लोकसभा ने आज वर्ष 2025-26 के लिए पूरक अनुदानों को मंजूरी दे दी है। इसके अंतर्गत सरकार ने 2 लाख 81 हजार करोड़ रुपये से अधिक के सकल अतिरिक्त व्यय की मांग की थी। अतिरिक्त खर्च की मंजूरी मुख्य रूप से उर्वरक, खाद्य सब्सिडी और रक्षा सेवाओं पर बढ़े हुए खर्च को पूरा करने के लिए मांगी गई थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने आज सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि पूरक अनुदान में 61 मांगें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने समग्र व्यापक आर्थिक ढांचे को मजबूत किया है, जिससे देश राजकोषीय सुदृढ़ीकरण के रास्ते से भटके बिना आर्थिक झटकों को झेलने में सक्षम हुआ है।
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए आर्थिक स्थिरीकरण कोष के रूप में 57 हजार 381 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए हैं। हालांकि, इस कोष का कुल परिव्यय एक लाख करोड़ रुपये है और पूरक अनुदानों के अतिरिक्त, अन्य मंत्रालयों और विभागों की बचत के माध्यम से इस कोष में 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि जोड़ी जाएगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि अनुदान के लिए पूरक मांग में रक्षा सेवाओं के लिए 41 हजार 430 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना (ई.सी.एच.एस.) के लिए 6 हजार एक सौ 40 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्यों के स्थानीय निकायों को 37 हजार 886 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। उर्वरक सब्सिडी के लिए 19 हजार 230 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। विकसित भारत जी-राम-जी योजना के लिए 30 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त आवंटन किया गया है। यह पहली अप्रैल से लागू होगा।
वित्त मंत्री ने वैश्विक संकट के बीच सभी दल के नेताओं से दलगत भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के नागरिकों को किसी भी प्रकार की कठिनाई से बचाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।
लोकसभा ने आज विनियोग विधेयक, 2026 को भी पारित कर दिया। यह विधेयक वित्तीय वर्ष 2025-26 की सेवाओं के लिए भारत की संचित निधि से कुछ अतिरिक्त राशियों के भुगतान और विनियोजन को अधिकृत करता है। इसके बाद सदन की कार्यवाही सोमवार को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।





