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Union Minister of Jal Shakti C.R. Patil, interacted with states and union territories on innovative models for fecal sludge management under the Swachh Bharat Mission-Gramin.
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केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के अंतर्गत मल कीचड़ प्रबंधन के नवोन्‍मेषी मॉडलों पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ परस्‍पर बातचीत की

जल शक्ति मंत्रालय ने 6 जनवरी 2026 को राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न जिलों के साथ स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत देश में लागू किए जा रहे मल कीचड़ प्रबंधन (एफएसएम) के विभिन्न मॉडलों पर चर्चा करने के लिए एक वर्चुअल संवाद का आयोजन किया।

इस संवाद की अध्यक्षता माननीय केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने की। जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अशोक के.के. मीना और संयुक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण) ऐश्वर्या सिंह ने इस संवाद में भाग लिया। जिला कलेक्टर, जिला पंचायत प्रमुख, स्वयं सहायता समूह के सदस्य, पंचायत सदस्य, राज्य मिशन निदेशक और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल विभागों के वरिष्ठ अधिकारी वर्चुअल माध्यम से इसमें शामिल हुए।

इस संवाद का उद्देश्य संपूर्ण स्वच्छता मूल्य श्रृंखला पर ध्यान केंद्रित करते हुए देश के विभिन्न हिस्सों से सफल और विस्तार योग्य एफएसएम मॉडल साझा करना, एफएसएम के विभिन्न पहलुओं पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और जिलों के बीच आपसी ज्ञानवर्धन को मजबूत करना और शौचालय निर्माण से परे सुरक्षित स्वच्छता प्रणालियों के महत्व को सुदृढ़ करना था।

गुजरात, सिक्किम, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, लद्दाख और त्रिपुरा के प्रतिनिधियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा किए और अपने-अपने मॉडल प्रस्तुत किए। इनमें इन-सीटू उपचार मॉडल, सामुदायिक समाधान, स्वयं सहायता समूहों और पंचायतों के साथ मिलकर प्रभावी संचालन एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के उपाय, मल कीचड़ उपचार संयंत्रों (एफएसटीपी) की स्थिरता सुनिश्चित करना और एफएसएम के लिए शहरी-ग्रामीण संपर्क स्थापित करना शामिल था। उपचारित मल कीचड़ और अपशिष्ट जल के सुरक्षित संग्रहण, परिवहन, उपचार और पुन: उपयोग के लिए किए गए प्रयासों पर चर्चा की गई। कई मॉडलों ने स्वच्छता सुनिश्चित करने के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर रोजगार सृजन के अवसर भी प्रदान किए।

इस संवाद के दौरान, राज्यों ने देश भर से कई नवोन्मेषी और विस्तार योग्य खाद्य स्वच्छता मॉडल प्रस्तुत किए। एक उल्लेखनीय उदाहरण ओडिशा के खुर्दा जिले से आया, जहाँ एक ट्रांसजेंडर-आधारित स्वयं सहायता समूह अपने खाद्य स्वच्छता संयंत्र (एफएसटीपी) के संचालन और रखरखाव का कार्य कर रहा है। यह पहल दर्शाती है कि स्वच्छता सेवा वितरण समावेशी और टिकाऊ होने के साथ-साथ ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों के लिए सम्मानजनक आजीविका के अवसर भी सृजित कर सकता है। यह मॉडल आवश्यक सेवाओं तक समान पहुंच को बढ़ावा देने, सामाजिक समावेश को प्रोत्साहित करने और हाशिए पर पड़े समूहों के आर्थिक सशक्तिकरण को सुदृढ़ करने में समुदाय-आधारित उद्यमों की शक्ति को उजागर करता है।

अन्य एफएसएम मॉडलों में शामिल हैं : गुजरात के दांग जिले के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में दोहरे गड्ढे वाले शौचालयों का व्‍यापक स्‍तर पर अनुकूलन; सिक्किम के मंगन जिले में एकल गड्ढे वाले शौचालयों को दोहरे गड्ढे वाले शौचालयों में परिवर्तित करने के लिए किए गए केंद्रित प्रयास, जिससे दूरस्थ, पहाड़ी क्षेत्रों में एफएसएम अनुपालन सुनिश्चित हो सके; मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के कालीबिल्लोद ग्राम पंचायत में भारत का पहला ग्रामीण एफएसटीपी (उपचारित अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र) जहां वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने के लिए एमआरएफ (मल्टीरल रिसोर्स प्लांट) के साथ-साथ उपचारित अपशिष्ट जल में मत्स्य पालन का एक अभिनव प्रयोग किया जा रहा है; कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले का क्लस्टर-आधारित एफएसटीपी मॉडल जिसमें संचालन और रखरखाव में स्वयं सहायता समूहों की मजबूत भागीदारी है; लद्दाख के लेह जिले की अत्यधिक ठंड, शुष्क और उच्च ऊंचाई वाली परिस्थितियों में बनाए जा रहे इकोसैन शौचालय और त्रिपुरा के गोमती जिले में सार्वजनिक कार्यक्रमों, सामुदायिक सभाओं और मेलों के लिए मोबाइल बायो-शौचालयों की तैनाती, जिसका प्रबंधन आत्मनिर्भर, स्थानीय स्वयं सहायता समूह के नेतृत्व में संचालन और रखरखाव के माध्यम से किया जा रहा है।

इस संवाद में उन समुदायों के सदस्य भी शामिल थे, जो जमीनी स्तर पर इन मॉडलों को प्रत्यक्ष रूप से लागू कर रहे हैं और जिन्होंने जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से अपने जमीनी अनुभवों के बारे में बात की। प्रतिभागियों की स्थानीय भाषाओं में बातचीत को भी प्रोत्साहित किया गया, जिससे वे सहज हुए और उत्साहपूर्वक अपने अनुभव साझा किए।

जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने स्वच्छ भारत अभियान में योगदान देने वाले और साथ ही आय एवं आजीविका के अवसर सृजित करने वाले अभिनव मॉडल प्रदर्शित करने के लिए प्रतिभागियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इनमें से कई पहलें दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में लागू की गई हैं, जो यह साबित करती हैं कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां स्थायी समाधानों को जन्म देती हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि एफएसएम सतत ग्रामीण स्वच्छता का एक महत्वपूर्ण घटक है और संपूर्ण स्वच्छता सुनिश्चित करने के साथ-साथ जन स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एफएसएम समाधानों को व्यवहार्य, समावेशी और दीर्घकालिक बनाने के लिए सामुदायिक भागीदारी, स्वयं सहायता समूहों, पंचायतों और विभिन्न हितधारकों की सहभागिता और संदर्भ-विशिष्ट, आवश्यकता-आधारित और उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को अपनाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, स्वच्छता के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन ने अभूतपूर्व गति प्राप्त की है, जिससे गांधीजी का स्वच्छता और जनभागीदारी का सच्चा संदेश देश के कोने-कोने तक पहुंचा है।

मंत्रालय ने एसबीएम (जी) के तहत ग्रामीण भारत में एफएसएम के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किए जा रहे कार्यों को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, जिसमें तकनीकी सहायता, क्षमता निर्माण और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा विकसित नवोन्‍मेषी, समुदाय-केन्द्रित और समावेशी मॉडलों को बढ़ावा देना शामिल है।

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