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TDB-DST supports indigenous development of high-performance acoustic antenna system for underwater high data rate communication
भारत

TDB-DST ने अंतर्जलीय उच्च डेटा दर संचार के लिए उच्च-प्रदर्शन ध्वनिक एंटीना प्रणाली के स्वदेशी विकास का समर्थन किया

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने उन्नत समुद्री प्रौद्योगिकियों में भारत की क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम के रूप में “वीडियो प्रसारण के लिए अंतर्जलीय उच्च डेटा दर संचार हेतु उच्च-प्रदर्शन ध्वनिक एंटीना प्रणाली का विकास” नामक परियोजना के लिए भारत की मेसर्स ज़ाल्टेन सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

टीडीबी समर्थित यह परियोजना स्वायत्त अंतर्जलीय प्लेटफार्मों के बीच विश्वसनीय, उच्च-बैंडविड्थ संचार—जिसमें वास्तविक समय वीडियो प्रसारण भी शामिल है—को मजबूत बनाने में सक्षम अगली पीढ़ी के हाइड्रोफोन ऐरे सेंसर सिस्टम विकसित करके अंतर्जलीय ध्वनिक संचार में मौजूद एक महत्वपूर्ण तकनीकी कमी को दूर करती है। यह पहल सिंगापुर की सुबनेरो प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से की जा रही है, जिसमें अंतर्जलीय ध्वनिकी में भारतीय विशेषज्ञता को उन्नत सॉफ्टवेयर-परिभाषित संचार प्रणालियों के साथ जोड़ा गया है।

अपतटीय ऊर्जा संचालन, गहरे समुद्र की खोज, समुद्री अनुसंधान और कार्यनीतिक अनुप्रयोगों के लिए स्वायत्त अंतर्जलीय वाहन (एयूवी) समूहों की बढ़ती तैनाती के साथ, मजबूत, उच्च-डेटा-दर वाले अंतर्जलीय संचार प्रणालियों की मांग अत्यंत आवश्यक हो गई है। कोंग्सबर्ग मैरीटाइम, सोनारडाइन और इवोलॉजिक्स जैसे स्थापित कंपनियों के पेश किए गए मौजूदा वैश्विक समाधान मुख्य रूप से पुरानी वास्तुकला पर आधारित लंबी दूरी और कम बैंडविड्थ संचार पर केंद्रित हैं। प्रस्तावित स्वदेशी प्रणाली से कई स्वायत्त प्लेटफार्मों के बीच अल्प दूरी, उच्च गति संचार के लिए अनुकूलित वाइडबैंड हाइड्रोफोन विकसित करके इस अंतर को पाटा जा सकता है।

इस परियोजना में चुनौतीपूर्ण अंतर्जलीय वातावरण में विश्वसनीयता बनाए रखते हुए मेगाबिट प्रति सेकंड डेटा दर प्रदान करने में सक्षम उन्नत ध्वनिक एंटीना प्रणाली के डिजाइन और विकास की परिकल्पना की गई है। सटीक ध्वनिक सेंसर सरणियों को सॉफ्टवेयर-परिभाषित संचार फ्रेमवर्क के साथ एकीकृत करके, यह समाधान समुद्री रोबोटिक प्रणालियों में तत्क्षण सहयोग, नेविगेशन और डेटा साझाकरण को बढ़ावा देगा। इस पहल का उद्देश्य उन्नत ध्वनिक सेंसरों के लिए भारत में ही उत्पादन क्षमता स्थापित करना, आयातित प्रौद्योगिकियों पर निर्भरता कम करना और अंतर्जलीय संवेदन एवं संचार में घरेलू दक्षता को बढ़ाना भी है।

इस अवसर पर टीडीबी सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा, “उन्नत अंतर्जलीय संचार प्रणालियां भारत के समुद्री अनुसंधान, अपतटीय अवसंरचना और रणनीतिक क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इस भारत-सिंगापुर संयुक्त प्रस्ताव के माध्यम से, टीडीबी उच्च प्रदर्शन वाली स्वदेशी ध्वनिक प्रौद्योगिकियों के विकास और व्यावसायीकरण में सहयोग कर रहा है, जो भारत को उभरती हुई नीली अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है। साथ ही, इससे पारस्परिक विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी साझेदारियों को मजबूती मिल सकती है।”

ज़ाल्टेन सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर ने कहा, “टीडीबी के सहयोग से हमें अगली पीढ़ी के अंतर्जलीय रोबोटिक्स और संचार नेटवर्क के लिए अनुकूलित ध्वनिक एंटीना प्रणालियों के विकास में तेजी लाने में मदद मिलेगी। इस मदद से समुद्री संवेदन और उच्च-डेटा दर वाले अंतर्जलीय संचार में भारत की तकनीकी क्षमताओं को मजबूती मिलेगी।”

यह परियोजना उद्योग-नेतृत्व वाले अनुसंधान एवं विकास तथा रणनीतिक सहयोग के माध्यम से विकसित स्वदेशी प्रौद्योगिकियों के व्यावसायीकरण को सुगम बनाने के टीडीबी के अधिदेश के अनुरूप है। उच्च-प्रदर्शन वाले अंतर्जलीय संचार प्रणालियों का समर्थन करके, टीडीबी प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, समुद्री नवाचार और महत्वपूर्ण समुद्री प्रौद्योगिकियों में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देता है, जिससे वैश्विक नीली अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका में योगदान मिलता है।

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