सुप्रीम कोर्ट निर्भया मामले से संबंधित केन्‍द्र की याचिका पर 23 मार्च को सुनवाई करेगा

Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले से उत्पन्न इस कानूनी मुद्दे पर विचार करेगा कि क्या किसी एक मामले में मृत्युदंड पाये कई दोषियों को अलग-अलग फांसी दी जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले से उत्पन्न इस कानूनी मुद्दे पर विचार करेगा कि क्या किसी एक मामले में मृत्युदंड पाये कई दोषियों को अलग-अलग फांसी दी जा सकती है। शीर्ष न्यायालय ने केंद्र और दिल्ली सरकार की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के पांच फरवरी के उस आदेश को चुनौती दी गयी है, जिसमें कहा गया था कि निर्भया मामले के सभी चार दोषियों को एक साथ फांसी दी जाएगी।

केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए सोलीटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि इन दोषियों ने न्याय प्रक्रिया का फायदा उठाते हुए अपनी सज़ा को टालने का हर उपाय किया है।

न्यायमूर्ति आर. भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना की पीठ ने याचिका की अगली सुनवाई 23 मार्च तय की है।

इससे पहले, दिल्ली की एक सत्र अदालत ने चारों दोषियों मुकेश कुमार सिंह, पवन गुप्ता, विनय शर्मा और अक्षय कुमार सिंह को बीस मार्च 2020 को सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दिये जाने का नया वारंट जारी किया है।

दिल्ली की एक अदालत ने निर्भया सामूहिक दुष्‍कर्म और हत्या के मामले में चार दोषियों को 20 मार्च को सुबह साढ़े पांच बजे फांसी देने के लिए आज नया वारंट जारी किया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा की अदालत को दिल्‍ली सरकार ने बताया कि‍ दोषियों के सभी कानूनी विकल्‍प खत्‍म हो चुके हैं इसलिए उनकी फांसी की सज़ा पर अमल के लिए नयी तारीख तय की जाए।

चारों दोषियों के वकील ने अदालत से कहा कि फांसी की तारीख तय करने की कार्यवाही में अब कोई कानूनी बाधा नहीं है।

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