केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने एम्स, नई दिल्ली में बिना किसी परेशानी के भुगतान के लिए एम्स-एसबीआई स्मार्ट पेमेंट कार्ड की शुरूआत की

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज यहां एम्स-एसबीआई स्मार्ट पेमेंट कार्ड की शुरूआत की। एम्स-एसबीआई स्मार्ट पेमेंट कार्ड एम्स नई दिल्ली में बिना किसी परेशानी के इलाज के लिए भुगतान सुनिश्चित करेगा।

इस अवसर पर, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि “एम्स स्मार्ट पेमेंट कार्ड दूर-दराज के इलाकों के मरीजों की नकदी ले जाने की लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान करेगा।” उन्होंने कहा कि मरीज या उनके तीमारदार एम्स, नई दिल्ली के सुविधा केन्द्रों से आसानी से कार्ड प्राप्त कर सकते हैं और उसके बाद विभिन्न काउंटरों पर भुगतान के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं।

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रोगी देखभाल सेवाओं और डिजिटल इंडिया पहल में एक प्रमुख कदम के रूप में इस शुरूआत की सराहना करते हुए, डॉ. मांडविया ने कहा कि डिजिटल इंडिया पहल ने आसानी और सुरक्षा के एक नए युग की शुरुआत की है जो पहले बेहद कठिन दिखाई देता था और आज भी अनेक देशों के लिए एक दूर का लक्ष्य है।

स्मार्ट पेमेंट कार्ड का ‘वन एम्स, वन कार्ड’ के रूप में जिक्र करते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि एम्स, नई दिल्ली में इलाज करा रहे मरीज के लिए भुगतान संबंधी किसी भी तत्काल आवश्यकता के मामले में अब कोई भी व्यक्ति देश भर से आसानी से और तेजी से धनराशि स्थानांतरित कर सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि निकट भविष्य में इन कार्डों की सेवाएं देश के सभी एम्स में विस्तारित की जाएंगी। उन्होंने देश के अस्पतालों में मरीजों के लिए और अधिक सुविधा उपाय जोड़ने के प्रति केन्द्र की प्रतिबद्धता दोहराई।

एम्स-एसबीआई स्मार्ट पेमेंट कार्ड

एसबीआई-एम्स स्मार्ट कार्ड सभी मरीजों को मुफ्त प्रदान किया जा रहा है और इसमें कोई सेवा शुल्क नहीं है। प्रवेश पर सभी मरीजों को स्मार्ट कार्ड जारी किया जाएगा। कार्ड को मरीज के विशिष्ट अस्पताल पहचान (यूएचआईडी) नंबर और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत जारी आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (एबीएचए) आईडी से जोड़ा जाएगा। कार्ड से टॉप-अप और रिफंड केवल मरीज के यूएचआईडी से जुड़े मोबाइल नंबर पर प्राप्त वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) के प्रावधान पर किया जा सकता है। इससे धोखाधड़ी और चोरी रोकने में मदद मिलेगी. यदि कोई मरीज कार्ड खो देता है, तो मरीज को बदले में मुफ्त में दूसरा कार्ड प्रदान किया जाएगा और शेष राशि (यदि कोई हो) उस एवजी कार्ड में स्थानांतरित कर दी जाएगी। एक बार जारी किया गया कार्ड पांच साल की अवधि के लिए वैध होगा। इस कार्ड का उपयोग करके किए गए सभी लेनदेन एम्स में ई-हॉस्पिटल फ़ंक्शनल से जुड़े हुए हैं। एम्स और बैंक के बीच दोतरफा जुड़ाव के कारण सभी वित्तीय लेनदेन का समाधान वित्त प्रभाग, एम्स द्वारा किया जा सकता है।

सभी मरीज़ भूतल पर स्थित परिभाषित स्मार्ट कार्ड काउंटर, मातृ एवं शिशु ब्लॉक और स्मार्ट कार्ड जारी करने वाले काउंटर, स्टाफ कैफेटेरिया से स्मार्ट कार्ड प्राप्त कर सकते हैं। स्मार्ट कार्ड जारी करने के लिए, रोगी/कर्मचारी को एम्स में उत्पन्न अपना यूएचआईडी देना होगा। यूएचआईडी के प्रावधान पर, मरीज को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी प्राप्त होगा जो कार्ड को कार्यशील बनाने के लिए काउंटर पर प्रदान किया जाएगा। स्मार्ट कार्ड को एक बार टॉप अप और सक्रिय करने के बाद संस्थान में प्राप्त सेवाओं के लिए 24 x 7 आधार पर विभिन्न कैश काउंटरों पर भुगतान के लिए उपयोग किया जा सकता है। रोगी के लिए टॉप-अप के लिए नकदी का उपयोग करने के अलावा, टॉप-अप ऑनलाइन तौर-तरीकों, क्रेडिट/डेबिट कार्ड के माध्यम से कहीं से भी किसी भी रिश्तेदार/मित्र द्वारा किया जा सकता है।

इस कार्ड की शुरूआत के कार्यक्रम के अवसर पर एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास; मंजीत सिंह, डीजीएम, भारतीय स्टेट बैंक और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।