गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर आज सदन में चर्चा का जवाब दिया
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोक सभा में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्तुत अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दिया। चर्चा के बाद सदन ने अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनि मत से खारिज कर दिया। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है और लगभग 4 दशक के बाद लोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया है। उन्होंने कहा कि संसदीय राजनीति और सदन के लिए यह एक अफसोसजनक घटना है। अमित शाह ने कहा कि लोक सभा अध्यक्ष किसी दल के नहीं होते बल्कि सदन के होते हैं और सदन के सभी सदस्यों के अधिकारों के संरक्षक होते हैं। उन्होंने कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना कोई साहसिक घटना नहीं है।
अमित शाह ने कहा कि लगभग 13 घंटों तक पक्ष-विपक्ष ने इस पर चर्चा की है और 42 से अधिक सांसदों ने इसमें हिस्सा लिया है। उन्होंने कहा कि आज स्पीकर के निर्णय को अंतिम मानने के विपरीत विपक्ष ने स्पीकर की निष्ठा पर सवालिया निशान खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत है और न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में हमारे लोकतंत्र की एक साख बनी है और पूरी दुनिया इसे स्वीकार करती है। जब इस पंचायत के मुखिया की निष्ठा पर सवालिया निशान लगता है तो सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विपक्षी सदस्य लोक सभा स्पीकर के चैंबर में जाकर उनकी सुरक्षा के प्रति चिंता का माहौल खड़ा करते हैं। उन्होंने कहा कि संविधान ने स्पीकर के पद को पार्टी से ऊपर मध्यस्थ की भूमिका में रखा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मध्यस्थता करने वालों पर ही शंका उठा दी। उन्होंने कहा कि 75 साल से हमारे दोनों सदनों ने हमारे लोकतंत्र की नींव को गहरा किया है और उस नींव की साख पर विपक्ष ने सवालिया निशान लगाया है। अमित शाह ने कहा कि सदन आपसी विश्वास से चलता है और स्पीकर पक्ष और विपक्ष के लिए सदन के कस्टोडियन होते हैं। स्पीकर को लोकसभा कैसे चलानी है, उसके लिए लोकसभा ने कुछ नियम बनाए हैं। उन्होंने कहा कि सदन कोई मेला नहीं है। अगर सदन के नियम अनुमति नहीं देते हैं तो किसी को नियमों के खिलाफ जा कर बोलने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि जब लोकसभा चलाने के नियमों को नज़रअंदाज किया जाता है तो स्पीकर का पवित्र दायित्व है कि वे उसे रोकें-टोकें। यह नियम देश के प्रथम प्रधानमंत्री के समय से चले आ रहे हैं लेकिन मुख्य विपक्षी पार्टी ने कई बार इन नियमों को तोड़ा है। उन्होंने कहा कि स्पीकर के निर्णय और निष्ठा पर शंका नहीं कर सकते और शंका करना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
अमित शाह ने कहा कि हम भी विपक्ष में रहे हैं और उस दौरान तीन बार स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया, लेकिन हमारी पार्टी और गठबंधन ने कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया। उन्होंने कहा कि हमने रचनात्मक विपक्ष के रूप में काम किया है, स्पीकर की गरिमा का संरक्षण करने का काम किया है और स्पीकर से हमारे कानूनी अधिकारों के संरक्षण की मांग भी की है। अमित शाह ने कहा कि हम कभी स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाए।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 1954 में जी वी मावलंकर के खिलाफ सोशलिस्ट पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाई, 1966 में तत्कालीन लोक सभा स्पीकर सरदार हुकुम सिंह जी के खिलाफ संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी अविश्वास प्रस्ताव लाई और 1987 में बलराम जाखड़ के खिलाफ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया अविश्वास प्रस्ताव लाई। उन्होंने कहा कि ये सभी पार्टियाँ कमोबेश आज विपक्षी गठबंधन की सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी का यह बहुत मज़बूत मत है कभी भी स्पीकर की निष्ठा पर आशंका नहीं करनी चाहिए।
अमित शाह ने कहा कि हम सब स्पीकर के महत्व को जानते हैं और लोकसभा के अध्यक्ष विधायी न्यायशास्त्र के सर्वोच्च न्यायाधीश होते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा कार्यवाही के दौरान किए गए फैसले में सर्वोच्च अदालत भी दखल नहीं दे सकती क्योंकि संविधान ने उन्हें यह प्रोटेक्शन दिया है। यह प्रोटेक्शन इसीलिए दिया गया है कि स्पीकर निर्भीक रूप से अपना काम कर सकें। अमित शाह ने कहा कि स्पीकर का प्रथम कर्तव्य व्यवस्था और शिष्टाचार को बनाए रखना और दूसरा कर्तव्य सभी को मौकै देना और न्यायपूर्ण व्यवहार करना है। उन्होंने कहा कि शिष्टाचार है कि लोकसभा सदन चलाने के नियमों के अनुसार चले।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि लोकसभा के नियम 374 में अव्यवस्था, अनुशासनहीनता की स्थिति में स्पीकर को चेतावनी देने, नामित करने, निष्कासित करने और निलंबन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि आंदोलन और एक्टिविस्ट को सदन में सदन के नियमों के अनुसार ही चलना पड़ेगा। अमित शाह ने कहा कि नियम 375 के तहत गंभीर अव्यवस्था की स्थिति में सदन को स्थगित करना होता है। उन्होंने कहा कि नियम 380 के अधीन स्पीकर को असंसदीय शब्दों औऱ टिप्पणियों को कार्यवाही से हटाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि लय में की गई असंसदीय टिप्पणियां संसद के इतिहास में नहीं रखनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आने वाले सासंद भी यही संस्कार लेकर जाएंगे। अमित शाह ने कहा कि असंसदीय शब्दों की सूची सदन के अस्तित्व में आने से लेकर आज तक इस पद पर बैठे अनेक महानुभावों ने बनाई और वह सब पर बाध्यकारी है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को संविधान ने अधिकार दिया है लेकिन कोई विशेषाधिकार नहीं दिया है। अधिकार का संरक्षण कर सकते हैं लेकिन विशेषाधिकार के मुगालते में जीने वालों को उनकी पार्टी और जनता भी संरक्षण नहीं देती है।
अमित शाह ने कहा कि लोक सभा स्पीकर का महत्व सदन, देश औऱ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। उन्होंने कहा कि स्पीकर मात्र पीठासीन अधिकारी नहीं है बल्कि हमारी विधायी चेतना और लोकतंत्र की गरिमा के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जब आप उनकी निष्ठा पर सवाल उठाते हैं तो आप उनकी विधायी चेतना और लोकतंत्र की गरिमा पर भी सवाल उठाते हैं। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री जी को हटाने का प्रस्ताव सदन में आ सकता है, मगर लोकसभा के कस्टोडियन को हटाने के प्रस्ताव को साहसिक घटना नहीं मानना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान ने किसी भी एक्सट्रीम परिस्थिति की कल्पना कर प्रावधान बनाए हैं। उन्होंने कहा कि यह असाधारण परिस्थितियों में स्पीकर को हटाने के लिए किया गया प्रावधान है न कि रोजमर्रा की चीज है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि अनुच्छेद 96 के तहत अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव जब विचाराधीन हो, तब संबंधित पीठासीन अधिकारी सदन की अध्यक्षता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जब मुख्य विपक्षी पार्टी सत्ता में थी तब तीन बार अविश्वास प्रस्ताव आए और तीनों बार ये परंपरा रही कि जब स्पीकर पर अविश्वास की प्रस्ताव की चर्चा होगी, तब लोक सभा अध्ययक्ष अपना आसन ग्रहण नहीं करेंगे, लेकिन तीनों बार 14 दिन तक सबने अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि ओम बिरला एकमात्र स्पीकर हैं जिन्होंने नैतिक आधार पर अध्यक्षता नहीं की। उन्होंने कहा कि नियम 94-सी के तहत लोक सभा अध्यक्ष को केवल असाधारण और गंभीर परिस्थितियों में हटाया जा सकता है। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री जी को हटाना है तो साधारण बहुमत चाहिए, लेकिन स्पीकर को हटाने के लिए इफेक्टिव मेजॉरिटी की जरूरत होती है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सदन किसी पार्टी विशेष के नियम से नहीं बल्कि लोकसभा के नियमों से ही चलेगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष हाई मोरल ग्राउंड की बात करता है, लेकिन हाई मोरल ग्राउंड ये है कि दो बार अविश्वास प्रस्ताव नियम के अनुसार नहीं होने के बावजूद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी ने विपक्ष को मौका देकर नोटिस में सुधार का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष नियम को मानता नहीं है और फिर कहता है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा। अमित शाह ने कहा कि नियमों का पालन करते हुए और कार्य मंत्रणा समिति की सहमति से जो प्रस्ताव लाया गया, विपक्ष ने उस पर चर्चा करने की जगह सदन में हंगामा करने का काम किया, इससे ज्यादा शर्मनाक घटना कोई नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान विपक्ष के नेताओं के 80% से ज्यादा भाषण स्पीकर के अविश्वास प्रस्ताव पर नहीं थे।
अमित शाह ने कहा कि विपक्ष का कहना है कि लोक सभा में उपाध्यक्ष नियुक्त नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि 1966 और उसके बाद लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बलराम जाखड़ लोकसभा अध्यक्ष थे। दोनों प्रस्ताव के समय लोकसभा में उपाध्यक्ष थे, पद खाली नहीं था, मगर तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी ने अपने ही नेता को डेप्युटी स्पीकर बना रखा था। इसलिए विपक्षी पार्टी को डेप्युटी स्पीकर का पद खाली होने पर कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि 16वीं लोकसभा में 331 बैठकें हुईं, 17वीं लोकसभा में 274 और मौजूदा लोकसभा में 2025 तक 103 बैठकें हुईं। वर्ष 2025 का बजट सत्र 118% उत्पादकता वाला रहा। उन्होंने कहा कि 16वीं लोकसभा की उत्पादकता 91%, 17वीं की उत्पादकता 91% और 18वीं की उत्पादकता 91% रही और इनमें अधिकतम उत्पादकता मौजूदा स्पीकर ओम बिरला जी के कार्यकाल में ही हुई है। अध्यक्ष जी ने शून्य काल की अवधि को 5 घंटे तक पहुंचाया है। अमित शाह ने कहा कि विधायक और सांसद रहते हुए उन्हें 30 साल हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी नहीं देखा कि स्पीकर ने सदस्यों को रात 12:00 बजे तक शून्य काल के मुद्दे उठाने का मौका दिया हो। उन्होंने 202 सांसदों को प्रश्न उठाने का मौका दिया और विपक्ष कहता है कि उन्हें मुद्दे उठाने का मौका नहीं मिलता।
अमित शाह ने कहा कि नई आवाजों को प्रोत्साहित करना भी लोकसभा स्पीकर का नैतिक दायित्व होता है। उन्होंने कहा कि 2019 में रिकॉर्ड 78 महिलाएं संसद में चुनकर आई और 41 महिलाएं पहली बार सांसद बनीं। स्पीकर ने पहली बार सासंद बनी सभी महिला सांसदों को विशेष बोलने का अवसर दिया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी के प्रयास से सदन में क्षेत्रीय भाषाओं का उपयोग भी बढ़ा है, जो बहुत बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि पहली बार सदन में अनुवादकों का पैनल पूरा हुआ है। डिजिटल संसद 2.0 पर लगभग 8000 घंटे की ऑडियो विजुअल रिकॉर्डिंग को डिजिटल किया गया है। आज अगर युवाओं को संसद सदस्यों के भाषण और सदन की चर्चाएं सुननी है, तो वह डिजिटली उपलब्ध है। अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन के जरिए हम पूरी लोकसभा को पेपरलेस बनाने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं।
गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रमंडल देशों के पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी के संबोधन की राष्ट्रमंडल देशों की सभी संसदों के स्पीकर्स ने भूरी-भूरी प्रशंसा की, जिससे हमारी संसद की गरिमा बढ़ी। ओम बिरला जी ने ही सांसदों को बिल पर प्री-सेशन ब्रीफिंग करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि बिरला जी के कार्यकाल में सबसे बड़ी बात यह हुई कि हम अंग्रेजों के जमाने में बनी हुई संसद से निकल कर आजाद भारत में बनी संसद में आए। बिरला जी ने यह सारे कार्य सर्वसम्मति से किए।
अमित शाह ने कहा कि पूरे देश में हमारी पार्टी की छवि खंडित करने का दुष्प्रचार चल रहा है। ऐसा प्रयास करने वालों को वे कहना चाहते हैं कि इससे हमारी पार्टी की छवि खंडित नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कौन सदन में क्या बोलेगा, कितना बोलेगा, कब बोलेगा, क्यों बोलेगा, सत्ताधारी पार्टी यह निर्णय नहीं कर सकती। अमित शाह ने कहा कि हमने कभी विपक्ष की आवाज दबाने का काम नहीं किया, लेकिन मेरी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष की आवाज दबाने का काम 1975 में हुआ था, जब पूरा विपक्ष जेल में बंद कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि नियमों के अनुसार सदन चलाने का दायित्व स्पीकर का है। लोकसभा के नियम 349 से तय होता है कि सदन में सदस्य का समग्र आचरण कैसा हो। गृह मंत्री ने कहा कि 17वीं लोकसभा में विपक्षी पार्टी को 157 घंटे और 55 मिनट का समय दिया गया, जबकि उनके 52 सदस्य थे। इसकी तुलना में हमारी पार्टी को 349 घंटे और 8 मिनट दिए गए, जबकि हमारी सदस्य संख्या उनसे कहीं ज्यादा 303 थी। अमित शाह ने कहा कि अगर डाटा देखें तो लोकसभा स्पीकर ने विपक्षी पार्टी को सत्ताधारी पार्टी से अधिक समय देने का काम किया।
अमित शाह ने कहा कि 18वीं लोकसभा में मुख्य विपक्षी पार्टी द्वारा कल तक 71 घंटे बोला गया, जबकि उनके पास 99 सदस्य हैं और सत्ताधारी पार्टी को 122 घंटे मिले हैं जबकि हमारे 239 सदस्य हैं। एक प्रकार से 18वीं लोकसभा में भी विपक्षी पार्टी को सत्ताधारी पार्टी से दो गुना समय मिला। लेकिन फिर भी विपक्ष के नेता को शिकायत है कि उन्हें बोलने नहीं दिया जाता और उनकी आवाज दबा दी जाती है। अमित शाह ने कहा कि जब विपक्ष के नेता का बोलने का मौका आता है, तब वे विदेश दौरे पर होते हैं।
अमित शाह ने कहा कि जब विपक्ष के नेता के बोलने का समय आता है तो वे कभी जर्मनी, वियतनाम, इंग्लैंड, मलेशिया और कभी सिंगापुर में होते हैं और फिर शिकायत करते हैं। उन्होंने कहा कि वे विपक्ष के नेता से पूछना चाहते हैं कि जब उनके बोलने की बारी आई तो वे क्यों नहीं बोले, क्या स्पीकर ने उन्हे रोका था? अमित शाह ने कहा कि लोकसभा को बदनाम करने के लिए कुप्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 18वीं लोकसभा में विपक्ष को बोलने के लिए 71 घंटे का समय दिया गया, लेकिन इसमें विपक्ष के नेता कितनी देर बोले? अमित शाह ने कहा कि लोकसभा स्पीकर के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर भी विपक्ष के नेता ने कुछ नहीं बोला, तो फिर वे प्रस्ताव लाए ही क्यों? उन्होंने कहा कि यह बात सही नहीं कि विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जाता, बल्कि सच यह है कि वे बोलना ही नहीं चाहते। अगर बोलना चाहते हैं, तो उन्हें नियम अनुसार बोलना नहीं आता। अमित शाह ने कहा कि यह कोई जनसभा नहीं है, हर सदस्य को लोकसभा के नियमों के अनुसार बोलना होता है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष द्वारा कहा गया कि विपक्ष के नेता को लगभग 40 बार बोलने से रोका गया। उन्होंने कहा कि जब लोकसभा स्पीकर द्वारा रोके जाने के बावजूद विपक्ष के नेता वही विषय दोहराते हैं, तो स्पीकर के पास और कोई विकल्प नहीं रहता। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री जी ने स्पष्ट कर दिया था कि कोई सदस्य किसी अप्रकाशित पुस्तक या किसी मैगजीन को सदन में कोट नहीं कर सकता। लेकिन जब कोई उसी विषय पर बोलता रहेगा तो उसे अगर आप उसी विषय पर बोलते रहेंगे, तो आपको टोकना पड़ेगा। SIR पर चर्चा के दौरान भी विपक्ष के नेता ने वक्ताओं के क्रम को तोड़ा। उन्होंने कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी के नेता की झूठ से भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सदन में बहस की अनुमति न देकर ओम बिरला जी ने दशकों पुरानी संसदीय परंपरा का पालन किया।
अमित शाह ने कहा कि 17वीं लोकसभा में विपक्ष को 40% समय दिया गया, जबकि प्रो रेटा से उनका हिस्सा 3% था। मोशन ऑफ थैंक्स में विपक्ष को 34% समय दिया और 18वीं लोकसभा में 55% समय दिया गया। फिर भी कोई कैसे यह कह सकता है कि उन्हें बोलने नहीं देते। अमित शाह ने कहा कि बोलने का अधिकार दल के नेता का है, जब नेता स्वयं बोलना नहीं चाहते, तो कोई क्या कर सकता है? उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में भी बोल सकते थे, लेकिन बोलना नियम के हिसाब से ही पड़ता। किसी को नियम तोड़कर बोलने की अनुमति नहीं है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि 17वीं लोकसभा में विपक्ष के नेता की उपस्थिति 51% रही, जबकि राष्ट्रीय औसत 79% था। 16वीं लोकसभा में 52%, जबकि राष्ट्रीय औसत 80% था। 15वीं लोकसभा में 43%, जबकि राष्ट्रीय औसत 76% था। उन्होंने कहा कि यह सब ऑन रिकॉर्ड है। अमित शाह ने कहा कि 16वीं लोकसभा में विपक्ष के नेता ने राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर एक बार भी हिस्सा नहीं लिया। बजट चर्चा में एक भी बार हिस्सा नहीं लिया। सरकारी विधेयकों पर चर्चा में भी हिस्सा नहीं लिया। 2018, 2019, 2020 और 2021 में राष्ट्रपति अभिभाषण पर हिस्सा नहीं लिया। एक बिल छोड़कर विदेश नीति चर्चा में भी भाग नहीं लिया। कई महत्वपूर्ण विधेयक जैसे-भूमि अधिग्रहण, 122वाँ संविधान संशोधन, आधार विधेयक, तीन तलाक विधेयक, जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन, अनुच्छेद 370, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), भारतीय न्याय संहिता, टैक्स सुधार, वित्त विधेयक 2024, वक्फ संशोधन बिल, वंदे मातरम के 150 वर्ष, कैप्टन शुभांशु शुक्ला के अभिनंदन प्रस्ताव —इनमें से किसी में विपक्ष के नेता ने हिस्सा नहीं लिया।
अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के नेता अपनी पार्टी के बड़े नेता हैं, हो सकता है कि पार्टी प्रचार के लिए उन्हें कहीं जाना रहा हो और सार्वजनिक जीवन में यह स्वाभाविक है। कई बार लोकसभा चल रही होती है और पार्टी के बड़े कार्यक्रम होते हैं। चुनाव होते हैं, तो वरिष्ठ नेताओं को प्रचार के लिए जाना पड़ता है। इसमें क्या गलत है? लेकिन सवाल यह है कि जब सदन में नहीं थे, तो कहाँ थे? शीतकालीन सत्र 2017 में जर्मनी यात्रा पर, बजट सत्र 2025 में वियतनाम दौरे पर और बजट सत्र 2023 के समय इंग्लैंड में थे। बजट सत्र 2018 के दौरान सिंगापुर और मलेशिया में, मॉनसून सत्र 2020 में विदेश यात्रा पर थे। बजट सत्र 2015 में कुल मिलाकर 60 दिन विदेश यात्रा में रहे। उन्होंने कहा कि यह एक भयंकर संयोग है कि जब-जब बजट सत्र या महत्वपूर्ण सत्र आता है, उनकी विदेश यात्रा हो जाती है। फिर विपक्ष के नेता कहते हैं कि उन्हें बोलने नहीं देते। अमित शाह ने कहा कि कोई विदेश में रह कर सदन में कैसे बोल सकता है? सदन में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधन का प्रावधान नहीं है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जब विपक्ष लोकसभा स्पीकर के कंडक्ट पर सवाल खड़ा कर रहा है, तो कंडक्ट सिर्फ स्पीकर का नहीं देखा जाता। सदन में पक्ष, प्रतिपक्ष, स्पीकर और राष्ट्रपति महोदय, सब मिलकर सदन चलाते हैं। विपक्ष अपने कंडक्ट पर भी तो कभी बात करे। उन्होंने कहा कि ट्रेजरी बेंच में प्रधानमंत्री बैठते हैं, दौड़कर उनके गले लग जाना—ऐसा कभी नहीं हुआ। फ्लाइंग किस करना, आँख मटकाना—ऐसा सदन में कभी नहीं हुआ।
अमित शाह ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चीन की स्थिति मजबूत होने के पीछे भी देश के पहले प्रधानमंत्री की नीतियाँ जिम्मेदार रही हैं। राजीव गांधी फाउंडेशन ने चीन से धन लिया, जिसके कारण उसका FCRA पंजीकरण रद्द करना पड़ा, यह सभी देशवासियों को जानना चाहिए। अक्साई चीन का 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और नेफा का बड़ा हिस्सा 1962 में चीन ने कब्जा लिया था, और यह मुख्य विपक्षी पार्टी के शासनकाल में हुआ।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आसन से आग्रह किया कि लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को बहुमत के साथ खारिज कर दिया जाए और स्पीकर पद की गरिमा को बरकरार रखा जाए।





