विश्‍व रेडियो दिवस आज

आज विश्‍व रेडियो दिवस है। इसका उद्देश्‍य जनता और मीडिया में रेडियो के महत्‍व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन रेडियो की अनोखी क्षमता को याद करने के लिए भी मनाया जाता है, यह आम लोगों के जीवन से सीधा जुड़ा है और दुनिया के सभी भागों के लोगों को जोड़ता है।

इस वर्ष के रेडियो दिवस का मुख्‍य विषय है -रेडियो और विविधता। संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव अंतोनियो गुतरस ने इस अवसर पर अपने संदेश में लोगों से अनुरोध किया है कि वे विविधता को बढ़ावा देने के लिए रेडियो की ताकत को समझें और अधिक शांतिपूर्ण तथा समावेशी विश्‍व के निर्माण में मदद करें।

भारत के लोक सेवा प्रसारक प्रसार भारती के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी शशि शेखर वेम्‍पटि ने कहा है कि देश के अनेक भागों में अब भी लोग सूचना के बुनियादी स्रोत के रूप में रेडियो पर निर्भर हैं। उन्‍होंने आकाशवाणी की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए उठाये गये विभिन्‍न कदमों का भी जिक्र किया है।

1937 में ऑल इंडिया रेडियो की शुरूआत के बाद से आकाशवाणी का कई गुना विस्‍तार हुआ है। हमारे संवाददाता ने बताया है कि आज प्रतिदिन 92 भाषाओं और बोलियों में आकाशवाणी के 607 समाचार बुलेटिन प्रसारित किये जाते हैं।

संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा ने 14 जनवरी, 2013 को विश्‍व रेडियो दिवस मनाने के यूनेस्‍को के फैसले को औपचारिक स्‍वीकृति दी थी और अपने 67वें सत्र में 13 फरवरी को विश्‍व रेडियो दिवस घोषित किया था। रेडियो दूरदराज के क्षेत्रों और कमजोर तबकों के बीच पहुंचने वाला बहुत ही सस्‍ता माध्‍यम है। रेडियो मानवता की रक्षा और लोकतांत्रिक चर्चाओं का सशक्‍त माध्‍यम भी है। यह आपातकालीन संचार और आपदा राहत में भी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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