सरकार बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को मजबूत करने, कारोबार में आसानी को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था की बदलती जरूरतों के अनुरूप कानूनी और नियामक व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए लगातार सुधार कर रही है। बैंकिंग के तरीकों और तकनीक में तेज़ी से हो रहे बदलावों के साथ, बैंकिंग रिकॉर्ड से जुड़े कानूनों को भी इन बदलावों के अनुरूप होने की ज़रूरत है।
बैंकर्स बुक्स साक्ष्य अधिनियम, 2026, जिसे 13 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी, बैंकर्स बुक्स साक्ष्य अधिनियम, 1891 की जगह लेगा। यह समकालीन बैंकिंग तरीकों के अनुरूप बैंकिंग रिकॉर्ड को सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने के लिए एक आधुनिक व्यवस्था प्रदान करता है।
10 सितंबर 2026 की अधिसूचना (गजट अधिसूचना का लिंक नीचे दिया गया है) के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से इस कानून के प्रावधान लागू होंगे।
यह कानून तकनीक-निरपेक्ष दृष्टिकोण अपनाता है और भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल, क्लाउड-आधारित और अन्य आधुनिक रूपों में रखे गए बैंकिंग रिकॉर्ड को मान्यता देता है। यह बैंकिंग रिकॉर्ड के सरल और मानक प्रमाणन की व्यवस्था भी करता है, जिसमें हाथ से किये हुए, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर शामिल हैं।
बैंक अधिकारियों को बुलाने (सम्मन करने) के मामले में भी ज़्यादा स्पष्टता लाई गई है, विशेष रूप से ऐसे स्थिति में जब बैंक कार्यवाही में कोई पक्ष न हो। ऐसे मामलों में बैंक अधिकारियों को बुलाने के लिए न्यायालय को लिखित रूप में “विशेष कारण” दर्ज करना होगा।
इसके अलावा, केंद्र सरकार इन प्रावधानों का विस्तार वित्तीय क्षेत्र की विनिर्दिष्ट संस्थाओं या संस्थाओं के वर्गों तक कर सकती है, जिससे यह व्यवस्था बदलती वित्तीय व्यवस्था की ज़रूरतों को पूरी कर सके।
ये सुधार प्रौद्योगिकी में हो रही प्रगति और बदलती आर्थिक जरूरतों के हिसाब से कानूनों को आधुनिक बनाने, कारोबार में आसानी को बढ़ावा देने और एक आधुनिक व कुशल वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।





