महाराष्ट्र में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को शुरू करने के लिए ₹10,520 करोड़ की वित्तीय सहायता को मंज़ूरी
ग्रामीण महाराष्ट्र में डिजिटल अवसंरचना को मज़बूत करने और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी को तेज़ी से बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, दूरसंचार विभाग (डीओटी) के तहत डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) ने आज नई दिल्ली के संचार भवन में राज्य-संचालित मॉडल के तहत महाराष्ट्र में संशोधित भारतनेट प्रोग्राम (एबीपी) को लागू करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता महाराष्ट्र में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को लागू करने के लिए डिजिटल भारत निधि (डीबीएन), डीओटी, महाराष्ट्र सरकार, महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमडीआईएल), भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और महाराष्ट्र इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महाआईटी) के बीच किया गया।
समझौता हस्ताक्षर समारोह, डिजिटल भारत निधि (डीबीए) के प्रशासक श्री श्यामल मिश्रा, महाराष्ट्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विभाग के सचिव श्री वीरेंद्र सिंह, महाराष्ट्र इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कॉर्पोरेशन लिमिटेड (महाआईटी) की एमडी श्रीमती भुवनेश्वरी एस., भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के निदेशक (एंटरप्राइज बिजनेस- ईबी) श्री पापा सुधाकर राव, दूरसंचार विभाग के डीडीजी (एबीपी इंम्प्लीमेंटेशन-I) श्री दिनेश कुमार गर्ग के साथ-साथ डीओटी, डीबीएन और बीएसएनएल के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित किया गया।
इस समझौते पर हस्ताक्षर करना इस कार्यक्रम को तेज़ी से लागू करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह ग्रामीण डिजिटल ढांचे को मज़बूत करने, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और समावेशी डिजिटल विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार और महाराष्ट्र सरकार की साझा प्रतिबद्धता को दिखाता है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 4 अगस्त 2023 को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंज़ूरी दी थी। इसका मकसद मौजूदा भारतनेट नेटवर्क को अपग्रेड करना, उसे एक साथ लाना और उसका विस्तार करना था, ताकि सभी ग्राम पंचायतों और गांवों को मांग के आधार पर मज़बूत और भविष्य के लिए तैयार ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी मिल सके।
महाराष्ट्र में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत, यह परियोजना महानेट डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमडीआईएल) के ज़रिए लागू की जाएगी। इस कार्यक्रम में कुल 28,237 ग्राम पंचायतें शामिल होंगी। इसमें नेटवर्क की मज़बूती बढ़ाने के लिए पहले चरण की 15,171 ग्राम पंचायतों को लीनियर टोपोलॉजी से रिंग टोपोलॉजी में अपग्रेड करना, दूसरे चरण की 12,740 ग्राम पंचायतों को कवर करना और हाल ही में बनी 326 ग्राम पंचायतों को शामिल करना शामिल है। इसके अलावा, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को मज़बूत करने के लिए 15,799 गांवों को मांग के आधार पर कनेक्टिविटी दी जाएगी।
भारत सरकार ने महाराष्ट्र में इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए ₹10,520 करोड़ की वित्तीय सहायता को मंज़ूरी दी है। उम्मीद है कि भारत सरकार की वित्तीय सहायता से ग्रामीण इलाकों में नौ लाख से ज़्यादा घरों में फाइबर कनेक्शन लग सकेंगे। साथ ही, राज्य के ग्रामीण और दूर-दराज़ के इलाकों में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान और नागरिकों से जुड़ी सेवाओं जैसी डिजिटल सेवाओं की डिलीवरी में भी काफी सुधार होगा।
आज हुए समझौते से महाराष्ट्र में इस कार्यक्रम को तेज़ी से लागू करने और डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
डिजिटल भारत निधि के बारे में
डिजिटल भारत निधि (पहले यूएसओएफ) की स्थापना इंडियन टेलीग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत 01.04.2002 से की गई थी। दूरसंचार अधिनियम, 2023 के अनुसार, यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड अब डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) बन गया है। डीबीएन का काम कम सुविधा वाले ग्रामीण, दूर-दराज़ और शहरी इलाकों में दूरसंचार सेवाओँ की पहुँच और डिलीवरी को बढ़ावा देकर सार्वभौमिक सेवाओं को समर्थन देना है। यह संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (डीओटी) का एक संबद्ध कार्यालय है।
डीबीएन के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए, इसमें कई योजनाएँ और प्रोजेक्ट हैं, जैसे भारतनेट, 4जी सैचुरेशन प्रोजेक्ट, आकांक्षी ज़िलों के उन इलाकों में मोबाइल सेवाएं देना, जहाँ अभी तक सुविधा नहीं है, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में मोबाइल सेवाएं, हिमालयी और सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल सेवाएं, द्वीपों पर मोबाइल सेवाएं और पूर्वोत्तर इलाकों में मोबाइल सेवाएं भी इसमें शामिल हैं।





