उपराष्ट्रपति ने कौमारकॉन-2026 का उद्घाटन किया और अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की डिजिटल पहलों का शुभारंभ किया
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज आयुर्वेद में व्यापक वैज्ञानिक अनुसंधान करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल पद्धतियों की प्रभावकारिता स्थापित करने, रोगियों का विश्वास मज़बूत करने और भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान आवश्यक है। वे नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) द्वारा आयोजित कौमारभृत्य पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के तीसरे संस्करण कौमारकॉन-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के (एम्स) समकक्ष विकसित करने के विजन का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि संस्थान इस विजन को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। एआईआईए के 10वें स्थापना दिवस पर उसे बधाई देते हुए उन्होंने संस्थान की प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करने के लिए अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में निरंतर प्रयासों के महत्व पर बल दिया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ देश की सभ्यतागत प्रज्ञा और सदियों पुरानी ज्ञान परंपराओं में निहित एक अमूल्य विरासत है। उन्होंने वर्ष 2014 में आयुष मंत्रालय के गठन तथा शिक्षा को सुदृढ़ करने, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करने और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने आयुष मंत्रालय और आईसीएमआर, सीएसआईआर, डीबीटी, डीएसटी तथा एम्स जैसे संस्थानों के बीच किए जा रहे अंतर्विषयक सहयोग का भी उल्लेख किया।
प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में आयुष सेवाओं के एकीकरण का जिक्र करते हुए सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि ऐसी पहलें पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों और आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल के बीच संवाद एवं सहयोग के अवसर सृजित करती हैं। उन्होंने योग को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता और जामनगर में डब्ल्यूएचओ के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र की स्थापना को भारत के पारंपरिक ज्ञान को विश्व के साथ साझा करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धियां बताया।
बाल स्वास्थ्य देखभाल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस सम्मेलन का विषय “बाल स्वास्थ्य का भविष्य संवारना: कुमारभृत्य में वैश्विक परिप्रेक्ष्य, अनुसंधान नवाचार और नैदानिक क्षेत्र की नवीनतम प्रगती” इस साझा जिम्मेदारी को दर्शाता है कि प्रत्येक बच्चे को स्वस्थ और अनुकूल वातावरण में विकसित होने का अवसर मिलें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के पोषण, वृद्धि, विकास, रोगों की रोकथाम और भावनात्मक कल्याण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए बच्चों के स्वास्थ्य और मानव पूंजी की गुणवत्ता पर निरंतर ध्यान देना भी आवश्यक है। उन्होंने शोधकर्ताओं और चिकित्सकों से पारंपरिक ज्ञान को संरक्षित करने, वैज्ञानिक सत्यापन के माध्यम से उसे सुदृढ़ बनाने तथा अपने प्रयासों के केंद्र में बाल स्वास्थ्य को रखने का आह्वान किया।
इस कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने आयुष स्टार्ट-अप पोर्टल, एआईआईए-आईसीएआईएनई वेबसाइट और आयुर्वेद डिजिटल नवाचार एवं उद्यम त्वरण सुविधा (आयुदिवा) का उद्घाटन किया। उन्होंने वामन ऐप और पंचकर्म आकलन ऐप का भी शुभारम्भ किया। इस अवसर पर अमेरिका के महर्षि इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एमआईयू) और नई दिल्ली स्थित एआईआईए के बीच एक अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान भी किया गया।
इससे पहले उपराष्ट्रपति ने एआईआईए की अस्पताल सुविधाओं और धन्वंतरी वाटिका का दौरा किया। इस दौरान उन्हें जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में संस्थान के योगदान तथा वाटिका में प्रदर्शित विभिन्न औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों और पत्थरों के आयुर्वेदिक महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
इस कार्यक्रम में आयुष एवं स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, भारतीय चिकित्सा पद्धति संबंधी राष्ट्रीय आयोग की अध्यक्ष डॉ. मनीषा उपेंद्र, नई दिल्ली स्थित एआईआईए के निदेशक प्रोफेसर पी.के. प्रजापति तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति, शोधकर्ता, संकाय सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित थे।





