उच्‍चतम न्‍यायालय ने आलोक वर्मा को, सी बी आई प्रमुख के रुप में बहाल किया

Supreme Court adjourned hearing of Ram Janmabhoomi controversy case till January 10

उच्‍चतम न्‍यायालय ने आलोक वर्मा को, सी बी आई प्रमुख के रुप में बहाल कर दिया है। साथ ही न्‍यायालय ने यह भी कहा है कि दिल्‍ली विशेष पुलिस स्‍थापना अधिनियम के तहत गठित समिति इस मामले पर फिर से विचार करेगी, तब तक श्री वर्मा कोई बड़ा फैसला नहीं ले सकेंगे।

न्‍यायालय ने कहा है कि सी बी आई निदेशक का चयन और नियुक्ति करने वाली उच्‍चाधिकार प्राप्‍त समिति वर्मा के बारे में कोई फैसला लेगी। न्‍यायालय ने जांच एजेन्‍सी के अंतरिम अध्‍यक्ष के रूप में श्रीएम0 नागेश्‍वर राव की नियुक्ति रद्द कर दी है।

प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता में तीन न्‍यायाधीशों की पीठ आलोक वर्मा को छुट्टी पर भेजे जाने के केन्‍द्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई कर रही थी।

आलोक वर्मा और उपनिदेशक राकेश अस्‍थाना एक दूसरे पर भ्रष्‍टाचार के आरोप लगाए जाने के बाद सरकार ने दोनों को अक्‍टूबर में छुटटी पर भेज दिया गया था।

वित्‍तमंत्री अरूण जेटली ने कहा है कि सरकार उच्‍चतम न्‍यायालय के फैसले का पालन करेगी। उन्‍होंने कहा कि सी बी आई के इन दोनों अधिकारियों को केन्‍द्रीय सतर्कता आयोग की सिफारिश पर छुटटी पर भेजा गया था। श्री जेटली ने यह भी कहा कि सरकार को यह लगा था कि ऐसा करना निष्‍पक्ष जांच और सी बी आई की विश्‍वसनीयता के हित में है।

अगर सीबीआई के एक संस्था के नाम पर स्वायत्ता और निष्पक्षता और विश्वसनीयता बढ़ती है तो यह साबित हुई है। लेकिन इसके साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट में एक अकाउंटेबिलिटी का जवाब देने का एक मैकेनिकल भी सेटप किया है। क्योंकि जितने भी यह तथ्य आए हैं इस केस में, एक सप्ताह के भीतर सरकार उस कमेटी की मीटिंग बुलाए, जो उसके सामने जाएंगे। ये एक दोनों को बैलेंस करके सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू लिया है, जब जजमेंट की डिटेल आएगी, सरकार उसका अध्ययन करेगी और उसी हिसाब से सरकार अपनी अगली कार्रवाई करेगी।

उधर, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने उच्‍चतम न्‍यायालय के इस फैसले का स्‍वागत किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो सरकार और सीवीसी का फैसला तथा खासतौर पर सीवीसी का फैसला था कि वर्मा जी उनको अपने पोस्ट में रहने का अधिकार नहीं है और इसलिए उनको टेमप्रेरिली बाहर निकाला गया था। आज सुप्रीम कोर्ट ने ये कहा है कि जो सीवीसी का रेकेमनडेशन था, वह गलत था, असंवैधानिक था, उसको रद्द कर दिया और साथ-साथ में जो केन्द्र सरकार का फैसला था, वो भी रद्द कर दिया।

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