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सरकार ने सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना-2.0 (CGSMFI-2.0) की वैधता बढ़ाई, स्कीम के तहत ऋण सीमा में वृद्धि की

भारत सरकार ने सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए ऋण गारंटी योजना-2.0 (CGSMFI-2.0) की वैधता को 31.8.2026 तक या 20,000 करोड़ रुपये की गारंटी जारी होने तक, जो भी पहले हो, बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। भारत सरकार ने बड़े आकार के एनबीएफसी-एमएफआई/एमएफआई के लिए अधिकतम ऋण राशि को 300 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1000 करोड़ रुपये करने की भी मंजूरी दे दी है, जो कि एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) के 20 प्रतिशत की कुल अधिकतम सीमा के अंतर्गत है।

वैधता में विस्तार और बड़े आकार के एनबीसीएफसी-एमएफआई/एमएफआई के लिए निर्धारित अधिकतम ऋण राशि में वृद्धि से योजना का बेहतर उपयोग होने और एमएफआई सेक्टर में ऋण प्रवाह में वृद्धि होने की उम्मीद है।

केंद्र सरकार ने 20 मार्च, 2026 को सीजीएसएमएफआई-2.0 स्कीम लागू की। इस योजना का उद्देश्य नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) के माध्यम से बैंकों/वित्तीय संस्थानों को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी-सूक्ष्म वित्त संस्थानों (एनबीएफसी-एमएफआई) और एमएफआई द्वारा छोटे उधारकर्ताओं को दिए गए ऋण पर संभावित नुकसान के विरूद्ध गारंटी प्रदान करना है। अब तक इस योजना के तहत कुल 770 करोड़ रुपए के ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं।

योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • पात्र उधारकर्ता: आरबीआई द्वारा समय-समय पर निर्धारित सूक्ष्म वित्त की नियामक परिभाषा के अंतर्गत आने वाले विद्यमान या नए छोटे उधारकर्ता।
  • गारंटी कवरेज: छोटे एनबीएफसी-एमएफआई/एमएफआई के लिए डिफ़ॉल्ट राशि का 80 प्रतिशत, मध्यम के लिए 75 प्रतिशत और बड़े एनबीएफसी-एमएफआई/एमएफआई के लिए 70 प्रतिशत।
  • गारंटी शुल्क: स्वीकृत राशि (पहले वर्ष) और बकाया राशि पर (उसके बाद) 0.50 प्रतिशत प्रति वर्ष।
  • ब्याज दर : एमएलआई द्वारा एनबीएफसी-एमएफआई या एमएफआई को दिए गए ऋणों पर ईबीएलआर या एमसीएलआर+ 2 प्रतिशत प्रति वर्ष तक सीमित है। छोटे उधारकर्ताओं को ऋण देते समय, ये एमएफआई/एनबीएफसी-एमएफआई ब्याज दर को पिछले 6 महीनों में औसत ऋण दर से 1 प्रतिशत कम तक सीमित रखेंगे।

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