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ब्रिक्स व्‍यापार मंच में पीएम मोदी ने स्‍थायी वैश्विक व्यापार के लिए सुरक्षित समुद्री और आपूर्ति मार्ग तथा व्यापारिक बाधाएं हटाने पर बल दिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यापार को सुचारु बनाए रखने के लिए सुरक्षित समुद्री मार्ग, निर्बाध आपूर्ति मार्ग और समुद्री नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और कारोबार के लिए नए अवसरों का विस्तार करने की दिशा में काम करने का भी आग्रह किया। प्रधानमंत्री कल शाम नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स बिजनेस फोरम सत्र को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत नौवहन की स्वतंत्रता और समुद्री नाविकों की सुरक्षा का प्रबल समर्थक है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार के सुचारु आवागमन के लिए सुरक्षित समुद्री मार्ग आवश्यक हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विश्व में बढ़ती व्यापारिक बाधाओं के बीच भारत आर्थिक सेतु बनाने की दिशा में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आज विकास और स्थिरता के लिए भरोसे का स्रोत है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मेक इन इंडिया, इनोवेट विद इंडिया और स्केल फॉर द वर्ल्ड’ यानि भारत में निर्माण, भारत के साथ नवाचार और विश्व के लिए इसका विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से भारत करीब 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते कर चुका है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण ब्रिक्स के भीतर भी व्यापारिक बाधाओं को कम करने और कारोबार के अवसर बढ़ाने पर केंद्रित है।

प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स इन्क्यूबेटर नेटवर्क, ब्रिक्स एमएसएमई पोर्टल और ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड जैसी पहलों का भी उल्लेख किया। इनका उद्देश्य स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्यमों को बाजार और वित्तीय संसाधनों से जोड़ना है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों को वैश्विक नवाचार और समाधान के उभरते केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर की पहलों से लेकर अत्याधुनिक तकनीकों तक नए अवसर सामने आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ब्रिक्स देश अब दुनिया की 50 प्रतिशत आबादी, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के 25 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में करीब ढाई गुना वृद्धि हुई है, जबकि ब्रिक्स देशों की संयुक्त जीडीपी करीब साढ़े चार गुना बढ़ी है। इससे पता चलता है कि ब्रिक्स की आर्थिक ताकत विश्व अर्थव्यवस्था की तुलना में करीब दोगुनी गति से बढ़ी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ब्रिक्स इस वर्ष अपनी स्थापना के 20 वर्ष पूरे कर रहा है। वर्ष 2006 में चार देशों से शुरू हुआ यह समूह अब कुल मिलाकर 21 देशों का परिवार बन चुका है, जिसमें ब्रिक्स सदस्‍य और साझेदार देश शामिल हैं।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फोरम को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में विश्व की 40 प्रतिशत से अधिक जीडीपी ब्रिक्स देशों ने हासिल की है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की आधी से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसी वजह से इन देशों के घरेलू बाजार गतिशील और जीवंत हैं।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने सदस्य देशों के बीच व्यापार में राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इसके साथ मुद्रा जोखिम के प्रबंधन और आपसी भुगतान के लिए आवश्यक तंत्र स्थापित करना भी जरूरी है।

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि ग्लोबल साउथ को विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और मूल्य सृजन के क्षेत्र में नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने एकतरफा प्रतिबंधों पर भी चिंता जताई।

ब्राजील के विदेश मंत्री माउरु वीएइरा ने कहा कि हाल ही में हुए विस्तार के साथ ब्रिक्स ने विश्व की कुछ सबसे गतिशील और समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने वाले मंच के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत की है। उन्होंने कहा कि संरक्षणवाद, आर्थिक दबाव और एकतरफा प्रतिबंधों से वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने उत्पन्न चुनौतियों के बीच उत्पादक क्षेत्रों को एक-दूसरे के करीब लाना, अब पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अधिक संतुलित व्यापार सुनिश्चित करना और पूरे समूह में सेवाओं के व्यापार का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि इस सहयोग का लाभ उन लोगों तक पहुंचे, जो ब्रिक्स की अर्थव्यवस्थाओं की रीढ़ हैं।

पीयूष गोयल ने कहा कि इस सहयोग से किसानों को लाभ मिलना चाहिए, महिलाओं को कारोबार और अन्य क्षेत्रों में सशक्त बनाया जाना चाहिए तथा युवा उद्यमियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए संपदा सृजन और समृद्धि के अधिक अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। उन्होंने कहा कि सदस्य और साझेदार देशों के दो हजार से अधिक व्यापारिक नेताओं और प्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ यह अब तक का सबसे बड़ा ब्रिक्स बिजनेस फोरम है।

उन्होंने कहा कि फोरम में वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं को प्रभावित करने वाली गैर-टैरिफ बाधाओं, कृषि और कृषि-प्रौद्योगिकी, सेवा क्षेत्र के व्यापार, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।

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