प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित दो दिन के अंतर्राष्‍ट्रीय न्‍यायिक सम्‍मेलन को संबोधित किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन और व्‍यवस्‍था में बदलाव का आधार कानून का शासन ही है। उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा आयोजित दो दिन के अंतर्राष्‍ट्रीय न्‍यायिक सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए उन्‍होंने कहा कि कानून सर्वोच्‍च है और देशवासियों का न्‍यायपालिका में अटूट विश्‍वास है। भारतीय समाज में रूल ऑफ लॉ सामाजिक संस्‍कारों का आधार है। हमारे यहां कहा गया है कि क्षत्रीय क्षत्रम यत धर्मा यानि लॉ इज द किंग्स ऑफ किंग्‍स लॉ इज सुप्रीम। हजारों वर्षों से चले आ रहे ऐसे ही विचार एक बड़ी वजह है कि हर भारतीय की न्‍यायपालिका पर अगाध आस्‍था है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा सरकार ने देश और समाज की आवश्‍यकताओं को ध्‍यान में रखते हुए कई कानून समाप्‍त किए हैं, तो कई नए कानून भी बनाए हैं। देश में ऐसे करीब 1500 पुराने कानूनों को समाप्‍त किया गया है जिनकी आज के दौर में प्रासंगिकता समाप्‍त हो रही है। समाज को मजबूती देने वाले नए कानून भी उतनी ही तेजी से बनाए हैं। ट्रांसजेंडर पर्ससन के अधिकारों से जुड़ा कानून हो, तीन तलाक के खिलाफ कानून हो या फिर दिव्‍यांगजनों के अधिकारों का दायरा बढ़ाने वाला कानून। सरकार ने पूरी संवेदनशीलता से काम किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने पर्यावरण संबंधी विधिशास्‍त्र को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का हवाला देते हुए कहा कि न्यायपालिका ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाये रखा है। उन्‍होंने कहा कि एक समय था जब ऐसा कहा जाता था कि तेजी से विकास और पर्यावरण की सुरक्षा एक साथ नहीं हो सकती, लेकिन भारत ने इस परिप्रेक्ष्‍य को बदल दिया है। देश तेजी से बदल रहा है और इसका वन क्षेत्र भी बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गर्व की बात है कि लोकतंत्र में न्‍यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका तीनों एक दूसरे के काम का सम्‍मान करते हुए संविधान की भावनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी का जीवन सत्‍य और सेवा के लिए समर्पित था, जो न्‍यायपालिका का आधार माना जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में न्‍याय के त्‍वरित निष्‍पादन के लिए प्रौद्योगिकी को अपनाया गया है

प्रधानमंत्री ने कहा कि अयोध्‍या भूमि विवाद पर उच्‍चतम न्‍यायालय के हाल के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि फैसला आने से पहले बातचीत के कई दौर चले, लेकिन लोगों ने उच्‍चतम न्‍यायालय के फैसले को दिल से स्‍वीकार किया है। सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए कानून और न्‍याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध और लोकप्रियता दोनों का स्‍वागत किया जाना चाहिए, लेकिन लोकप्रियता जब संवैधानिक जनादेश को प्रभावित करती है, तो समस्‍या बन जाती है। उन्‍होंने यह भी कहा कि सरकार चलाने की जिम्‍मेदारी निर्वाचित प्रतिनिधियों पर छोड देनी चाहिए। प्रधान न्‍यायाधीश शरद अरविन्‍द बोबडे ने कहा कि संविधान में एक मजबूत और स्‍वतंत्र न्‍यायपालिका का प्रावधान किया गया है और देश इसका सम्‍मान करता है।

संविधान में कार्यपालिका और विधायिका को अलग करके एक मजबूत और स्‍वतंत्र न्‍यायपालिका का प्रावधान किया गया। हमनें इन मूल आदर्शों को यथावत बनाए रखने के लिए न केवल एक संस्‍थान के रूप में बल्कि नागरिक के रूप में प्रयास किया है।

उच्‍चतम न्‍यायालय के न्‍यायाधीश न्‍यायमूर्ति एन नागेश्‍वर राव और न्‍यायमूर्ति एन वी रमन्‍ना तथा अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने भी अपने विचार रखे। सम्‍मेलन में विश्‍व भर के कई कानूनविद् हिस्‍सा ले रहे हैं। सम्‍मेलन का विषय है- ”न्‍यायपालिका और बदलता विश्‍व”।

Related posts

Leave a Reply