केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री ने कहा है कि एक किराया निगरानी इकाई 60 मार्गों के किराये पर नजर रख रही है

केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य एम.सिंधिया ने आज लोकसभा में जानकारी दी कि नागरिक विमानन मंत्रालय के पास एक किराया निगरानी इकाई है जो आकस्मिक आधार पर 60 मार्गों के किरायों पर नज़र रख रही है। हवाई किराए पर एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि किराया निगरानी इकाई निर्धारित उड़ान से 30 दिन, 15 दिन, 7 दिन, 3 दिन, 2 दिन और 1 दिन पहले किराए की निगरानी करती है।

केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा, ”नागरिक विमानन एक मौसमी क्षेत्र है और इसका किराया बदलता रहता है। अक्टूबर से मध्य जनवरी तक अत्यधिक व्यस्त सीज़न होता है, उसके बाद अप्रैल-मई तक बहुत कम व्यस्त सीज़न आता है जब छुट्टियाँ शुरू होती हैं और फिर मध्य जून तक आपके पास अत्यधिक व्यस्त सीज़न होता है। यह केवल भारत तक ही सीमित नहीं है; यह एक वैश्विक घटना है।”

केंद्रीय मंत्री महोदय ने बताया, “जहां तक एयरलाइंस का सवाल है, यदि आप पहले से अपनी टिकट बुकिंग करते हैं, तो कोई अधिक किराया नहीं होगा, लेकिन यदि आप आखिरी दिन बुकिंग करते हैं, तो आरक्षण बकेट डिज़ाइनर जो कि आरबीडी प्रणाली है, के अनुसार, किराया बढ़ जाता है।” ।”

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि पिछले 3 वर्षों में, सभी एयरलाइंस को मिलाकर, एयरलाइंस को वार्षिक आधार पर लगभग 55,000 करोड़ रुपये से 1,32,000 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। कोविड ने एयरलाइंस की वित्तीय व्यवहार्यता को पूरी तरह से नष्ट कर दिया। उस माहौल में भी, हमारी एयरलाइंस ने बहुत टिकाऊ आधार पर परिचालन किया है।

उन्होंने कहा कि एयर टरबाइन ईंधन एयरलाइंस की परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत है और एयर टरबाइन ईंधन की कीमतें 55,000 रुपये प्रति किलो लीटर से बढ़कर 1,55,000 रुपये प्रति किलो लीटर हो गई हैं। इसमें 3 गुना की वृद्धि हुई है, लेकिन इस कारण से हवाई किराया कहीं भी तर्कसंगत रूप से नहीं बढ़ा है। वर्तमान में एयर टरबाइन ईंधन पहले के स्तर से घटकर अब भी ढाई गुना के करीब हो गया है।