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Vice President C.P. Radhakrishnan addressed the first convocation ceremony of the Ratan Tata Maharashtra State Skill University.
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उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज मुंबई स्थित रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और स्नातक छात्रों को कौशल विकास, रोज़गार-योग्यता तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी के महत्व के बारे में संबोधित किया।

सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह दीक्षांत समारोह न केवल शैक्षणिक उपलब्धि का उत्सव है, बल्कि कुशल मानव पूंजी का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है। उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के पहले बैच का हिस्सा बनाकर उन्होंने इतिहास रच दिया है।

महाराष्ट्र और अन्य राज्यों के राज्यपाल के रूप में अपने पिछले कार्यकाल को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को आधुनिक चुनौतियों का सामना करने और शिक्षा को उद्योग की ज़रूरतों के अनुरूप बनाने के लिए अपने पाठ्यक्रम को लगातार अपडेट करते रहना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि डिग्रियाँ तभी सार्थक होती हैं, जब वे रोज़गार के अवसर प्रदान करें। साथ ही उन्होंने कौशल विकास और नई-युग की प्रौद्योगिकी पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने कौशल विकास और मानव पूंजी के विकास के प्रति अपने दृष्टिकोण में एक परिवर्तनकारी बदलाव देखा है। उन्होंने ‘स्किल इंडिया’, ‘पीएम-सेतु ‘, ‘डिजिटल हब’, कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की स्थापना और व्यावसायिक प्रशिक्षण में सुधार जैसी प्रमुख पहलकदमियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन प्रयासों ने भविष्य के लिए भारत की युवा पीढ़ी को तैयार करने के तरीके को पुनर्परिभाषित किया है।

उपराष्ट्रपति ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दृष्टिकोण की भी सराहना की और कहा कि अब यह राज्य दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है।

भारत के जनसांख्यिकीय लाभ के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि भारत की युवा आबादी अगर सही ढंग से कुशल हो, तो एक बड़ी ताकत बन सकती है; लेकिन अगर उन्हें सही कौशल से लैस न किया जाए, तो यह एक चुनौती भी बन सकती है। उन्होंने स्नातकों से आग्रह किया कि वे जहाँ भी काम करें, भारत की प्रतिभा और क्षमता के दूत के रूप में कार्य करें। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि उनका समर्पण और पेशेवर रवैया विश्व में भारत की विश्वसनीयता को बढ़ाएगा।

रतन टाटा की विरासत का ज़िक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विश्वविद्यालय की यह ज़िम्मेदारी है कि वह शिक्षा और रोज़गार के बीच के अंतर को पाटे, और साथ ही सामाजिक रूप से ज़िम्मेदार व्यक्तियों का निर्माण करे। उन्होंने कहा कि उद्योग को सामाजिक ज़िम्मेदारी की भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि इसी से महान नेता देश के लिए आदर्श बन पाते हैं।

उपराष्ट्रपति ने “नशे को छोड़ें” (से नो टू ड्रग्स) अभियान भी शुरू किया और कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व पहल के तहत उद्योग भागीदारों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का दौरा किया।

दीक्षांत समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, महाराष्ट्र सरकार में कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा, वरिष्ठ अधिकारी, संकाय सदस्य, अभिभावक और विद्यार्थी उपस्थित थे।

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