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MoUs Signed with Andhra Pradesh and Odisha for Reforms under Jal Jeevan Mission 2.0
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जल जीवन मिशन 2.0 के तहत आंध्र प्रदेश और ओडिशा के साथ सुधार से जुड़े समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर

जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत सुधार से जुड़े कार्यान्वयन के देशव्यापी विस्तार को जारी रखते हुए, आंध्र प्रदेश और ओडिशा राज्यों ने आज केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत निरंतर, पारदर्शी और समुदाय-आधारित ग्रामीण पेयजल सेवा वितरण के लिए एक संरचित सुधार ढांचे के प्रति प्रतिबद्धता जताई गई।

आंध्र प्रदेश के साथ एमओयू पर जल शक्ति मंत्रालय के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (डीडीडब्‍ल्‍यूएस) में आयोजित बैठक में केन्‍द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री एवं पंचायत राज, ग्रामीण विकास, पर्यावरण, वन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री के. पवन कल्याण ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस कार्यक्रम में वर्चुअल रूप से भाग लिया।

आंध्र प्रदेश के लिए समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर पेयजल और स्‍वच्‍छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) में संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीना नाइक और आंध्र प्रदेश सरकार के विशेष मुख्य सचिव शशि भूषण कुमार ने हस्ताक्षर किए और उनका आदान-प्रदान किया।

केन्‍द्र-राज्य सहयोग में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, ओडिशा राज्य के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर आज दोपहर 12:30 बजे औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए गए। यह कार्यक्रम ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, ओडिशा सरकार के ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल मंत्री रबी नारायण नाइक, मुख्य सचिव अनु गर्ग, विकास आयुक्त और अपर मुख्य सचिव देओरंजन कुमार सिंह, वित्त सचिव संजीव कुमार मिश्रा तथा राज्य के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की वर्चुअल उपस्थिति में आयोजित हुआ।

समझौता ज्ञापन पर डीडीडब्ल्यूएस की संयुक्त सचिव (जल) स्वाति मीना नाइक, और पीआर एवं डीडब्ल्यू विभाग के आयुक्त और सचिव गिरिश एस.एन के बीच हस्ताक्षर किए गए, तथा ओडिशा के रेजीडेंट कमीश्‍नर विशाल गगन द्वारा इसका आदान-प्रदान किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए, केन्‍द्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों ग्रामीण परिवारों को पहले ही नल से जल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं, वहीं जे.जे.एम. 2.0 के अंतर्गत ध्यान मौजूदा अवसंरचना की कमियों को दूर करने, शेष परिवारों को कवर करने तथा निरंतर और विश्वसनीय जल आपूर्ति प्रणालियों को सुनिश्चित करने पर है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूर्ण हो चुकी योजनाओं के उचित दस्तावेज़ीकरण के साथ समुदायों को औपचारिक हस्तांतरण किया जाए और प्रभावी संचालन एवं रखरखाव सुनिश्चित करने के लिए समुदाय-आधारित जल प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत किया जाए। उन्होंने महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण के प्रशिक्षण से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया और उल्लेख किया कि इस मिशन ने पहले ही लगभग 9 करोड़ महिलाओं को पानी लाने के बोझ से मुक्त किया है, जो एक महत्वपूर्ण सामाजिक परिवर्तन है। राज्य के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और विकसित भारत 2047 के विजन में योगदान देने के लिए अच्छी स्थिति में है। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा जल उपयोग दक्षता पर दिए गए जोर का भी उल्लेख किया, जिसमें पाइपलाइन आधारित आपूर्ति के माध्यम से कृषि के लिए पायलट पहल और ड्रिप सिंचाई को बढ़ावा देना शामिल है। उन्होंने ‘जल संचय से जन भागीदारी’ के माध्यम से जल संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता को प्रोत्साहित करते हुए स्रोत की स्थिरता पर भी बल दिया। साथ ही, उन्होंने राज्य से आग्रह किया कि जिला कलेक्टरों और अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित कर कार्यान्वयन में तेजी लाई जाए और निधियों का समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए, तथा मिशन के सफल क्रियान्वयन के लिए सरकार की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू ने उपमुख्यमंत्री के साथ मिलकर जल जीवन मिशन 2.0 के प्रभावी कार्यान्वयन के प्रति राज्य सरकार की मजबूत प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रधानमंत्री द्वारा मिशन की समय-सीमा बढ़ाने के लिए आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस निर्णय से राज्य को प्रत्येक घर तक नल जल कनेक्शन पहुंचाने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ने में मदद मिली है। मिशन को प्रत्येक घर को सुरक्षित और संरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने वाली एक समग्र पहल बताते हुए, राज्य के नेतृत्व ने इसके जन स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव को उजागर किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि आंध्र प्रदेश अब कार्यान्वयन में तेजी लाने और निर्धारित समयसीमा के भीतर मिशन को पूरा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। विश्वसनीय, निरंतर और सुनिश्चित पेयजल सेवाओं पर ध्यान केन्‍द्रित करते हुए, जिसमें सेवा वितरण, स्थिरता और सामुदायिक सहभागिता पर जोर है, उन्होंने शेष कमियों को दूर करने के लिए सरकार से निरंतर सहयोग का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक घर तक नल जल पहुंचाना राज्य की शीर्ष विकास प्राथमिकताओं में से एक है और उन्होंने केन्‍द्र सरकार के नेतृत्व को आंध्र प्रदेश आकर प्रगति देखने तथा आगामी पेयजल और सिंचाई परियोजनाओं, विशेषकर गोदावरी पुष्करालु से पहले प्रस्तावित परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए आमंत्रित किया।

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि केन्‍द्र सरकार और ओडिशा सरकार के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर ‘हर घर जल’ के लक्ष्य को प्राप्त करने और ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत मिशन के विस्तार में सरकार के निरंतर सहयोग की सराहना की, जिसमें सार्वभौमिक कवरेज और निरंतर सेवा वितरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य, सामुदायिक सहभागिता, वित्तीय स्थिरता, संचालन एवं रखरखाव तथा प्रभावी निगरानी पर जोर देते हुए, एक व्यापक ओ एंड एम नीति और समन्वित कार्यान्वयन प्रयासों के साथ जेजेएम 2.0 को लागू कर रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि परिसंपत्तियों के सुदृढ़ीकरण और डिजिटल एकीकरण के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, जिसके तहत जल आपूर्ति परिसंपत्तियों को ‘सुजल भारत’ प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत किया जा रहा है और बेहतर निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ‘सुजल ग्राम आईडी’ आवंटित की गई हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य ‘बसुधा’ हेल्पलाइन और व्हाट्सऐप इंटरफेस के माध्यम से नागरिक-केन्‍द्रित सेवाओं को मजबूत कर रहा है तथा ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के माध्यम से जन भागीदारी को बढ़ावा दे रहा है।

केन्‍द्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने जल आपूर्ति योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल प्रणालियों को सुदृढ़ करने, जल शक्ति अभियान के तहत विशेष रूप से जल संरक्षण और जल संरचनाओं के पुनर्जीवन में हासिल की गई उल्लेखनीय प्रगति तथा हेल्पलाइन, शिकायत निवारण तंत्र और सशक्त ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों जैसी नागरिक-केन्‍द्रित पहलों के लिए ओडिशा की सराहना की, जो जन भागीदारी को बढ़ावा देती हैं।

यह सुधार-आधारित समझौता ज्ञापन सुनिश्चित करने का प्रयास करता है कि प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित रूप से निर्धारित गुणवत्ता के साथ पर्याप्त मात्रा में पेयजल उपलब्ध हो। इसके लिए समुदाय की भागीदारी (जन भागीदारी) को मजबूत किया जाएगा और ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के निरंतर संचालन एवं रखरखाव के लिए संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे। इससे ग्रामीण समुदायों के जीवन स्तर में सुधार होगा और दीर्घकालिक जल सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, जो विकसित भारत @2047 की राष्ट्रीय कल्‍पना के अनुरूप है।

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