NHRC ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में ईंट भट्टों में कथित बंधुआ मजदूरी के 216 मामलों की ऑनलाइन सुनवाई की
भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में ईंट भट्टों में कथित बंधुआ मजदूरी के 216 मामलों की ऑनलाइन सुनवाई की। एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने महासचिव भरत लाल, रजिस्ट्रार (कानून) जोगिंदर सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में वर्चुअल सुनवाई की अध्यक्षता की। इस सुनवाई में श्रम आयुक्त, जिला मजिस्ट्रेट और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
न्यायमूर्ति रामासुब्रमणियन ने उनकी उपस्थिति की सराहना की लेकिन कहा कि अगर अधिकारी अपने कर्तव्यों को ईमानदारीपूर्व निभाते तो ऐसी सुनवाई की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड पेश नहीं करने और न्यूनतम मजदूरी मानदंडों का पालन नहीं करने सहित अन्य उल्लंघनों को उजागर करने वाली रिपोर्टों के बावजूद, अधिकारी बंधुआ मजदूरी के मुद्दे को संबोधित करने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी चूकें मजदूरों को बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम, 1976 और केंद्रीय क्षेत्र योजना के अंतर्गत बचाव, मुक्ति एवं पुनर्वास का उनका वैध दावा प्राप्त करने से वंचित करती हैं।
एनएचआरसी के महासचिव भारत लाल ने 1976 के बंधुआ मजदूर प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम के कार्यान्वयन एवं बंधुआ मजदूरों के पुनर्वास में मौजूदा कमियों को रेखांकित किया। उन्होंने जिला अधिकारियों से अनुरोध किया कि वे मजदूरों की दयनीय स्थिति पर ध्यान दें और उन्हें कानून को लागू करके एक सम्मानजनक जीवन दें। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों की किसी भी चूक या निष्क्रियता इन मजदूरों को दरिद्रता में धकेल देती है और वे शोषण का शिकार बन जाते हैं।
आयोग ने अपने विचाराधीन शिकायतों पर डीएम द्वारा प्रस्तुत कार्रवाई रिपोर्टों (एटीआर) की समीक्षा की। राज्य श्रम आयुक्त ने आश्वासन दिया कि सभी 216 मामलों की समीक्षा की जाएगी जिसके बाद आवश्यक जानकारी और रिपोर्ट तीन सप्ताह के भीतर आयोग को प्रस्तुत कर दी जाएगी। प्राधिकरणों ने यह भी आश्वासन दिया कि वे बंधुआ मजदूरी के मुद्दे से निपटने के लिए तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के लिए उच्चतम न्यायालय के निर्देशों और कानूनों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करेंगे।





