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India and the United States sign the Pax Silica Declaration at the India AI Impact Summit in New Delhi
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भारत और अमेरिका ने नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के पांचवें दिन, भारत औपचारिक रूप से पैक्स सिलिका गठबंधन में शामिल हो गया, जो भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच रणनीतिक प्रौद्योगिकी और आपूर्ति श्रृंखला सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। हस्ताक्षर समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ सरकारी हस्तियां एक साथ आईं, जो एआई-संचालित वैश्विक अर्थव्यवस्था को शक्ति प्रदान करने वाले संपूर्ण प्रौद्योगिकी ढांचे को सुरक्षित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पैक्स सिलिका को विश्वसनीय राष्ट्रों के एक रणनीतिक गठबंधन के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो महत्वपूर्ण खनिजों और सेमिकंडक्‍टर विनिर्माण से लेकर उन्नत एआई प्रणालियों और तैनाती अवसंरचना तक, “सिलिकॉन स्टैक” की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अत्यधिक एकाग्रता को कम करना, आर्थिक दबाव को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि उभरती प्रौद्योगिकियों का विकास और संचालन खुले, लोकतांत्रिक समाजों द्वारा किया जाए।

सभा को संबोधित करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस क्षण को महज एक औपचारिक समझौते से कहीं अधिक महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ एक शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं कर रहे हैं; हम भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।” उन्‍होंने इस बात पर जोर दिया कि युवा पीढ़ी के लिए नई नींव और नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।

स्वतंत्रता के बाद से चक्रवृद्धि वृद्धि की शक्ति पर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा, “यदि हम 1947 से भारत की वृद्धि को देखें, तो हम सभी चक्रवृद्धि वृद्धि के प्रभाव की कल्पना कर सकते हैं।” उन्होंने देश की बढ़ती सेमीकंडक्टर क्षमताओं पर जोर देते हुए कहा, “आज भारत के प्रतिभाशाली इंजीनियर दुनिया के सबसे उन्नत दो-नैनोमीटर चिप्स डिजाइन कर रहे हैं। सेमीकंडक्टर उद्योग को लगभग दस लाख नए कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी, और यह भारत के लिए एक बहुत बड़ा अवसर है।”

समारोह में संयुक्त राज्य अमेरिका के आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण मामलों के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने घोषणा को “केवल कागज पर एक समझौता नहीं, बल्कि एक साझा भविष्य के लिए एक रोडमैप” बताया।

दोनों देशों के साझा लोकतांत्रिक इतिहास का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “आज, जब हम पैक्स सिलिका घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, तो हम हथियारबंद निर्भरता को ना कहते हैं, और हम ब्लैकमेल को ना कहते हैं। साथ मिलकर, हम इस बात की पुष्टि करते हैं कि आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है।”

इस पहल के पीछे की व्यापक महत्वाकांक्षा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “हम भविष्य के संपूर्ण संसाधनों को सुरक्षित कर रहे हैं – धरती की गहराई में मौजूद खनिज, हमारी प्रयोगशालाओं और निर्माण इकाइयों में मौजूद सिलिकॉन वेफर्स, और वह बुद्धिमत्ता जो मानव क्षमता को उजागर करेगी। पैक्स सिलिका हमारी यह घोषणा है कि भविष्य उन्हीं का है जो निर्माण करते हैं।”

इसी भावना को दोहराते हुए, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने पैक्स सिलिका में भारत के प्रवेश को “रणनीतिक और आवश्यक” दोनों बताया।

उन्होंने कहा, “पैक्स सिलिका वह गठबंधन है जो 21वीं सदी की आर्थिक और तकनीकी व्यवस्था को परिभाषित करेगा। इसे संपूर्ण सिलिकॉन स्टैक को सुरक्षित करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें उन खानों से लेकर, जहां हम महत्वपूर्ण खनिजों का खनन करते हैं, उन फैबियों तक, जहां हम चिप्स का निर्माण करते हैं, और उन डेटा केंद्रों तक, जहां हम अत्याधुनिक एआई का उपयोग करते हैं, सभी शामिल हैं।”

साझेदारी की लोकतांत्रिक नींव को समझते हुए, राजदूत गोर ने टिप्पणी की, “पैक्स सिलिका इस बारे में है कि क्या स्वतंत्र समाज वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों पर नियंत्रण रखेंगे। हम स्वतंत्रता को चुनते हैं। हम साझेदारी को चुनते हैं। हम शक्ति को चुनते हैं।”

इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में हुए समझौते पर हस्ताक्षर से एक स्पष्ट संदेश मिला: कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रौद्योगिकियों का भविष्य संयोग पर नहीं छोड़ा जाएगा। इसका निर्माण स्वतंत्रता, साझेदारी और दीर्घकालिक लचीलेपन के प्रति दृढप्रतिज्ञ राष्ट्रों द्वारा सुनियोजित तरीके से किया जाएगा।

पैक्ससिलिका समझौते पर हस्ताक्षर के बाद, मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, माइक्रोन टेक्नोलॉजी के सीईओ संजय मेहरोत्रा ​​और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सीईओ एवं एमडी रणधीर ठाकुर की उपस्थिति में एक उच्च स्तरीय वार्ता हुई, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता की महत्वाकांक्षा और सेमिकंडक्‍टर क्षेत्र की मजबूती के रणनीतिक तालमेल पर बल दिया गया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमिकंडक्‍टर और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत के समन्वित प्रयासों पर जोर देते हुए, एस. कृष्णन ने कहा कि लक्ष्य “विश्वसनीय साझेदारों के साथ मजबूत सहयोग स्थापित करना है जो हमारे मूल्यों को साझा करते हैं,” ताकि भारत को भविष्य के वैश्विक तकनीकी इको-सिस्‍टम में एक मजबूत स्थान मिल सके।

इस बदलाव की तात्कालिकता पर जोर देते हुए सर्जियो गोर ने कहा, “एआई क्रांति क्षितिज पर नहीं है – यह पहले से ही यहां है।” मेहरोत्रा ​​ने आपूर्ति श्रृंखला आयाम पर बल देते हुए इसे “लचीली और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण के लिए एक साझा प्रतिबद्धता” और “एआई को बेहतर भविष्‍य के लिए आगे बढ़ाने हेतु एक पारस्परिक लाभ वाला इको-सिस्‍टम” बताया। रणधीर ठाकुर ने पैक्ससिलिका को “एक समयोचित और रणनीतिक कदम” बताते हुए कहा कि सेमीकंडक्टर का सफर हमेशा से “सामग्री, नवाचार और कंप्यूटिंग” द्वारा संचालित रहा है।

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