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कृषि जैविक संसाधन ने पूरे भारत में जैव विविधता पहल के लिए एबीएस लाभ के रूप में लगभग 1.04 करोड़ रुपये जुटाए

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों (एसबीबी) और दो केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (यूटीबीसी) के बीच लगभग 1.04 करोड़ रुपये की पहुंच और लाभ-साझाकरण (एबीएस) राशि वितरित की है। इससे पता चलता है कि कृषि संबंधी जैविक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभ को किस प्रकार जैव विविधता के संरक्षण और स्थायी उपयोग की दिशा में लगाया जा सकता है।

यह राशि क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड, सवाना सीड्स प्राइवेट लिमिटेड और ननहेम्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से प्राप्त लाभ-साझाकरण योगदान को दर्शाती है। यह योगदान अनुसंधान और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए कृषि संबंधी जैविक संसाधनों तक पहुंच प्राप्त करने के बदले में दिया गया है। यह योगदान बाजरा (पेनिसेटम ग्लुकम), ज्वार (ज्वार बाइकलर), मक्का (जी मेज), चावल (ओरिजा सैटिवा एल) और लौकी (लेजेनेरिया सिसेरिया) के उपयोग से संबंधित है। ये फसलें भारत की कृषि जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो खाद्य सुरक्षा, खेती से जुड़ी आजीविका और कृषि क्षेत्र में नवाचार को सहारा देती हैं।

एनबीए ने लाभ-साझाकरण घटक को वितरित करने के लिए एक क्षेत्र-आधारित दृष्टिकोण अपनाया है। पहले जैविक संसाधन बाजारों, व्यापारियों या बिचौलियों के माध्यम से प्राप्त किए जाते थे, इसलिए व्यक्तिगत लाभार्थियों की पहचान आसानी से नहीं हो पाती थी। ऐसे में एनबीए ने विशेषज्ञ समिति द्वारा अनुशंसित और प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित वितरण व्यवस्था को अपनाया है। आवंटन संबंधित जैविक संसाधनों के अनुमानित कृषि क्षेत्रों के अनुपात में निर्धारित किए गए थे, जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा अपने एकीकृत कृषि सांख्यिकी पोर्टल के माध्यम से प्रकाशित आधिकारिक कृषि आंकड़ों पर आधारित थे।

लगभग 1.04 करोड़ रुपये के वितरण में एसबीबी और यूटीबीसी के लिए आवंटित राशि शामिल हैं। राज्यवार वितरण में लागू क्षेत्र-आधारित कार्यप्रणाली के आधार पर शीर्ष 10 राज्यों और शेष राज्यों के लिए सामूहिक रूप से आवंटन शामिल हैं।

एबीएस राशि का राज्य-वार वितरण
क्र. सं.राज्यराशि (रुपये में)
 1.उत्तर प्रदेश10,35,790.00
 2.महाराष्ट्र10,05,218.00
 3.मध्य प्रदेश9,81,132.00
 4.बिहार7,95,968.00
 5.पश्चिम बंगाल7,91,609.00
 6.कर्नाटक7,34,400.00
 7.तेलंगाना5,76,934.00
 8.छत्तीसगढ़5,20,524.00
 9.ओडिशा4,99,655.00
 10.राजस्थान4,87,874.00
 11.अन्य29,34,084.00
 कुल1,03,63,188.00

कृषि क्षेत्र, जिसने एबीएस योगदान के रूप में लगभग 87 करोड़ रुपये (9.16 मिलियन डॉलर) जुटाए हैं, भारत के एबीएस तंत्र में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है। ये योगदान राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के स्तर पर जैव विविधता से संबंधित पहलों को सुदृढ़ करते हुए पारंपरिक फसल किस्मों और आनुवंशिक विविधता सहित कृषि जैविक संसाधनों के संरक्षण और स्थायी उपयोग का समर्थन कर सकते हैं।

अब तक, एनबीए ने एबीएस लाभ के रूप में 204 करोड़ रुपये (21.48 मिलियन डॉलर) से अधिक की राशि जारी की है, जिससे पूरे देश में जैव विविधता संरक्षण और लाभ-साझाकरण को समर्थन मिला है। भारत का एबीएस ढांचा जैविक विविधता पर सम्मेलन और नागोया प्रोटोकॉल के उद्देश्यों में योगदान देता है और कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्य 13 का समर्थन करता है, जो आनुवंशिक संसाधनों, डिजिटल अनुक्रम जानकारी और संबंधित पारंपरिक ज्ञान के उपयोग से होने वाले लाभ के निष्पक्ष और समान रूप से साझा करने को सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी उपायों का आह्वान करता है।

28 अक्टूबर 2026 को आर्मेनिया के येरेवन में आयोजित होने वाले सीबीडी सीओपी 17 इवेंट ‘नीति से अभ्यास तकः नवाचार, वित्त और एबीएस के माध्यम से भारत की जैव विविधता प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाना’ में एबीएस को लागू करने में भारत के अनुभव को प्रमुखता से पेश किया जाएगा। इस कार्यक्रम में भारत के उन प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा, जिनके जरिए वह नीति-क्रियान्वयन, नवाचार, वित्तपोषण और लाभ-साझाकरण के माध्यम से जैव विविधता संबंधी अपनी प्रतिबद्धताओं को जमीनी हकीकत में बदलने का काम कर रहा है।

एसबीबी और यूटीबीसी को आवंटित धन का उपयोग जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के लागू प्रावधानों के अनुसार और जैव विविधता संरक्षण और स्थायी उपयोग, प्रलेखन (दस्तावेजीकरण), अनुसंधान, क्षमता निर्माण और स्थानीय जैव विविधता संचालन को सुदृढ़ करने से संबंधित गतिविधियों के लिए किया जाना है। भारत का एबीएस ढांचा ‘जैविक विविधता अधिनियम, 2002’ (जिसमें 2023 में संशोधन किया गया है), ‘जैविक विविधता नियम, 2024’ और ‘पहुंच और लाभ-साझाकरण विनियम, 2025’ द्वारा शासित होता है। अधिनियम की धारा 21, जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों को उचित और न्यायसंगत तरीके से साझा करने के निर्धारण का प्रावधान करती है। वर्तमान में जारी किया गया धन कृषि आपूर्ति शृंखलाओं में इस ढांचे के व्यावहारिक अनुप्रयोग को दर्शाता है, जो जैव विविधता से संबंधित पहलों के समर्थन के साथ अनुसंधान और वाणिज्यिक उपयोग को जोड़ता है।

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