राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने एक महीने तक चले खुफिया अभियान में दक्षिण-पूर्व एशियाई सुपारी को बांग्लादेशी बताकर भारत में आयात करने वाले और दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (साफ्टा) के तहत धोखाधड़ी से रियायती शुल्क का लाभ उठाने वाले एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जांच में अब तक 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित राजस्व नुकसान का पता चला है। इस मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
भारत में सुपारी के आयात पर 100 प्रतिशत मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) लगता है। हालांकि, साफ्टा समझौते के तहत आयातित सुपारी के पात्र उत्पादों को सीमा शुल्क से पूर्ण रूप से छूट प्राप्त है। बांग्लादेश से आयातित सुपारी भी साफ्टा के तहत छूट की पात्र हैं, यदि आयात निर्धारित मूल नियमों के मानदंडों को पूरा करता है।
डीआरआई द्वारा जुटाई गई और जांच की गई खुफिया जानकारी से पता चला कि कुछ गिरोह सुपारी के आयात पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी से साफ्टा के लाभ उठा रहे थे। वे इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया और अन्य दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से आयातित सुपारी को भारत में बांग्लादेश से आयातित सुपारी के मूल देश के रूप में गलत तरीके से घोषणा कर रहे थे।
इसके बाद, कोलकाता और विशाखापत्तनम में आयातकों, सीमा शुल्क दलालों और आईईसी धारकों से जुड़े कई परिसरों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया। सुपारी के दक्षिण-पूर्व एशियाई मूल को साबित करने वाले कई आपत्तिजनक दस्तावेज और ठोस सबूत बरामद किए गए। डीआरआई अधिकारियों ने लगभग 75 लाख रुपये नकद भी बरामद और जब्त किए, जो अवैध रूप से आयातित माल की बिक्री से प्राप्त राशि मानी जा रही है। लगभग 160 मीट्रिक टन सुपारी की एक खेप भी जब्त की गई।
अब तक की जांच से सुपारी के बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी वाले आयात का खुलासा हुआ है, जिसमें हाल के वर्षों में सरकारी खजाने को 2,500 करोड़ रुपये से अधिक के सीमा शुल्क का नुकसान हुआ है। मुख्य साजिशकर्ता दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों से बांग्लादेश के एक ईपीजेड में सुपारी के आयात की सुविधा प्रदान कर रहे थे और फिर कंटेनर और बोरियों को बदलकर माल को बांग्लादेशी मूल की सुपारी के रूप में दिखाकर भारत भेज रहे थे। उन्होंने बांग्लादेशी अधिकारियों से धोखाधड़ी से साफ्टा मूल प्रमाण पत्र प्राप्त किए थे। मुख्य साजिशकर्ता भारतीय आयातकों से माल के रास्ते, दस्तावेजीकरण, क्लीयरेंस और परिवहन की व्यवस्था करने के लिए भारी कमीशन वसूल रहे थे और नकद में भारी भुगतान एकत्र कर रहे थे। जांच में हवाला चैनलों और फर्जी संस्थाओं के इस्तेमाल का भी खुलासा हुआ है, जिनका इस्तेमाल वित्तीय आय के लेन-देन और हेराफेरी के लिए किया जा रहा था।
जांच में यह भी पता चला है कि इस मामले में पकड़े गए सुपारी के अधिकांश अवैध आयात की निकासी के लिए एक सीमा शुल्क दलाल फर्म विशेष रूप से जिम्मेदार थी। डीआरआई द्वारा चल रही जांच के परिणामस्वरूप, सक्षम प्राधिकारी द्वारा सीमा शुल्क दलाल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है। इस मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस प्रकार के अवैध आयात से घरेलू सुपारी उत्पादकों और वैध व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, क्योंकि इससे कीमतों में अनुचित उतार-चढ़ाव होता है और वैध व्यवसायों के लिए समान अवसर बाधित होते हैं। सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने के अलावा, ये अवैध गतिविधियां सीमावर्ती क्षेत्रों में विनियमित व्यापार प्रथाओं और आर्थिक सुरक्षा को भी कमजोर करती हैं।
इस अभियान के साथ, डीआरआई ने मूल देश की व्यवस्थित गलत घोषणा, साफ्टा लाभों का धोखाधड़ी से उपयोग और सीमा शुल्क राजस्व की बड़े पैमाने पर चोरी में शामिल एक सुसंगठित नेटवर्क का प्रभावी ढंग से भंडाफोड़ किया है।





