राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राजस्थान के बीकानेर में 14वें राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव में शामिल हुईं और उन्होंने महोत्सव को संबोधित किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु राजस्थान के बीकानेर में 14वें राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव में शामिल हुईं और उन्होंने महोत्सव को संबोधित किया। इस अवसर पर बोलते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सव जैसे उत्सव न सिर्फ देश की कला और संस्कृति को बढ़ावा देते हैं, बल्कि राष्ट्रीय एकता की भावना को भी मजूबत करते हैं। इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम लोगों को हमारी बहुमूल्य एवं समृद्ध संस्कृति और विभिन्न क्षेत्रों की विशेषताओं को जानने व समझने का अवसर प्रदान करते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि प्रौद्योगिकी को परंपराओं के साथ और विज्ञान को कला के साथ जोड़ना आवश्यक है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी की मदद से हर क्षेत्र में नए प्रयोग हो रहे हैं। कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी प्रौद्योगिकी को अपनाया जा रहा है। हम नई प्रौद्योगिकी के माध्यम से अपने देश की कला, परंपरा और संस्कृति की पहुंच का दायरा बढ़ा सकते हैं। हम सभी को भारत की बहुमूल्य और समृद्ध संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। साथ ही, हमें अपनी परंपराओं में नए विचारों और सोच को जगह देनी चाहिए, ताकि हम अपने युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को इन परंपराओं से जोड़ सकें। यह बहुत जरूरी है कि हमारे युवा और बच्चे इस देश की अनमोल विरासत के महत्व को समझें।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि परिवर्तन जीवन का नियम है। समय के साथ कला, परंपरा और संस्कृति में भी बदलाव आते हैं। समय के साथ-साथ कला की शैली, जीवनशैली, वेशभूषा, खान-पान में बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन कुछ बुनियादी मूल्य और सिद्धांत पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलते रहने चाहिए, सिर्फ तभी हम भारतीयता को जीवित रख पायेंगे। ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना, शांति और अहिंसा, प्रकृति के प्रति प्रेम, सभी जीवों के प्रति करुणा, दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ना- ऐसे कई मूल्य हैं जो हम सभी को एक सूत्र में बांधते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज के लोगों का जीवन और समय बहुत तेजी से बीत रहा है। इसलिए हमारी कला और संस्कृति की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आसान नहीं है। उन्होंने प्रमुख हस्तियों, विद्यवानों, कला प्रेमियों और कलाकारों से ऐसे तरीके और तकनीक खोजने का आग्रह किया जिससे आज की पीढ़ी, विशेष रूप से युवा और बच्चे कला एवं संस्कृति को समझ सकें व उसे सीख सकें।