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President Droupadi Murmu attended the centenary commemoration of Swami Shraddhanand’s martyrdom at the Gurukul in Kurukshetra today.
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल हुईं

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज हरियाणा के कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल में स्वामी श्रद्धानंद जी के बलिदान शताब्दी समारोह में शामिल हुईं। इस अवसर पर, अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने स्वामी श्रद्धानंद जी के 100वें बलिदान वर्ष की स्‍मृति में उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि मुंशीराम से महात्मा मुंशीराम और फिर स्वामी श्रद्धानंद बनने की उनकी जीवन-यात्रा अत्यंत प्रेरणादायक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी ने अपना जीवन वेदों की सेवा और समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनकी जीवन-यात्रा और बलिदान हम सब के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी सामाजिक एकता के प्रबल पक्षधर थे। दिल्ली के जामा मस्जिद के मंच से अपने उद्गार में उन्होंने आपसी सद्भावना और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया था।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी का मानना था कि भारत की उन्नति के लिए अस्पृश्यता के कलंक को दूर करना एवं दलितों का उद्धार करना सबसे आवश्यक है। उनके विचार में, छुआछूत जैसी कुप्रथा वैदिक धर्म के मूल भावनाओं के विपरीत थी।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी ने गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित और सुदृढ़ किया। इससे भारतीय शिक्षा और संस्कृति की धारा को नवजीवन मिला। उन्होंने आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा प्रतिपादित पुरातन आर्य शिक्षा-पद्धति को पुनर्जीवित करने के लिए अथक प्रयास किए।

राष्ट्रपति ने कहा कि चूंकि हम वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए हमारे लिए यह अत्‍यन्‍त महत्त्वपूर्ण हो जाता है कि भारतवासी देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, नवाचार और उद्यमशीलता को अपनाएं। उन्होंने विश्वास व्‍यक्‍त किया कि स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन से प्रेरणा लेकर, हमारे देश के युवा एक शिक्षित, आत्मनिर्भर, समरस और सशक्त भारत के निर्माण में योगदान देंगे।

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