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Union Minister of State for Health Anupriya Patel launched India 7th National Formulary 2026.
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केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने भारत की 7वीं राष्ट्रीय फ़ार्मुलेरी 2026 का शुभारंभ किया

स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने आज भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) द्वारा आयोजित छठे राष्ट्रीय औषध निगरानी सप्ताह कार्यक्रम में चिकित्सा उपकरण संबंधी प्रतिकूल घटनाओं की सुरक्षा निगरानी और सूचना के लिए भारत के अस्पतालों के लिए मार्गदर्शन दस्तावेज, 7वें राष्ट्रीय फ़ार्मुलेरी 2026 और सुरक्षित और लोकप्रिय मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम – आईओएस उपयोगकर्ताओं के लिए एडीआर-पीवीपीआई 2.0 मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया। भारतीय फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम के तहत विकसित आधिकारिक मोबाइल ऐप से दवाइयों से होने वाले प्रतिकूल प्रभावों की रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज की जा सकती है। राष्ट्रीय फ़ार्मुलेरी का 7वां संस्करण नेशनल फ़ार्मुलेरी ऑफ इंडिया ऑनलाइन के माध्यम से डिजिटल रूप से भी उपलब्ध है।

17 से 23 सितंबर 2026 तक मनाया जा रहा छठा राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह, “फार्माकोविजिलेंस द्वारा दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा: सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा की दिशा में एक कदम” विषय पर आधारित है। कार्यक्रम में दवा सुरक्षा और रोगी देखभाल सुदृढ़ बनाने में लगे वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नियामक, स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, शिक्षाविद, शोधकर्ता और अन्य हितधारक शामिल हुए।

नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में अनुप्रिया पटेल ने जोर देकर कहा कि दवाओं का तर्कसंगत उपयोग और निरंतर सुरक्षा निगरानी जन स्वास्थ्य के अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक रोगी को अच्‍छी गुणवत्ता वाली सही दवा सही तरीके से अधिकतम सुरक्षित रूप में मिलनी चाहिए।

फार्माकोविजिलेंस क्षेत्र में हुई प्रगति प्रगति का उल्‍लेख करते हुए उन्‍होंने कहा कि भारत में इसमें मजबूत स्वदेशी प्रणाली विकसित हुई है जो देश भर में दवा सुरक्षा संबंधी डेटा उत्पन्न करने, एकत्र करने, संसाधित करने और विश्लेषण में सक्षम है। इस क्षमता को उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में आत्मनिर्भर भारत का महत्वपूर्ण आयाम बताया, जिससे भारत दवाओं के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने में स्वयं वैज्ञानिक प्रमाण उत्पन्न कर सकता है।

इस दिशा में भारत के बढ़ते वैश्विक योगदान की चर्चा करते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के रोगी सुरक्षा डेटाबेस में भारत का योगदान 2009-2014 के दौरान 123वें स्थान से बढ़कर वैश्विक स्तर पर 8वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि यह भारत का अन्यत्र स्‍थापित सुरक्षा जानकारी पर निर्भर रहने से हटकर स्वयं के फार्माकोविजिलेंस साक्ष्य तैयार करने और योगदान में राष्ट्रीय क्षमता में वृद्धि को दर्शाता है।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्‍य मंत्री ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) स्थित राष्ट्रीय समन्वय केंद्र द्वारा समन्वित भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपी) की भूमिका का विलय किया, जो दवाओं के प्रतिकूल प्रभावों से संबंधित जानकारी व्यवस्थित रूप से एकत्र करने, आकलन करने और विश्लेषण में अहम है। उन्होंने चिकित्सा उपकरणों से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं की निगरानी में भारत के मैटेरियोविजिलेंस कार्यक्रम (एमवीपी) के महत्‍वपूर्ण योगदान की भी चर्चा की।

सरकार द्वारा भारत के जैव सतर्कता कार्यक्रम को मंजूरी

अनुप्रिया पटेल ने भारत के रोगी सुरक्षा ढांचे के विस्तार के तहत, भारत के जैव सतर्कता कार्यक्रम को मंजूरी दिए जाने की भी घोषणा की।

इसके तहत, आईपीसी अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में इस्‍तेमाल होने वाली दवाओं और जैविक उत्पादों से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों की सूचना, मूल्यांकन, निगरानी और रोकथाम मजबूत बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगा, जिसमें दाताओं और प्राप्तकर्ताओं को दिए जाने वाले अंग और ऊतक भी शामिल हैं।

फार्माकोविजिलेंस, मैटेरियोविजिलेंस और बायोविजिलेंस संबंधी पहल मिलकर दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और प्रत्यारोपण प्रक्रियाओं में सुरक्षा निगरानी मजबूत बनाएंगी।

साक्ष्य-आधारित और तर्कसंगत नुस्खे के लिए सातवां भारतीय राष्ट्रीय फार्मुलरी 2026

भारत की राष्ट्रीय फार्मुलरी की चर्चा करते हुए, अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारतीय फार्माकोपिया आयोग द्वारा तैयार यह आधिकारिक गाइडबुक वैज्ञानिक मानकों और नैदानिक ​​​​अभ्यास के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम करती है, जो स्वास्थ्य पेशेवरों को दवाओं के उचित और तर्कसंगत उपयोग में मार्गदर्शन करती है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में दवाओं के तर्कसंगत और सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा कि इसके 7वें संस्करण का शुभारंभ स्वास्थ्य पेशेवरों को दवाएं लिखते और इस्तेमाल करते समय सूचित, साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।

केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण राज्‍य मंत्री ने जोर देकर कहा कि दवाओं की सुरक्षा एक निरंतर जिम्मेदारी है जो किसी दवा या चिकित्सा उपकरण के विकास और निर्माण से लेकर उसके नुस्खे, वितरण, उपयोग और बाजार में आने के बाद की निगरानी में निहित है।

उन्होंने इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मान्यता का उल्‍लेख करते हुए बताया कि लगभग 25 देश भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता देते हैं और स्वीकार करते हैं, जबकि भारतीय फार्माकोपिया आयोग 2023 में फार्माकोपियल डिस्कशन ग्रुप का सदस्य बन गया है, जिससे वैश्विक नियामक अभिसरण और सामंजस्य में भारत की भूमिका व्‍यापक हुई है।

दवाओं की सुरक्षा के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, एआई और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग

अनुप्रिया पटेल ने प्रौद्योगिकी की भूमिका की चर्चा करते हुए, कहा कि भारत की दवाओं की आधिकारिक डिजिटल गाइडबुक-नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया-ऑनलाइन, आईपी ऑनलाइन, एडीआर-पीवीपी 2.0 मोबाइल ऐप और प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया निगरानी प्रणाली सहित डिजिटल पहल, दवाओं से संबंधित जानकारी और प्रतिकूल घटना की सूचना देना अधिक सुलभ, पारदर्शी और उत्तरदायी बना रही हैं।

अनुप्रिया पटेल ने औषधि सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत बनाने और सुरक्षा संबंधी साक्ष्यों के समय पर सृजन और उपयोग सक्षम बनाने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत डेटा विश्लेषण सहित उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने का आह्वान किया।

उन्‍होंने प्रतिकूल घटनाओं की सूचना देने में रोगियों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्लिकेशन और हेल्पलाइन से इनकी सूचना देना सुगम हो गया है। उन्‍होंने रोगी रिपोर्टिंग की कमियों को दूर करने का भी आह्वान किया।

अनुप्रिया पटेल ने कहा कि देश भर के सरकारी और निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा या दवाओं के साइड इफेक्ट्स की सूचना देने के लिए लगभग 1,150 एडीआर रिपोर्टिंग केंद्र संचालित हैं, साथ ही चिकित्सा उपकरण निगरानी सुविधाएं भी मौजूद हैं। उन्‍होंने कहा कि सरकार की इन सुविधाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा केन्‍द्र तक विस्तारित करने की योजना है।

‘विश्व की फार्मेसी’ से लेकर रोगी सुरक्षा में वैश्विक नेतृत्व तक

विकसित भारत 2047 की भविष्‍य योजना की चर्चा करते हुए अनुप्रिया पटेल ने कहा कि रोगी सुरक्षा एक प्रमुख राष्ट्रीय प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने भारत को विश्व की फार्मेसी के रूप में स्थिति और मजबूत बनाने और फार्माकोविजिलेंस विज्ञान और रोगी सुरक्षा में वैश्विक नेता बनने की आकांक्षा रखने का आह्वान किया।

स्वास्थ्य सेवा पारितंत्र के समग्र दृष्टिकोण का उल्‍लेख करते हुए, केन्‍द्रीय स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण राज्‍य मंत्री ने सरकारी संस्थानों, नियामक प्राधिकरणों, स्वास्थ्य पेशेवरों, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों, दवा उद्योगों और रोगियों के बीच निरंतर सहयोग पर जोर दिया।

उन्‍होंने कहा कि दवा सुरक्षा सबका दायित्‍व है और हर प्रतिकूल प्रभाव की सूचना एक जीवन बचा सकती है। उन्होंने कहा कि दवा सुरक्षा की मजबूत संस्कृति और दवाओं के तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए सामूहिक भागीदारी महत्वपूर्ण है।

भारतीय फार्माकोपिया आयोग (भारतीय औषध स‍ंहिता आयोग) के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन ने औषधियों के तर्कसंगत उपयोग तथा सुरक्षित नुस्खे लिखने की प्रथाओं को बढ़ावा देने में भारत की भारतीय फार्माकोपिया आयोग की भूमिका का उल्‍लेख किया। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर गैर-औषधीय औषध संहिता (एनएफआई) अपनाने का विस्तार और दवाओं, चिकित्सा उपकरणों, रक्त और रक्त उत्पादों तथा अन्य चिकित्सा उत्पादों से संबंधित डिजिटल सक्षम औषध निगरानी मजबूत बनाने के आईपीसी के प्रयासों की चर्चा की।

भारत में विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के प्रतिनिधि डॉ. इवान जे.-एफ. हुटिन ने औषधि सुरक्षा और फार्माकोविजिलेंस प्रणालियों को सुदृढ़ बनाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग पर जोर दिया।

कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के एम्स कल्याणी के अध्यक्ष प्रो. वाई.के. गुप्ता; भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद -आईसीएमआर के पूर्व महानिदेशक और स्‍वास्‍थ्‍य अनुसंधान विभाग-डीएचआर के सचिव डॉ. वी.एम. कटोच; स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और भारतीय औषध संहिता आयोग के वरिष्ठ अधिकारी; और अन्य हितधारक उपस्थित रहे।

एनएफआई 2026

भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) द्वारा 2009 से समय-समय पर प्रकाशित होने वाली ‘नेशनल फॉर्मुलरी ऑफ इंडिया’ स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज है जिसका उद्देश्य दवाओं के तर्कसंगत और सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना है।

भारत की राष्ट्रीय फार्मुलरी के 7वें संस्करण (एनएफआई 2026) में 34 अध्याय, 20 परिशिष्ट और 653 औषधियां शामिल हैं। इनमें 42 निश्चित खुराक संयोजन और 30 प्रतिरक्षात्मक औषधियां की जानकारी दी गई है। औषधि मोनोग्राफ को राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (एनएलईएम) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अनुरूप संशोधित किया गया है।

मुद्रित संस्करण के अलावा, एनएफआई डिजिटल प्रारूप में भी उपलब्ध है और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों, टीकाकरण अनुसूचियों, जन औषधि, अप्रयुक्त या समाप्त हो चुके औषधीय उत्पादों के सुरक्षित निपटान और अन्य आधिकारिक नियामक संसाधनों से संबंधित महत्वपूर्ण लिंक की जानकारी प्रदान करता है।

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