भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास संस्था लिमिटेड (आईआरईडीए) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक प्रदीप कुमार दास ने आज विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) दावोस 2026 में एक पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। सत्र का विषय “जहां सौर ऊर्जा महत्त्वपूर्ण है, वहां इसका विस्तार करना: ग्लोबल साउथ के लिए छत, कृषि और विकेंद्रीकृत ऊर्जा पर भारत की सीख”, था।
इससे पहले दिन में, माननीय केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंच पर प्रमुख भाषण दिया, जिसमें उन्होंने समावेशी एवं संपोषित विकास के लिए सौर ऊर्जा समाधानों को आगे बढ़ाने में भारत के अनुभवों और नेतृत्व पर प्रकाश डाला।
सत्र में वितरित सौर ऊर्जा में भारत के वैश्विक नेतृत्व और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इसके बढ़ते महत्व को रेखांकित किया गया। उन्होंने आगे कहा कि विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने से प्रणाली की दक्षता में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे सरकारी सब्सिडी और एटीएंडसी घाटे में कमी आएगी, जो लागत को काफी हद तक कम कर सकता है और इसकी सामर्थ्य सुनिश्चित कर सकता है।
प्रदीप कुमार दास ने इस विषय पर जोर दिया कि नवीकरणीय ऊर्जा के उभरते क्षेत्रों को रिस्क प्रोफाइलिंग के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन प्रभावी परियोजना डिजाइन और विवेकपूर्ण जोखिम प्रबंधन से इन क्षेत्रों में जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह बात इरेडा के असाधारण तौर पर केवल 149 करोड़ रुपये के कुल राइट-ऑफ से स्पष्ट है, जो स्थापना के बाद से लगभग 1.81 लाख करोड़ रुपये के वित्तपोषण के बावजूद है, जो कंपनी के मजबूत मूल्यांकन और निगरानी प्रणालियों को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि इरेडा रूफटॉप सोलर और पीएम-कुसुम योजनाओं के अंतर्गत परियोजना लागत का 70-80% वित्तपोषण एग्रीगेटर मोड में करता है, जिससे ग्रामीण भारत में स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच में बड़ी तेजी आई है।
प्रदीप कुमार दास ने केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी को विश्व आर्थिक मंच पर इरेडा को भारत की नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ोतरी को प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया, जो एक परिपक्व और सुविकसित इकोसिस्टम की मदद से संभव हुई है।
उन्होंने इस विषय पर भी प्रकाश डाला कि यह मंच भारत के नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन को दिशा देने में इरेडा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने का अवसर प्रदान करता है, और कहा कि देश का अनुभव और संस्थागत ढांचा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे अन्य देशों के लिए एक मूल्यवान सीख साबित हो सकता है।
कृषि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में महाराष्ट्र की प्रगति का उदाहरण देते हुए, उन्होंने इस क्षेत्र के जोखिम को कम करने और धैर्यवान वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की जरूरत पर बल दिया।
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