संसद में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024’ पारित; अपराध करने पर दस साल की जेल और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माने

राज्यसभा ने आज ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024’ पारित कर दिया, जिसका उद्देश्य यूपीएससी, एसएससी आदि भर्ती परीक्षाओं और नीट, जेईई और सीयूईटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक, कर्तव्‍य की उपेक्षा के साथ-साथ संगठित होकर गलत तरीके अपनाने पर अंकुश लगाना है। लोकसभा इस विधेयक को पहले ही पारित कर चुकी है। अब इसे राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और अनुमति मिलने के बाद यह कानून बन जाएगा।

विधेयक के बारे में जानकारी देते हुए केन्‍द्रीय राज्य मंत्री डीओपीटी प्रभारी डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा, “सार्वजनिक परीक्षा विधेयक, जो संभवतः भारत की संसद के इतिहास में अपनी तरह का पहला विधेयक है, भारत के युवाओं को समर्पित है।”

“अनुचित साधन निवारण विधेयक, 2024” में संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे, बैंकिंग भर्ती परीक्षाएं और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा आयोजित सभी कंप्यूटर-आधारित परीक्षाएं शामिल होंगी।

लोकसभा विस्‍तृत चर्चा के बाद 6 फरवरी 2024 को इस विधेयक को पारित कर चुकी है।

“देश के युवाओं का इनसे संबंध है, जो देश की आबादी का 70 प्रतिशत हैं। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के विकसित भारत के निर्माण में अगले दो दशकों में राष्ट्र निर्माण के लिए उनका योगदान अनिवार्य है।”

यह कहते हुए कि यह विधेयक भारतीय संसद के इतिहास में अपनी तरह का पहला विधेयक है, डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि यह कानून युवाओं को प्रभावित करने वाली एक हालिया घटना को संबोधित करना चाहता है। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने युवाओं को हमेशा उच्च प्राथमिकता पर रखा है।

बहस में भाग लेते हुए, कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने कहा कि विधेयक समवर्ती सूची के एक विषय से संबंधित है और इसे राज्यों तक विस्तारित करने का आह्वान किया। डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने दिग्विजय सिंह पर पलटवार करते हुए उन्हें याद दिलाया कि एक समय शिक्षा राज्य सूची का हिस्सा हुआ करती थी और तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इसे समवर्ती सूची में बदल दिया था।

इस मुद्दे पर, भाजपा के प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी परीक्षाओं में कदाचार रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डीएमके के पी. विल्सन; आप के संदीप कुमार पाठक; बीजेडी के मुजीबुल्ला खान; सीपीआई (एम) के डॉ. वी. शिवदासन; कांग्रेस की डॉ. अमी याजनिक; भाजपा के डॉ. दिनेश शर्मा; सीपीआई के संदोश कुमार पी., और एनसीपी की डॉ फौजिया खान ने भी बहस में भाग लिया।

बहस का जवाब देते हुए, डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा कि विधेयक अधिक पारदर्शिता और समयबद्ध चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करेगा और समान अवसर प्रदान करेगा। सरकार राज्यों को इस विधेयक को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व के पिछले दस वर्षों में, भारत की अर्थव्यवस्था “फ्रैजाइल 5 से टॉप 5” तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा, ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में हम 2014 में 81वें स्थान पर थे, हमने 41 पायदान की छलांग लगाई है, आज हम दुनिया में 40वें नंबर पर हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, वर्ष 2014 में लगभग 350 स्टार्टअप्स से, पीएम मोदी द्वारा अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में लाल किले की प्राचीर से ‘स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड अप इंडिया’ का आह्वान करने और 2016 में विशेष स्टार्टअप योजना शुरू करने के बाद, आज हमारे पास है 1,30,000 से अधिक स्टार्टअप हैं।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा, चार-पांच साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र में हमारे पास सिर्फ एक स्टार्टअप था, आज क्षेत्र खुलने के बाद हमारे पास 190 निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप हैं। उन्होंने कहा, चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से दिसम्‍बर 2023 तक निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप द्वारा 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया के शीर्ष 5 विनिर्माण देशों में शामिल है। उन्होंने कहा, बायोटेक में हमारे पास सिर्फ 50 स्टार्टअप थे, आज हमारे पास 6,000 बायोटेक स्टार्टअप हैं।

डॉ. जितेन्‍द्र सिंह ने कहा, मोदी सरकार ने पिछले दस वर्षों में कई युवा-केंद्रित प्रावधान और योजनाएं शुरू की हैं, जैसे पारदर्शिता सुनिश्चित करना और भर्तियों और उच्च अध्ययन में समान अवसर प्रदान करना।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, पीएम मोदी ने 2014 में एक राजपत्रित अधिकारी द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन के नियम को खत्म करके और स्व-सत्यापन की शुरुआत करके एक बड़ी पहल की और कहा कि हमें अपने युवाओं पर भरोसा है। बाद में, पक्षपात और भाई-भतीजावाद पर अंकुश लगाने के लिए सरकारी भर्ती और उच्च शिक्षा में साक्षात्कार समाप्त कर दिए गए।

डीओपीटी मंत्री ने कहा, यूपीएससी, एसएससी और अन्य भर्ती एजेंसियों द्वारा ऑनलाइन परीक्षा शुरू करके पारदर्शिता और निष्पक्षता भी सुनिश्चित की गई है और पूरी चयन प्रक्रिया को एक-दो साल से घटाकर 6-7 महीने कर दिया गया है। पीएम मोदी की कल्‍पना और दिशा के साथ, रोज़गार मेलों की प्रक्रिया शुरू की गई ताकि रिक्तियों को बड़े पैमाने पर, – 50,000 से 60,000 तक भरा जा सके (और यहां तक कि) 1 लाख नियुक्ति पत्र एक साथ जारी किए जा रहे हैं, – देश भर के 45 स्टेशन जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा, ”नई नियुक्तियों की योग्यता का स्तर ऊपर उठ गया है।”

उन्होंने कहा, “हमारे 40 साल तक के युवाओं का भविष्य दांव पर है, जो हमारी आबादी का 70 प्रतिशत हिस्सा हैं, जो 2047 के विकसित भारत में हितधारक हैं।”