ग्रामीण पेयजल शासन को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 के तहत राजस्थान और मध्य प्रदेश राज्यों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह मिशन के विस्तारित चरण के तहत सुधार-आधारित कार्यान्वयन की औपचारिक शुरुआत है, जिसे केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 10 मार्च 2026 को मंजूरी दी गई थी।
राजस्थान राज्य के साथ एमओयू पर पूर्वान्ह केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमन्ना की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। इस समारोह में राजस्थान के पीएचईडी मंत्री कन्हैया लाल चौधरी के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
मध्य प्रदेश राज्य के साथ एमओयू पर दोपहर 3:00 बजे केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए, जो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से इस कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर जल शक्ति मंत्रालय के राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और मध्य प्रदेश की पीएचईडी मंत्री संपतिया उइके के साथ राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
एमओयू पर हस्ताक्षर के दौरान पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्लूएस) के वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें अशोक के. के. मीणा, सचिव, डीडीडब्लूएस, कमल किशोर सोण, अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक, एनजेजेएम के साथ-साथ डीडीडब्लूएस, राजस्थान पीएचईडी और मध्य प्रदेश जल निगम के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
राजस्थान के लिए एमओयू पर स्वाति मीणा नायक, संयुक्त सचिव (जल), डीडीडब्लूएस और अखिल अरोड़ा, अतिरिक्त मुख्य सचिव, पीएचईडी राजस्थान के बीच हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किया गया।
मध्य प्रदेश के लिए, इस पर स्वाति मीणा नायक, संयुक्त सचिव (जल), डीडीडब्लूएस, और पी. नरहरि, प्रमुख सचिव, पीएचईडी मध्य प्रदेश के बीच हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने हालिया संसदीय चर्चाओं का हवाला देते हुए दोहराया कि केंद्र सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो-टोलरेंस की नीति अपनाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जल जीवन मिशन के तहत किए जाने वाले सभी कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही मार्गदर्शक होनी चाहिए। उन्होंने दोनों राज्यों से गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया ताकि बनाई गई संपत्तियां लंबे समय तक कार्यात्मक और टिकाऊ बनी रहें।
राज्यों में जल प्रबंधन की विभिन्न चुनौतियों, जिनमें राजस्थान में पानी की कमी और मध्य प्रदेश की विविध भू-जल-वैज्ञानिक स्थितियां शामिल हैं, पर प्रकाश डालते हुए सी. आर. पाटिल ने अपने संबोधन में सुधार-आधारित एमओयू पर हस्ताक्षर करने के लिए दोनों राज्यों के सक्रिय नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह जनता के लिए पेयजल के महत्व और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति राज्य सरकारों की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
संबोधित करते हुए, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत प्रभावी कार्यान्वयन से महिलाओं और लड़कियों की कठिनाइयाँ काफी कम होंगी, विशेष रूप से राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे जल-तनावग्रस्त और ग्रामीण क्षेत्रों में, साथ ही सभी के लिए विश्वसनीय और सुरक्षित पेयजल सेवाएं सुनिश्चित होंगी।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने जल जीवन मिशन के प्रभावी कार्यान्वयन के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता व्यक्त की और आश्वासन दिया कि राजस्थान, राष्ट्रीय सुधार ढांचे के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण कार्यों, संस्थागत मजबूती और ग्रामीण पेयजल प्रणालियों की दीर्घकालिक स्थिरता पर ध्यान केंद्रित करते हुए, समयबद्ध निष्पादन और जेजेएम 2.0 के तहत परिकल्पित संरचनात्मक सुधारों के कड़ाई से पालन के माध्यम से भरोसे को कायम रखेगा।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत राष्ट्रीय सुधार एजेंडे के साथ तालमेल बिठाने और संरचनात्मक सुधारों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश सुधार-आधारित एमओयू में उल्लिखित शर्तों का पालन करेगा, जिसमें मजबूत शासन प्रणाली, बेहतर सेवा वितरण तंत्र, 24×7 पेयजल आपूर्ति की आकांक्षा को प्राप्त करने और ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजनाओं की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने को प्राथमिकता दी जाएगी।
यह एमओयू 11 प्रमुख संरचनात्मक सुधार क्षेत्रों के कार्यान्वयन को कवर करता है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण पेयजल प्रणालियों के शासन, संस्थागत क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता को मजबूत करना है, जिनमें शामिल हैं:
· पेयजल शासन के लिए संस्थागत संरचना
· ग्रामीण जलापूर्ति के लिए सेवा उपयोगिता फ्रेमवर्क
· तकनीकी अनुपालन और कुशल योजना कार्यान्वयन
· नागरिक-केंद्रित जल गुणवत्ता शासन
· स्रोत स्थिरता और जल सुरक्षा ढांचा
· ग्रामीण पेयजल प्रणालियों में डिजिटल डेटा गवर्नेंस
· जन भागीदारी के माध्यम से सहभागी शासन
· क्षमता निर्माण ढांचा
· मानव संसाधन और कौशल पारिस्थितिकी तंत्र
· जलापूर्ति योजनाओं की परिचालन और वित्तीय स्थिरता
· अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान पारिस्थितिकी तंत्र
यह सुधार-आधारित एमओयू ग्रामीण जल शासन के एक ग्राम पंचायत-नेतृत्व वाले, सेवा-आधारित और समुदाय-केंद्रित मॉडल को अनिवार्य बनाता है। एमओयू की एक प्रमुख शर्त के रूप में, पूर्ण हो चुकी पाइप जलापूर्ति योजनाओं को “जल अर्पण” प्रक्रिया के माध्यम से औपचारिक रूप से ग्राम पंचायतों/वीडब्लूएससी और समुदाय को सौंपा जाएगा।
एमओयू में डीडीडब्लूएस द्वारा विकसित डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) प्लेटफॉर्म को जिला और ग्राम पंचायत स्तर पर स्रोत स्थिरता के लिए एक डिजिटल नियोजन मंच के रूप में संचालित करने का भी प्रावधान है, जिसे सुजलम भारत और राष्ट्रीय जल डेटासेट के साथ एकीकृत किया गया है।
एमओयू की शर्तों के अंग के रूप में, सेवा वितरण की प्रतिक्रियाओं को दर्ज करने और मेरी पंचायत एप्लिकेशन के माध्यम से नागरिकों को परिणाम प्रदर्शित करने के लिए जीपी स्तर पर जल सेवा आकलन किया जाएगा। एमओयू में जल उत्सव मनाने का भी प्रावधान है, जो एक त्रि-स्तरीय वार्षिक अभियान है। इसमें पानी के स्थानीय सांस्कृतिक महत्व को आत्मसात करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर जल महोत्सव, राज्य स्तर पर राज्य जल उत्सव/नदी उत्सव और ग्राम पंचायत स्तर पर लोक जल उत्सव शामिल हैं। इस पहल के हिस्से के रूप में राष्ट्रीय जल महोत्सव 2026 का शुभारंभ 8 मार्च 2026 को देशव्यापी जल अर्पण के साथ किया गया था और इसका समापन 22 मार्च 2026 (विश्व जल दिवस) को होगा। 11 मार्च 2026 को आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम में भारत की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुई थीं।
बढ़े हुए परिव्यय के साथ दिसंबर 2028 तक जल जीवन मिशन के विस्तार का उद्देश्य कार्यक्रम को पुनर्गठित करना और इसे कार्यक्षमता, जल गुणवत्ता, स्थिरता और सामुदायिक स्वामित्व पर ध्यान केंद्रित करते हुए ‘निश्चित सेवा वितरण’ की ओर उन्मुख करना है।
सुधार-आधारित एमओयू का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक ग्रामीण घर में नियमित आधार पर पर्याप्त मात्रा और निर्धारित गुणवत्ता की पेयजल आपूर्ति सुलभ हो। इसे मजबूत समुदायों की भागीदारी (जन भागीदारी) के माध्यम से और ग्रामीण जलापूर्ति प्रणालियों के स्थायी संचालन और रखरखाव के लिए संरचनात्मक सुधार लाकर प्राप्त किया जाएगा, जिससे ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार होगा और ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप दीर्घकालिक जल सुरक्षा में योगदान मिलेगा।





