प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में तत्काल सुधार पर बल दिया

भारत और फ्रांस ने उभरती वैश्विक चुनौतियों से निपटने और विश्‍व के सतत विकास के लिए न्यायसंगत और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाए रखने का संकल्प दोहराया है। साथ ही, दोनों देशों ने प्रभावी बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार का आह्वान भी किया है।

भारत-फ्रांस ने संयुक्त वक्‍तव्‍य में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने बैठक के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

फ्रांस ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए अपना दृढ़ समर्थन भी दोहराया। दोनों नेता सामूहिक उत्‍पीड़न के मामले में वीटो के इस्तेमाल से जुड़े नियमों पर बातचीत करने पर सहमत हुए।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने पिछले वर्ष 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की और इजराइल के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने और गजा-क्षेत्र में प्रभावित लोगों तक सहायता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने सभी बंधकों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई का भी आह्वान किया।

उन्होंने लाल सागर सहित समूचे क्षेत्र में संघर्ष के और बढ़ने की संभावना पर गंभीर चिंता व्यक्त की। दोनों नेताओं ने कहा कि इस युद्ध का विश्‍व की अर्थव्‍यवस्‍था पर पहले ही गंभीर असर पड़ा है। उन्होंने लाल सागर में आवाजाही की स्वतंत्रता कायम रखने और समुद्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सम्मान करने को भी कहा है।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत करने का दृष्टिकोण भी दोहराया। उन्‍होंने कहा कि इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा में बढ़ोत्‍तरी होगी। भारत और फ्रांस ने जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता और प्रदूषण से जुड़ी चुनौतियों का मिलकर समाधान करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

राष्ट्रपति मैक्रों ने वर्ष 2028 में जलवायु परिवर्तन से जुड़े अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन COP-33 की मेजबानी के भारत के प्रस्ताव की सराहना की। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी में भारत की सदस्‍यता के लिए फ्रांस का समर्थन भी दोहराया।