संसद के विस्तारित बजट अधिवेशन का तीन दिन का विशेष सत्र आज से शुरू हो रहा है। यह सत्र 18 अप्रैल तक चलेगा। इसमें मुख्य रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संवैधानिक संशोधनों पर चर्चा की जाएगी। वर्ष 2023 में पारित इस विधेयक को लागू करने के लिए सरकार तीन संशोधन विधेयक पेश करेगी। ये हैं – संविधान (एक सौ इकतीसवाँ संशोधन) विधेयक, 2026, संघ राज्य क्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026
यह विशेष बैठक संविधान में संशोधन करने के लिए बुलाई गई है ताकि परिसीमन परिक्रिया पूरी होने के बाद 2029 के लोकसभा चुनावों में महिला आरक्षण अधिनियम को लागू किया जा सके। कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा और राज्यसभा के सदन के नेताओं को पत्र लिखकर सभी पार्टियों से इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने का आग्रह किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर बल दिया कि यह बेहद जरूरी है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराया जाए। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी यह आश्वासन दिया कि महिला आरक्षण विधेयक संतुलित है और यह हर राज्य, समुदाय और क्षेत्र की आकांक्षाओं का ध्यान रखता है।
यह सिर्फ सरकार का बिल नहीं है। यह सब पॉलिटिकल पार्टी और एक तरीके से पूरे देश का बिल है। सब मिलकर के एक आवाज और एक मत से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पारित करेंगे।
भाजपा, जेडीयू, लोक जन-शक्ति पार्टी (आर) और कांग्रेस सहित कई राजनीतिक पार्टियों ने दोनों सदनों के अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। जिसमें उन्हें सदन की कार्यवाही के दौरान मौजूद रहने और अपनी पार्टी के रुख का समर्थन करने का निर्देश दिया गया है।
इस बीच, कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि विपक्षी दल महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं।
हम सभी महिला आरक्षण विधेयक के पक्ष में हैं, लेकिन जिस तरीके से इसे लाया गया है, उस पर हमें आपत्ति है और यह राजनीतिक रूप से प्रेरित है। विपक्षी दलों की आवाज़ दबाने के लिए सरकार ऐसा कर रही है। इसलिए, हम सभी ने फैसला किया है कि हम लगातार महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते रहेंगे।





