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भारत-यूएई निवेश पर उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल (HLJTFI) की 14वीं बैठक मुंबई में आयोजित हुई

भारत-यूएई निवेश पर उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल (एचएलजेटीएफआई) की 14वीं बैठक आज मुंबई में आयोजित हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अबू धाबी निवेश प्राधिकरण (एडीआईए) के प्रबंध निदेशक शेख हामिद बिन जायद अल नाहयान ने की।

निवेश पर उच्च स्तरीय संयुक्त कार्यबल (एचएलजेटीएफआई) की स्थापना वर्ष 2013 में भारत और यूएई के बीच व्यापार, निवेश तथा आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। अपनी स्थापना के बाद से यह कार्यबल भारत और यूएई में निवेश के अवसरों तथा संभावनाओं पर चर्चा करने के साथ-साथ दोनों देशों के निवेशकों के समक्ष आने वाली चुनौतियों के समाधान के लिए एक प्रभावी मंच के रूप में कार्य कर रहा है।

नियमित उच्चस्तरीय आदान-प्रदान, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मई 2026 में यूएई यात्रा तथा अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की सितंबर 2026 में भारत यात्रा शामिल है, ने दोनों देशों के बीच निरंतर मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक दिशा और नई गति प्रदान की है।

इस बैठक में द्विपक्षीय निवेश प्रवाह बढ़ाने तथा सहयोग के उभरते क्षेत्रों की संभावनाओं का पता लगाने सहित व्यापार और निवेश से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई। यूएई-भारत आर्थिक साझेदारी में निरंतर विस्तार हो रहा है और इसका रणनीतिक महत्व भी बढ़ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 101.25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जबकि वर्ष 2025 में गैर-तेल व्यापार 76.2 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। यह वाणिज्यिक संबंधों की मजबूती और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) के प्रभाव को दर्शाता है। वर्ष 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जाने के साझा लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते हुए, दोनों देश ऊर्जा, बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी और एआई सहित भविष्य के विकास को गति देने वाले क्षेत्रों में निवेश सहयोग का विस्तार कर रहे हैं।

सह-अध्यक्षों ने बैठक में यूएई और भारत के बीच बढ़ते व्यापार तथा सीईपीए, द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) और कराधान तथा पारस्परिक कानूनी सहायता से संबंधित अन्य समझौतों द्वारा द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने में निभाई गई भूमिका को रेखांकित किया। दोनों पक्षों ने सीईपीए से संबंधित उप-समितियों के कार्यों की समीक्षा की तथा तेजी से बदलते भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में व्यापारिक सुदृढ़ता को और मजबूत करने के उपायों पर विचार-विमर्श किया।

संयुक्त कार्यबल ने गुजरात में फूड पार्क परियोजना सहित विभिन्न संयुक्त निवेश परियोजनाओं और सहयोग के क्षेत्रों में हुई प्रगति की समीक्षा की। दोनों पक्षों ने वर्ष 2026 के अंत से पहले यूएई में इन्वेस्ट इंडिया कार्यालय के संभावित संचालन की शुरुआत का स्वागत किया। दोनों पक्षों ने एमिरेट्स एनबीडी द्वारा भारत के आरबीएल बैंक में बहुलांश हिस्सेदारी के लगभग 3 अरब अमेरिकी डॉलर के हालिया अधिग्रहण तथा इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (आईएचसी) द्वारा भारत की सम्मान कैपिटल में 1 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का स्वागत किया। इसके साथ ही, ओडिशा में एकीकृत एल्युमिनियम परिसर की स्थापना के लिए 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर के संयुक्त निवेश की इच्छा का भी उल्लेख किया गया।

दोनों पक्षों ने भारत के गिफ्ट सिटी में मशरेक बैंक, फर्स्ट अबू धाबी बैंक (एफएबी) और अबू धाबी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी (एडीएनआईसी) के शाखा कार्यालयों के सफलतापूर्वक खुलने का भी उल्लेख किया। दोनों पक्षों ने मई 2026 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यूएई यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों के तहत ऊर्जा सहयोग की भी समीक्षा की। पारस्परिक निवेश के तहत दोनों देशों के बीच साझेदारी विभिन्न क्षेत्रों में विस्तृत और बहुआयामी रूप से आगे बढ़ रही है।

वित्तीय क्षेत्र में सहयोग यूएई-भारत आर्थिक साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है। सह-अध्यक्षों ने स्थानीय मुद्रा में लेन-देन, भुगतान और संदेश प्रणालियों के एकीकरण तथा केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं से संबंधित पहलों पर यूएई और भारत के केंद्रीय बैंकों द्वारा की गई प्रगति की समीक्षा की। इन पहलों में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को अधिक सुगम, सुलभ और सुदृढ़ बनाने की क्षमता है। दोनों पक्षों ने इनके समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए मिलकर आवश्यक कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की।

प्रतिनिधिमंडलों ने द्विपक्षीय निवेश प्रवाह बढ़ाने की क्षमता वाले विभिन्न क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया। इनमें ऊर्जा, उद्योग, लॉजिस्टिक्स, बुनियादी ढांचा, प्रौद्योगिकी और एआई, अंतरिक्ष, खाद्य सुरक्षा, कृषि नवाचार तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम में सहयोग को और मजबूत करना शामिल है।

बैठक के दौरान अबू धाबी और भारत के बीच नागरिक उड्डयन सहयोग पर भी चर्चा की गई। इसका उद्देश्य व्यापक आर्थिक संबंधों को समर्थन देने के लिए हवाई संपर्क को और बेहतर बनाना है। दोनों पक्षों ने भारत के गुजरात स्थित धोलेरा में विमानन एवं लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने के लिए निवेश के अवसरों और सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श किया।

अपनी स्थापना के बाद से एचएलजेटीएफआई ने भारत और यूएई के बीच निवेश से संबंधित मुद्दों को उठाने और उनके समाधान के लिए एक खुले और प्रभावी मंच के रूप में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

दोनों पक्षों ने यूएई-भारत फास्ट ट्रैक तंत्र के माध्यम से भारत में यूएई के निवेश और कंपनियों तथा यूएई में भारतीय निवेश और कंपनियों को प्रभावित करने वाले लंबित मुद्दों के समाधान के लिए किए गए प्रयासों का भी उल्लेख किया। दोनों पक्षों ने इन मुद्दों के समयबद्ध समाधान में सहयोग के लिए आवश्यक कदम उठाने पर सहमति व्यक्त की।

सह-अध्यक्षों ने एचएलजेटीएफआई की सफलता में निरंतर योगदान के लिए दोनों देशों के राजदूतों, अधिकारियों और तकनीकी टीमों के प्रति आभार व्यक्त किया।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और एचएलजेटीएफआई के सह-अध्यक्ष पीयूष गोयल ने एचएलजेटीएफआई की 14वीं बैठक के संबंध में कहा:

“विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में भारत समावेशी, सतत और सुदृढ़ विकास के लिए प्रतिबद्ध है। इस यात्रा में यूएई भारत का विश्वसनीय मित्र और साझेदार है। आज संयुक्त कार्यबल की बैठक में अनेक पहलों के तहत हुई सकारात्मक प्रगति को रेखांकित किया गया और सहयोग के भविष्य के क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया गया। निवेश, नवाचार, विकास और हमारे लोगों की सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग पर आधारित यह साझेदारी दोनों पक्षों के दूरदर्शी नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में अग्रसर है।”

एचएलजेटीएफआई के सह-अध्यक्ष और अबू धाबी निवेश प्राधिकरण (एडीआईए) के प्रबंध निदेशक महामहिम शेख हामिद बिन जायद अल नाहयान ने कहा:

“यह बैठक यूएई और भारत के बीच लंबे समय से चले आ रहे और निरंतर मजबूत होते संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण समय पर आयोजित हुई है। वर्ष 2013 में अपनी स्थापना के बाद से हमारा संयुक्त कार्यबल स्पष्ट संवाद, व्यावहारिक समाधान और साझा आर्थिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता रहा है। संयुक्त कार्यबल ने निवेशकों को समर्थन देने, चुनौतियों का समाधान करने और सहयोग के नए अवसरों की पहचान करने में सहायता करते हुए दोनों देशों को और करीब लाने में योगदान दिया है।”

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