एनसीआर और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने वैधानिक निर्देश जारी किए हैं, जिसमें 2026 की कटाई के मौसम के दौरान गेहूं की पराली को जलाने की रोकथाम और उसकी समस्या को खत्म करने के लिए राज्य कार्य योजनाओं के समन्वित और समयबद्ध कार्यान्वयन को जरूरी बताया गया है। यह निर्देश पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को जारी किए गए हैं, और इसके साथ-साथ जीएनसीटीडी और राजस्थान से भी मदद की अपेक्षा की गई है।
आयोग ने कहा कि कृषि अवशेष जलाने से स्थानीय स्तर पर तथा एनसीआर एवं आस-पास के इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब हो जाती है, इसलिए इसके लिए क्रमबद्ध तरीके से मौसमी तैयारी की आवश्यकता है। इसरो/आईएआरआई द्वारा स्थापित मानक प्रोटोकॉल के अनुसार, गेहूं की कटाई के मौसम (1 अप्रैल से 31 मई 2025) के दौरान पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के एनसीआर जिलों में आग की घटनाओं की संख्या क्रमशः 10207, 1832 और 259 रही। गेहूं की कटाई के मौसम (अप्रैल-मई 2025) के दौरान उपग्रह-आधारित मॉनिटरिंग में पूरे क्षेत्र में आग लगने की ऐसी घटनाओं को रिकॉर्ड किया गया, जिससे धान के मौसम के मौजूदा उपायों के साथ-साथ गेहूं के मौसम में लक्षित उपायों की आवश्यकताओं पर ज़ोर दिया गया।
आयोग ने फसल अवशेष जलाने को नियंत्रित/समाप्त करने के लिए संबंधित राज्यों को एक व्यापक रूपरेखा प्रदान की थी और उन्हें रूपरेखा के मुख्य हिस्सों के आधार पर विस्तृत राज्य-विशिष्ट कार्य योजना बनाने का निर्देश दिया था। इसके अलावा, गेहूं की पराली जलाने के मुद्दे पर 22 दिसंबर, 2025 को आयोग की 26वीं बैठक और उसके बाद पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश की सरकारों के साथ हुई बैठकों में विस्तार से चर्चा की गई थी, जहां राज्य सरकारों ने अपनी कार्ययोजना पेश की और आयोग ने इन राज्यों को अपनी कार्य-योजनाओं को और बेहतर बनाने की सलाह दी।
तदनुसार, आयोग ने अपनी निर्देश संख्या 96 के माध्यम से, संबंधित राज्यों को व्यवहारिक विकल्प सुनिश्चित करने के लिए विशिष्ट सुविधाजनक उपायों के साथ गेहूं के भूसे को जलाने को रोकने के लिए अपनी संबंधित कार्य योजनाओं को कार्यान्वित करने का निर्देश दिया है। आयोग ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि:
इसके अलावा, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार और राजस्थान सरकार को भी सलाह दी गई है कि वे आगामी कटाई के मौसम में गेहूं की पराली जलाने की घटनाओं को खत्म करने के लिए हरसंभव प्रयास करें। राज्य लगातार मॉनिटरिंग और आवश्यक कार्रवाई के लिए आयोग को मासिक प्रगति रिपोर्ट सौंपेंगे।
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