लघु वन उपज के लिए एमएसपी योजना के तहत लघु वन उपजों की रिकॉर्ड खरीद हुई

इस बेहद अशांत और चुनौतीपूर्ण साल में एक बेहतर उपलब्धि लघु वन उपजों (एमएफपी) के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) योजना के तहत एमएफपी की रिकॉर्ड खरीदारी रही है। 16 राज्‍यों में वन उपजों की खरीद अब 148.12 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू रही है। यह (आंकड़ा) इस योजना के लागू होने के बाद से एमएफपी की संख्या, खरीद के कुल मूल्य और राज्‍यों की भागीदारी के लिहाज से सबसे ज्यादा है। इसके साथ इस वर्ष कुल खरीदारी (सरकारी और निजी व्‍यापार दोनों को मिलाकर) 3000 करोड़ रुपये को पार कर गई। यह कोविड-19 महामारी, जिसने आदिवासी जीवन और आजीविका को बुरी तरह प्रभावित किया है, के इस संकटपूर्ण समय में बेहद जरूरी रामबाण साबित हुई है।

अप्रैल 2020 के बाद से पिछले कुछ महीनों के दौरान सरकारी प्रोत्‍साहन और वन धन योजना उत्‍प्ररेक साबित हुई है। राज्‍यों की सक्रिय भागीदारी, न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य के जरिए लघु वन उपजों के खरीद तंत्र और एमएफपी के लिए मूल्‍य श्रृंखला (वैल्यू चेन) के विकास के लिए दिशानिर्देशों ने वन उपज संग्रहकर्ताओं को न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य दिलाने तथा जनजातीय समूहों और कलस्‍टरों के माध्‍यम से मूल्‍य संवर्धन और विपणन की शुरुआत की है, जिसकी पूरे देश में बहुत मजबूत पकड़ है और इन्‍हें व्‍यापक स्‍वीकृति भी मिली है।

राज्‍यों में छत्तीसगढ़ ने 106.53 करोड़ रुपये मूल्‍य के 46,857 मीट्रिक टन लघु वन उपज की खरीदारी के साथ शीर्ष स्‍थान हासिल किया है। इसके बाद ओडिशा 30.41 करोड़ रुपये के 14391.23 मीट्रिक टन लघु वन उपज और गुजरात ने 3.41 करोड़ रुपये के 772.97 मीट्रिक टन लघु वन उपज खरीदा है। छत्तीसगढ़ के 866 खरीद केंद्र हैं। इसके अलावा राज्य ने 139 वन धन केन्‍द्रों द्वारा वन धन स्वयं सहायता समूह के व्‍यापक नेटवर्क को भी प्रभावी तौर पर उपयोग किया है। वन, राजस्व और वीडीवीके अधिकारियों को मिलाकर बनी मोबाइल यूनिट के द्वारा घर-घर जाकर लघु वन उपजों को एकत्रित करने जैसे नवाचार भी अपनाए गए हैं, जिसने इस रिकॉर्ड खरीदारी में योगदान दिया है।

कोविड-19 महामारी से उत्‍पन्‍न अभूतपूर्व परिस्थितियों ने मुश्किलें खड़ी की हैं और इसका नतीजा आदिवासी आबादी के बीच गंभीर संकट के रूप में सामने आया है। युवाओं की बेरोजगारी और आदिवासियों की वापसी से पूरे आदिवासी अर्थव्यवस्था के पटरी से उतरने का खतरा पैदा हो गया है। ऐसी परिस्थिति में एमएफपी के लिए एमएसपी योजना ने सभी राज्यों को एक विकल्प दिया है।

वन धन योजना को 3.6 लाख आदिवासी लाभार्थियों के साथ 22 राज्यों में सफल कार्यान्वयन हुआ है। ट्राईफेड द्वारा राज्यों से लगातार संपर्क और उन्हें जोड़कर रखने के प्रयास ने एमएफपी के लिए एमएसपी योजना को सही रास्ते पर रखने में एक प्रेरक जैसा काम किया है। साथ ही, सरकार के हस्तक्षेप और खरीद ने जरूरी उछाल देने का काम किया। गिरती आदिवासी अर्थव्यवस्था को संभालने के उद्देश्य से एक मई 2020 को एमएफपी के लिए संशोधित एमएसपी जारी की गई, जिससे एमएफपी का एमएसपी मूल्य 90% तक बढ़ गयाऔर इस तरह आदिवासियों की ऊंची आय सुनिश्चित करने में मदद मिली। मंत्रालय ने 26 मई 2020 को एमएफपी के लिए एमएसपी सूची में 23 अतिरिक्त नए मदों को शामिल करने की सिफारि​श की। इन मदों में आदिवासियों द्वारा उगाए गए कृषि और बागवानी उत्पाद शामिल हैं।

आदिवासी आबादी के सशक्तिकरण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करने वाला ट्राईफेड (TRIFED) इस संकट के दौरान राज्यों के सभी प्रयासों में उनकी मदद कर रहा है। एमएसपी पर भारत सरकार और राज्य की एजेंसियों ने 1000 करोड़ रुपये, जबकि निजी कारोबारियों ने 2000 करोड़ रुपये से अधिक की वन उपज की खरीद की है। आदिवासी अर्थव्यवस्था में 3000 करोड़ रुपए से अधिक की राशि डालने के साथ-साथ एमएफपी के लिए एमएसपी योजना आदिवासी पारिस्थितिकी तंत्र में परिवर्तन की गति बढ़ाने और उन्हें सशक्त बनाने का माध्यम बनी है। पूरे देश में प्रणालियों और प्रक्रियाओं के मजबूती से स्थापित होने के साथ, खरीद की मात्रा निश्चित रूप से बढ़ेगी।

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