित कराने के लिए राज्यसभा में पेश किया किया गया । सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच 124वां संविधान संशोधन विधेयक 2019 सदन में रखा। गहलोत ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि इस विधेयक से समाज के बड़े वर्ग को लाभ मिलेगा।

10 फीसदी का ये आरक्षण मौजूदा 49.5 प्रतिशत आरक्षण से अलग होगा। आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा जिन्हें अभी मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत फायदा नहीं मिल रहा है। फैसले को लागू करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में नए उपबंध जो़ड़े जा रहे हैं ।

संविधान संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में बुधवार को हुई चर्चा में विभिन्न दलों के सदस्यों ने इसका समर्थन किया। हालांकि कुछ दलों ने विधेयक के समय पर सवाल उठाए ।

लोकसभा इस विधेयक को मंगलवार को पारित कर चुकी है। इस विधेयक को उच्च सदन में पारित करने के लिए इसकी बैठक को एक दिन के लिए बढ़ाया गया है। राज्यसभा के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और मंजूरी मिलने के बाद ये कानून लागू हो जाएगा ।

केंद्र सरकार सबका साथ सबका विकास की बात करती रही है और उसका ये फैसला समाज के हर वर्ग के विकास की उसकी प्रतिबद्धता को दिखाता है ।

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