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NITI Aayog launched the second edition of the India Electric Mobility Index.
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नीति आयोग ने इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स के दूसरे संस्करण का शुभारंभ किया

नीति आयोग के राज्य ईवी नीतियों पर कार्यशाला में इंडिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स (आईईएमआई) के दूसरे संस्करण की रिपोर्ट जारी की गई। इस अवसर पर नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने कहा कि दुनिया में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बदलाव तेजी से हो रहा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में अमेरिका में नई कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी लगभग दस प्रतिशत, यूरोपीय संघ में 25 प्रतिशत से अधिक और चीन में 50 प्रतिशत से अधिक रही। आने वाले वर्षों में दुनियाभर में इनकी हिस्सेदारी में काफी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। उन्होंने हाल के पश्चिम एशिया संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का बिंदु बन सकता है, जिस तरह 1970 के दशक के तेल संकट ने ईंधन दक्षता बढ़ाने के वैश्विक प्रयासों को गति दी थी।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बदलाव आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक दृष्टि से जरूरी है। उन्होंने बताया कि भारत अपनी कच्चे तेल की करीब 89 प्रतिशत जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है। यदि इलेक्ट्रिक वाहनों को बड़े स्तर पर नहीं अपनाया गया, तो कारों के स्वामित्व में वृद्धि के साथ यह निर्भरता और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल क्षेत्र सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 7 दशमलव 1 प्रतिशत का योगदान देता है और करीब एक करोड़ 90 लाख लोगों को रोजगार देता है। इसलिए इस क्षेत्र को इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर वैश्विक बदलाव के अनुरूप बनाए रखना महत्वपूर्ण है। उन्होंने दिल्ली जैसे शहरों में वाहनों से होने वाले प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर पड़ने वाले भारी प्रभाव का भी उल्लेख किया और स्वच्छ परिवहन की ओर बदलाव को तत्काल प्राथमिकता देने पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पहले ही 92 हजार करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा रही है। इसमें फेम, पीएम ई-ड्राइव और पीएम ई-बस सेवा जैसी योजनाएं तथा ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स तथा एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल बैटरी स्टोरेज के लिए दो उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं शामिल हैं।

उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग व्यवस्था के तेजी से विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तेल विपणन कंपनियां और निजी क्षेत्र चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हाल ही में शुरू किए गए यूनिफाइड भारत ई-चार्ज ऐप से इस व्यवस्था को और मजबूत करने की उम्मीद है। इससे उपयोगकर्ताओं के लिए चार्जिंग बुनियादी ढांचे तक पहुंच आसान और सुविधाजनक होगी।

राज्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 29 ने अब इलेक्ट्रिक वाहन नीतियां अधिसूचित कर दी हैं। आईईएमआई के स्कोर में भी व्यापक सुधार हुआ है। पिछले एक वर्ष में सबसे अधिक राज्य का स्कोर 77 से बढ़कर 84 और औसत राज्य स्कोर 36 से बढ़कर 40 हो गया है।

उन्होंने कहा कि यह इंडेक्स राज्यों को अपनी प्रगति पर नजर रखने और आंकड़ों के आधार पर नीतियां बनाने में मदद करने के लिए एक डेटा आधारित ढांचा उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में राज्यों के अनुभवों में अंतर कोई समस्या नहीं, बल्कि एक ताकत है, क्योंकि उनकी रणनीतियां औद्योगिक आधार, वित्तीय क्षमता और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग होती हैं। उन्होंने राज्यों से एक-दूसरे के अनुभवों से सीखने का आग्रह किया। उन्होंने राज्यों से चुनिंदा शहरों में सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण को प्राथमिकता देने, चार्जिंग बुनियादी ढांचे का समान भौगोलिक वितरण सुनिश्चित करने और अनुसंधान तथा नवाचार में निवेश को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

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