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बैंकिंग अनुप्रयोगों के लिए स्वदेशी क्वांटम प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की दिशा में सी-डेक और बैंक ऑफ इंडिया ने हाथ मिलाया

भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था, सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डेक) और बैंक ऑफ इंडिया (बीओआई) ने 22 अक्टूबर 2026 को क्वांटम वित्तीय नवाचार और बैंकिंग में उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए सहयोग की दिशा में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

इस समझौता ज्ञापन के तहत सी-डेक और बीओआई के लिए बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में संयुक्त शोध, विकास, प्रायोगिक कार्यान्वयन, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और क्षमता निर्माण पहलों का पता लगाने के लिए एक ढांचा स्थापित किया गया है।

यह सहयोग सी-डेक की हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम टेक्नोलॉजीज, ब्लॉकचेन, साइबर सुरक्षा और स्वदेशी प्रौद्योगिकी विकास में क्षमताओं को बैंक ऑफ इंडिया की बैंकिंग डोमेन विशेषज्ञता, राष्ट्रव्यापी उपस्थिति और उच्च-मात्रा प्रौद्योगिकी वातावरण के साथ जोड़ता है।

इस साझेदारी का एक प्रमुख लक्ष्य वित्तीय नवाचार के लिए क्वांटम तंत्र का विकास करना होगा , जिसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणालियों को क्वांटम प्रौद्योगिकियों से जुड़े अवसरों और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार करना है। दोनों संगठन संयुक्त रूप से क्वांटम-प्रेरित और क्वांटम-सुरक्षित प्रौद्योगिकियों का पता लगाएंगे जो बैंकिंग प्रणाली में सुरक्षा, विश्वास, लचीलापन और निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत कर सकती हैं।

इस सहयोग का उद्देश्य बैंकिंग उपयोग के मामलों के एक प्राथमिकता-आधारित पोर्टफोलियो की पहचान करना, सुरक्षित सैंडबॉक्स वातावरण में अवधारणाओं के प्रमाण प्रदर्शित करना, तकनीकी व्यवहार्यता और संभावित बैंकिंग मूल्य का आकलन करना, मौजूदा प्रणालियों के मुकाबले उभरते दृष्टिकोणों का मानकीकरण करना और आगे के विकास, प्रायोगिक परियोजनाओं या अपनाने के लिए रोडमैप विकसित करना है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव, आईएएस, एस. कृष्णन ने तकनीकी उन्नति में बैंक ऑफ इंडिया के योगदान की सराहना की और स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सी-डेक के साथ उसके सहयोग को सराहते हुए कहा कि साइबर सुरक्षा संबंधी बढ़ती चिंताओं और उभरते तकनीकी खतरों के इस दौर में क्वांटम-प्रतिरोधी वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना आवश्यक है ताकि बैंकिंग क्षेत्र क्वांटम युग की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार हो सके।

सी-डेक के महानिदेशक ई. मगेष ने समझौते पर टिप्पणी करते हुए कहा, “बैंक ऑफ इंडिया के साथ यह सहयोग भारत की स्वदेशी क्वांटम और उभरती प्रौद्योगिकी क्षमताओं को व्यावहारिक बैंकिंग समाधानों में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संयुक्त शोध एवं विकास तथा क्षमता निर्माण के माध्यम से, सी-डेक का लक्ष्य एक सुरक्षित, सुदृढ़ और भविष्य के लिए तैयार वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करना है।”

इस सहयोग पर टिप्पणी करते हुए, बैंक ऑफ इंडिया के कार्यकारी निदेशक राजीव मिश्रा ने कहा, “क्वांटम प्रौद्योगिकियों में साइबर सुरक्षा से लेकर जटिल वित्तीय निर्णय लेने तक, बैंकिंग के कई पहलुओं को नया रूप देने की क्षमता है। सी-डेक के साथ अपने सहयोग के माध्यम से, हमारा लक्ष्य इन उभरती संभावनाओं का व्यवस्थित तरीके से पता लगाना और उनका मूल्यांकन करने के साथ बैंक ऑफ इंडिया को अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी के लिए तैयार करने हेतु आवश्यक ज्ञान और क्षमताओं का निर्माण करना है।”

क्वांटम प्रौद्योगिकियों के अलावा, समझौता ज्ञापन ब्लॉकचेन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और वित्तीय सेवाओं से संबंधित अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग के लिए एक ढांचा प्रदान करता है। संभावित क्षेत्रों में बुद्धिमान तरीके से दस्तावेज़ प्रसंस्करण, ग्राहक और कर्मचारी सहायता, धोखाधड़ी विश्लेषण, क्रेडिट और वित्तीय विश्लेषण, सुरक्षित एआई प्लेटफॉर्म, जिम्मेदार एआई, स्मार्ट अनुबंध, डिजिटल पहचान, सुरक्षित डेटा साझाकरण और बैंकिंग से संबंधित अन्य अनुप्रयोग शामिल हैं।

यह साझेदारी क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन और अन्य उभरती डिजिटल प्रौद्योगिकियों सहित क्षेत्रों में प्रशिक्षण और क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से भविष्य के लिए तैयार प्रतिभा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर भी ध्यान केंद्रित करेगी।

आदित्य कुमार सिन्हा, कार्यकारी निदेशक, सी-डेक मुंबई और सत्येंद्र सिंह, सीजीएम आईटी एवं सीआईओ, बैंक ऑफ इंडिया ने एस. कृष्णन, आईएएस, सचिव, एमईआईटीवाई; राजीव मिश्रा, कार्यकारी निदेशक, बैंक ऑफ इंडिया; सुदीप श्रीवास्तव, संयुक्त सचिव, एमईआईटीवाई; ई. मगेष, महानिदेशक सी-डेक, बैंक ऑफ इंडिया और सी-डेक के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में औपचारिक रूप से समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया।

इस सहयोग के माध्यम से, बैंक ऑफ इंडिया और सी-डेक मुंबई का लक्ष्य स्वदेशी शोध और उभरती प्रौद्योगिकियों को व्यावहारिक बैंकिंग अनुप्रयोगों में बदलने के लिए एक संरचित मार्ग तैयार करना है। इसके साथ ही इसका लक्ष्य सुरक्षित, लचीले और तकनीकी रूप से भविष्य के लिए तैयार वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान देना है।

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