उच्चतम न्यायालय ने सर्वसम्‍मत फैसले में मंदिर निर्माण के लिए अयोध्‍या में विवादित भूमि की केन्‍द्र द्वारा गठित किए जाने वाले एक ट्रस्‍ट को सौंपने का आदेश दिया

उच्चतम न्यायालय ने आज एक ऐतिहासिक फैसले में अरसे से लम्बित अयोध्या भूमि विवाद मामले पर फैसला सुना दिया। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मत फैसले में व्यवस्था दी कि दो दशमलव सात-सात एकड़ का समूचा विवादित भूखंड केंद्र सरकार के पास ही रहेगा और इसे मंदिर के निर्माण के लिए न्यास को सौंपा जाएगा। न्यायालय ने यह भी व्यवस्था दी कि अयोध्या शहर में किसी प्रमुख स्थान पर मस्जिद के निर्माण के लिए पांच एकड़ का उपयुक्त वैकल्पिक भूखंड ढूंढा जाना चाहिए।

पीठ ने कहा कि दो दशमलव सात-सात एकड़ के विवादित भूखण्ड का मालिकाना हक रामलला विराजमान को सौंपा जाएगा। न्यायालय ने कहा है कि मंदिर निर्माण के लिए तीन महीने के भीतर एक न्यास बनाया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि समाज के सभी वर्गों द्वारा उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया जाना, भारत की सामाजिक सद्भाव की प्राचीन संस्कृति और परम्परा को दर्शाता है। राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में श्री मोदी ने कहा कि आज के दिन, अगर किसी के मन में कोई कटुता है, तो यह उसे भुला देने का दिन है।

उन्होंने कहा कि आज का दिन भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में भी एक स्वर्णिम अध्याय है क्योंकि न्यायालय ने दशकों पुराना एक मामला निपटाया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जनता का आह्वान किया कि वे नए सिरे से शुरूआत करें और यह सुनिश्चित करें कि देशवासी सबका साथ, सबका विकास की भावना से राष्ट्र के विकास के लिए एकजुट हो जाएं।

सर्वोच्‍च न्‍यायालय के आज के फैसले ने देश को यह संदेश भी दिया है कि कठिन से कठिन मसले का हल संविधान के दायरे में ही आता है। कानून के दायरे में ही आता है। हमें इस फैसले से सीख लेनी चाहिए कि भले ही कुछ समय लगे लेकिन फिर भी धैर्य बनाकर रखना ही सर्वोचित है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज के फैसले से एकजुट होने का संदेश मिलता है और उच्चतम न्यायालय ने यह दिखा दिया है कि जटिल मामलों को भी सुलझाया जा सकता है।

सर्वोच्‍च अदालत का यह फैसला हमारे लिए एक नया सवेरा लेकरके आया है। इस वि‍वाद का भले ही कई पीढ़ियों पर असर पड़ा हो लेकिन इस फैसले के बाद हमें यह संकल्‍प करना होगा कि अब नई पीढ़ी नए सिरे से न्‍यू इंडिया के निर्माण में जुटेगी। आइये एक नई शुरूआत करते है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में देश के संविधान और न्यायिक प्रणाली पर लोगों का भरोसा कायम रहना बहुत बड़ी बात है।

प्रधानमंत्री ने ईद-मिलाद-उन-नबी की पूर्व संध्या पर देश वासियों को शुभकामनाएं भी दी हैं।

उप-राष्‍ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा है कि अयोध्‍या भूमि विवाद मामले में उच्‍चतम न्‍यायालय का फैसला समूचे भारत की जीत है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने एक ट्वीट में सभी समुदाय और धर्मों के लोगों से अपील की कि वे इस निर्णय को स्‍वीकार करें और शांति तथा सौहार्द बनाये रखें।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस निर्णय को प्रत्‍येक व्‍यक्ति को पूरे मन से स्‍वीकार करना चाहिए।

इतिहास का एक लैंडमार्क जजमेंट है। सहज रूप से सभी को इसे स्‍वीकार करना चाहिए। पर मैं ये भी मानता हूं कि इससे सर्वधर्म समभाव की भावना भी और अधिक मजबूत होगी और साथ ही साथ सामाजिक ताना बाना भी जिसके परिणाम स्‍वरूप मजबूत होगा ऐसा मेरा विश्‍वास है।

अल्पसंख्यक कार्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करना हम सबकी साझा जिम्मेदारी है।

अयोध्‍या का जो फैसला है वो किसी की हार और किसी की जीत के रूप में नहीं देखना चाहिए और इस न्‍यायिक फैसले को जीत के जुनूनी जश्‍न और हार के हाहाकारी हंगामें की भेंट नहीं चढ़ना चाहिए। हमें पूरी तरह से देश के सौहार्द, देश के भाईचारे और देश की एकता की जो डोर है, जो संस्‍कृति‍ और संस्‍कार है उसे हर हाल में मजबूत करना है।

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍य नाथ ने लोगों से उच्‍चतम न्‍यायालय के फैसले का सम्‍मान करने की अपील की है।

राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि काफी जांच पड़ताल के बाद यह अंतिम निर्णय लिया गया है, जिसे हार जीत के रूप में नहीं देखना चाहिए।

दशकों तक चली लंबी न्‍यायिक प्रक्रिया के बाद यह विधि सम्‍मत अंतिम निर्णय हुआ है। इस लंबी प्रक्रिया में श्री रामजन्‍म भूमि से संबंधित सभी पहलूओं का बारीकी से विचार हुआ है। इस निर्णय को जय पराजय की दृष्टि से बिलकुल नहीं देखना चाहिए।

कांग्रेस पार्टी के नेता कपिल सिब्‍बल ने कहा कि पांचो न्‍याया‍धीशों का सर्वसम्‍मत निर्णय मायने रखता है।

पांच जज सुप्रीम कोर्ट में कॉन्‍स्‍टीट्यूशन बैंच इक्‍ठ्ठा होकर एक फैसला दें, यूनेनिमस फैसला दें, तो वो भी अपने आप में एक मायने रखता है और अगर वो यूनेनिमस फैसला देते हैं, तो यूनेनिमिटी एक तरफ और देश की यूनिटी दूसरी तरफ। अगर ये दो हम अल्‍फाज़ अपने सामने रखेंगे, तो देश आगे बढ़ेगा।

महाराष्ट्र के कार्यवाहक मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस,शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने भी फैसले का स्वागत किया है।

विश्‍व हिन्‍दू परिषद ने कहा है कि उच्‍चतम न्‍यायालय का फैसला भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए एक महत्‍वपूर्ण और निर्णायक कदम है।

अयोध्या भूमि विवाद मामले के एक पक्षकार इकबाल अंसारी ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि वो फैसले के अध्‍ययन के बाद बोर्ड पुनर्विचार याचिका दाखिल करने का निर्णय लेगा।

उत्‍तर प्रदेश में सुन्‍नी सेंट्रल वक्‍फ बोर्ड ने इस निर्णय का स्‍वागत किया है। उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड, उच्चतम न्यायालय के फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर नहीं करेगा। एक वक्‍तव्य में बोर्ड के अध्यक्ष ज़फर फारूकी ने कहा कि वे उच्चतम न्यायालय के फैसले को लेकर न तो समीक्षा याचिका दायर करेंगे और न ही उपचारात्मक याचिका दायर करेंगे।

देखिए मैं चेयरमैन ऑफ सुन्‍नी वर्क्‍फ बोर्ड मेरा यह कहना है कि शुरू से हम लोगों का यह स्‍टैंड रहा है कि जो सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा उसको हम मानेंगे। वो फैसला आ गया है उसका हम स्‍वागत कर रहे हैं। उसे मानेंगे और हमारी तरफ से कोई रिव्‍यू की कार्रवाई नहीं होगी।

हमारे संवाददाता ने खबर दी है कि उच्चतम न्यायालय के निर्णय का लोगों ने व्यापक स्वागत किया है। कई स्थानों पर दोनों समुदायों के लोग एक-दूसरे को बधाईयां दे रहे हैं और मिठाइयां बांट रहे हैं।

इस बीच, समाजवादी पार्टी अध्‍यक्ष अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती और उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने फैसले का स्‍वागत किया।

उच्चतम न्यायालय के फैसले के मद्देनजर समूचे उत्तर प्रदेश में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भी तैनात किया गया है।

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