नीति आयोग और जेआईसीए ने महत्वाकांक्षी जिलों और ब्लॉकों में सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में जापान-भारत सहयोगात्मक कार्यों के द्वितीय चरण के लिए चर्चा के अभिलेख पर हस्ताक्षर किए
भारत-जापान विकास सहयोग को मजबूत करने की दिशा में नीति आयोग और जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जेआईसीए) ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, आज “सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में जापान-भारत सहकारी कार्यों के कार्यक्रम को बढ़ावा देने की परियोजना – चरण II” के लिए चर्चा अभिलेख (आरओडी) पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर नीति आयोग के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक, आकांक्षी जिला एवं ब्लॉक कार्यक्रम के रोहित कुमार और जेआईसीए भारत के मुख्य प्रतिनिधि ताकेउची ताकुरो की उपस्थिति रहे।
यह सहयोग भारत-जापान की मजबूत विकास साझेदारी की पुष्टि करता है और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को प्राप्त करने की दिशा में विशेष रूप से आकांक्षी जिलों (एडी) और आकांक्षी ब्लॉकों (एबी) में संयुक्त प्रयासों को आगे बढ़ाता है। रोहित कुमार ने कहा कि इस साझेदारी में संस्थागत शक्तियां, साझा ज्ञान और जमीनी अनुभव एक साथ है और इसका उद्देश्य वंचित क्षेत्रों में समावेशी विकास को गति देना है।
एडीपी और एबीपी के अंतर्गत इस परियोजना का उद्देश्य वैश्विक भागीदारी, स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, वित्तीय समावेशन एवं कौशल विकास तथा बुनियादी ढांचा – इन छह विषयों में नीतिगत ढांचों और कार्यान्वयन प्रणालियों को सुदृढ़ करना है। यह परियोजना संस्थागत क्षमता निर्माण, बेहतर निगरानी एवं मूल्यांकन तथा सतत विकास लक्ष्यों के प्रभावी स्थानीयकरण पर केंद्रित है।
इस परियोजना के अंतर्गत प्रमुख गतिविधियों में लोगों के बीच आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण सम्बंधी कार्य, जापान-भारत ज्ञान मंच, सर्वोत्तम तौर-तरीकों की पहचान और प्रसार तथा आकांक्षी जिलों और आकांक्षी ब्लॉकों को लक्षित सहायता प्रदान करना शामिल है।
जेआईसीए इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि ताकेउची ताकुरो ने एडीपी और एबीपी के सफल कार्यान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि भारत की जिला और ब्लॉक-स्तरीय निगरानी प्रणालियां वैश्विक स्तर पर उत्कृष्ट हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जापान-भारत साझेदारी को और मजबूत करने वाली यह परियोजना पारस्परिक रूप से लाभकारी और सहयोगात्मक पहल है।
चर्चा के अभिलेख पर हस्ताक्षर भारत-जापान साझेदारी के गहराने को रेखांकित करता है और आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों में संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और साक्ष्य-आधारित शासन के माध्यम से 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।





