प्रधानमंत्री मोदी ने श्रील प्रभुपाद की 150वीं जयंती के पर उनके सम्मान में स्मारक टिकट और सिक्का जारी किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि श्रील प्रभुपाद ने वैष्णववाद और भगवान कृष्ण के प्रति प्रेम को पूरी दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आज श्रील प्रभुपाद की 150वीं जयंती के पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें भी वैष्णव संत चैतन्य महाप्रभु की शिक्षाओं का पालन करके आनंद का अनुभव हुआ है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस नए भारत में विकास और भक्ति को साथ-साथ देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि नए भारत में लोगों ने आधुनिकता और पहचान दोनों को अपनाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जीवन भक्ति और ज्ञान के मार्ग का एक सुंदर संतुलन है।

प्रधानमंत्री ने भक्ति के आनंद का अनुभव करने की स्थितियां बनाने के लिए चैतन्य महाप्रभु के योगदान को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि चैतन्य महाप्रभु ने अध्यात्म और ध्यान को जन-जन के लिए सुलभ बनाया। उन्होंने कहा कि चैतन्य महाप्रभु ने आनंद के माध्यम से ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग दिखाया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि भक्ति भारतीय संतों द्वारा दिया गया एक भव्य दर्शन है। उन्होंने कहा कि यह निराशा नहीं बल्कि आशा और आत्मविश्वास है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भक्ति भय नहीं उत्साह है और भक्ति निराशा नहीं आशा और विश्वास है। उन्होंने कहा कि भक्ति हार नहीं बल्कि प्रभाव का संकल्प है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भक्ति में स्वयं पर विजय पाना और मानवता के लिए काम करना सम्मिलित है। उन्होंने कहा कि इसी भावना के कारण भारत ने अपनी सीमाओं के विस्तार के लिए कभी दूसरों पर आक्रमण नहीं किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश आजादी के अमृत काल में गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का संकल्प लेकर संतों के संकल्प को आगे बढ़ा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने में आध्यात्मिक नेताओं के महत्वपूर्ण योगदान की प्रशंसा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान, स्वामी विवेकानन्द और श्रील प्रभुपाद जैसी आध्यात्मिक विभूतियों ने जनता में असीम ऊर्जा का संचार किया और उन्हें धार्मिकता के मार्ग पर अग्रसर किया। उन्होंने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस और महामना मदन मोहन मालवीय जैसी हस्तियों ने श्रील प्रभुपाद से मार्गदर्शन प्राप्‍त किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विविधता में एकता भारतीय मानस में इतनी गहराई से बसी हुई है कि विभाजन की धारणा की इसमें कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि दुनिया के लिए एक राष्ट्र एक राजनीतिक विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर सकता है, लेकिन भारत के लिए एक भारत, श्रेष्ठ भारत एक आध्यात्मिक विश्वास है।

प्रधानमंत्री ने भारत की युवा पीढ़ी की जागरूकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किसी देश के लिए यह स्वाभाविक है कि वह चंद्रयान भी बनाए और चन्द्रशेखर महादेव धाम को भी रोशन करे। उन्होंने कहा कि जब युवा देश का नेतृत्व करते हैं तो वह चंद्रमा पर रोवर उतार सकते हैं और लैंडिंग स्थल का नाम शिवशक्ति रखकर परंपराओं का पोषण कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास और विरासत के बीच सामंजस्य 25 वर्ष के अमृत काल तक जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि संतों के आशीर्वाद से विकसित भारत का निर्माण होगा और अध्यात्म संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रील प्रभुपाद भक्ति सिद्धांत सरस्वती की 150वीं वर्षगांठ ऐसे समय में मनाई जा रही है जब कुछ दिन पहले ही अयोध्या धाम में श्री राम मंदिर की प्राण प्रतिष्‍ठा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर श्रील प्रभुपाद के सम्मान में एक स्मारक टिकट और एक सिक्का जारी किया।