भारत और यूरोपीय संघ ने होराइजन यूरोप कार्यक्रम में भारत की भागीदारी को लेकर बातचीत सफलतापूर्वक पूरी कर ली है। यह यूरोपीय संघ का 93 अरब 50 करोड़ यूरो का प्रमुख शोध और नवाचार कार्यक्रम है। इस समझौते के तहत भारतीय शोधकर्ताओं, कंपनियों और शोध संस्थानों को सीधे आर्थिक सहायता मिल सकेगी। भारतीय वैज्ञानिक अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं का नेतृत्व और संचालन भी कर सकेंगे। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, अंतरिक्ष, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा और औद्योगिक विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। यूरोपीय आयोग ने इस समझौते को भारत और यूरोपीय संघ के संबंधों में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। इससे दोनों पक्षों के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और उद्योगों को मिलकर नई तकनीक विकसित करने के अवसर मिलेंगे। फिलहाल होराइजन यूरोप कार्यक्रम में ब्रिटेन, कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड सहित यूरोपीय संघ से बाहर के 23 देश जुड़े हुए हैं। दोनों पक्षों की ओर से समझौते पर हस्ताक्षर और मंजूरी मिलने के बाद इसके अगले वर्ष जनवरी से लागू होने की उम्मीद है।





