उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने आज श्रीनगर में कश्मीर विश्वविद्यालय के 21वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। देश के उपराष्ट्रपति के रूप में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की यह उनकी पहली यात्रा थी।
उपराष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को भले ही बुनियादी ढांचे और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता हो, लेकिन उनकी सच्ची विरासत उनके स्नातकों के चरित्र और योगदान में झलकती है। उन्होंने 1948 में स्थापित कश्मीर विश्वविद्यालय की गौरवशाली विरासत और बढ़ते अकादमिक प्रभाव की सराहना की। उन्होंने विश्वविद्यालय की एनएएसी ए++ ग्रेड, एनआईआरएफ विश्वविद्यालय श्रेणी में 34वीं रैंक, 2019 से अब तक 7,700 से अधिक शोध प्रकाशनों और राष्ट्रीय हिमालयी आइस-कोर प्रयोगशाला जैसी अग्रणी पहलों की प्रशंसा की, जो इसकी बढ़ती वैश्विक उपस्थिति को दर्शाती है।
उपराष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह की तीन महत्वपूर्ण बातों पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की है जिनमें उच्च शिक्षा मंत्री का महिला होना, विश्वविद्यालय की कुलपति का महिला होना और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में अधिकतर महिलाएं शामिल हैं। उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर में महिला सशक्तिकरण और प्रगति का सशक्त प्रमाण बताया।
उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि वे तेजी से बदलते विश्व में स्नातक हो रहे हैं और इस समय “परिवर्तन ही एकमात्र स्थिर कारक है।” उन्होंने छात्रों से निरंतर अनुकूलन करने, नए कौशल हासिल करने और नवाचार को अपनाने का आग्रह किया। भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नवप्रवर्तक के रूप में उभरने पर जोर देते हुए उन्होंने युवाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप स्वदेशी नवाचारों को आगे बढ़ाने और विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों, जिनमें श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का विस्तार और चेनाब रेल पुल जैसी महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं, का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि ये पहल नए अवसर पैदा करती हैं और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में श्रीनगर स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत देश का सबसे स्वच्छ शहर बनकर उभरेगा।
उपराष्ट्रपति ने झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के तहत जम्मू-कश्मीर से एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्य का दौरा किया था और उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपनी भावनाओं का सम्मान करना, और इस तरह के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
उपराष्ट्रपति ने अपने समापन भाषण में युवाओं से नशे से दूर रहने और सोशल मीडिया का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने का आग्रह किया। उन्होंने युवाओं को याद दिलाया कि जीवन में उनकी सहनशीलता, साहस और चरित्र की परीक्षा कक्षा में हासिल ज्ञान से भी परे होगी। एकता और अपनेपन के संदेश के साथ अपना संबोधन समाप्त करते हुए उन्होंने कहा, “यह ना मेरा कश्मीर है, ना तुम्हारा कश्मीर है – यह हम सबका कश्मीर है।”
इस दीक्षांत समारोह में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मनोज सिन्हा; जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और कश्मीर विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर उमर अब्दुल्ला; जम्मू-कश्मीर की उच्च शिक्षा मंत्री सकीना मसूद इटू; कश्मीर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नीलोफर खान; वरिष्ठ संकाय सदस्य, विशिष्ट अतिथि, अभिभावक और स्नातक छात्र उपस्थित थे।





